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Yamuna Nagar News: शिवालिक के जंगलों से खैर की लकड़ी के तस्करों का पुष्पा कौन!
Mon, 24 Feb 2025 01:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 24 Feb 2025 01:09 AM IST
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दीपेंद्र कुमार
यमुनानगर। यमुनानगर में बेशकीमती खैर की लकड़ी की तस्करी लगातार बढ़ रही है। तस्करों के हौसले भी पूरी तरह से बुलंद हैं। जिस तरह से तस्करी को अंजाम दिया जा रहा है, उससे कई सवाल पैदा हो गए है।
सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि आखिर यमुनानगर में शिवालिक के जंगलों का पुष्पा कौन है, जिसके संरक्षण में तस्करी का यह पूरा खेल चल रहा है। वहीं वन विभाग की ओर से तस्करी के हॉट स्पॉट चिह्नित किए जा रहे हैं।
यमुनानगर का शिवालिक क्षेत्र खैर के वनों से आच्छादित है। खैर की लकड़ी मजबूत और टिकाऊ होती है और यह जल्दी से खराब नहीं होती। इससे खैरी की लकड़ी का प्रयोग सबसे अधिक फर्नीचर और भवन निर्माण में सबसे अधिक प्रयोग किया जाता है।
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इसके चलते इसकी लकड़ी की मांग बाजार में अधिक रहती है। इससे खैर की तस्करी भी जमकर होती है। पिछले काफी समय से जिले में खैर की तस्करी के मामलों में तेजी आई है। बताया जा रहा है कि पूरे जिले में खैर तस्करों का एक सिंडिकेट काम कर रहा है।
जंगल में जिस समय तस्कर लकड़ी काटते हैं तो एक टीम जंगल के बाहर वन विभाग और पुलिस की गतिविधियों पर नजर रखती है। इसके बाद मौका देखकर लकड़ी को गाड़ियों में भरकर आसपास भेज दिया जाता है। खास बात यह है कि इसके लिए इनोवा, स्कॉर्पियों, क्रेटा जैसी लग्जरी कारों का प्रयोग किया जाता है। पुलिस और वन विभाग की टीम इस सिंडिकेट को तोड़ने में पूरी तरह से नाकाम साबित हो रही है। छोटे-छोटे तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। वहीं तस्करों के सिंडिकेट को तोड़ने में सफलता नहीं मिली है। संवाद
ये हैं खैर तस्करी के हॉट स्पॉट
यमुनानगर के शिवालिक क्षेत्र में चार रेंज हैं। इनमें जगाधरी, साढौरा, कलेसर, छछरौली हैं। जानकारों के अनुसार साढौरा क्षेत्र में असगरपुर, काठगढ़ और संधाय में तस्करी होती है। कलेसर रेंज में कलेसर, फैजपुर, ताजेवाला, अराइयांवाला, खिजरी, आमवाली, टिपड़ियों, बागपत, खिलांवाला, चिक्कन, कांसली, शहजादवाला, मुकारमुर, छछरौली रेंज में जाट्टोवाला, डारपुर, ताहरपुर, जैतपुर, मोहद्दीनपुर, नगली, राजपुर, गोराबनी, हैदरपुर में खैर की तस्करी अधिक होती है। बताते हैं कि खैर की लकड़़ी की तस्करी करने वाले इन्हीं गांवों से जुड़े हैं।
खैर के जंगलों में तस्करी के मामलों पर लगाम लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं। समय-समय पर तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाता है। साथ ही उनके वाहन भी जब्त किए जाते हैं। विशेष टीम का गठन कर तस्करी से जुड़े गांवों को चिह्नित किया जा रहा है। इन पर विशेष नजर रखी जा रही है। -वीरेंद्र गिल, डीएफओ यमुनानगर।
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यमुनानगर। यमुनानगर में बेशकीमती खैर की लकड़ी की तस्करी लगातार बढ़ रही है। तस्करों के हौसले भी पूरी तरह से बुलंद हैं। जिस तरह से तस्करी को अंजाम दिया जा रहा है, उससे कई सवाल पैदा हो गए है।
सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि आखिर यमुनानगर में शिवालिक के जंगलों का पुष्पा कौन है, जिसके संरक्षण में तस्करी का यह पूरा खेल चल रहा है। वहीं वन विभाग की ओर से तस्करी के हॉट स्पॉट चिह्नित किए जा रहे हैं।
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यमुनानगर का शिवालिक क्षेत्र खैर के वनों से आच्छादित है। खैर की लकड़ी मजबूत और टिकाऊ होती है और यह जल्दी से खराब नहीं होती। इससे खैरी की लकड़ी का प्रयोग सबसे अधिक फर्नीचर और भवन निर्माण में सबसे अधिक प्रयोग किया जाता है।
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इसके चलते इसकी लकड़ी की मांग बाजार में अधिक रहती है। इससे खैर की तस्करी भी जमकर होती है। पिछले काफी समय से जिले में खैर की तस्करी के मामलों में तेजी आई है। बताया जा रहा है कि पूरे जिले में खैर तस्करों का एक सिंडिकेट काम कर रहा है।
जंगल में जिस समय तस्कर लकड़ी काटते हैं तो एक टीम जंगल के बाहर वन विभाग और पुलिस की गतिविधियों पर नजर रखती है। इसके बाद मौका देखकर लकड़ी को गाड़ियों में भरकर आसपास भेज दिया जाता है। खास बात यह है कि इसके लिए इनोवा, स्कॉर्पियों, क्रेटा जैसी लग्जरी कारों का प्रयोग किया जाता है। पुलिस और वन विभाग की टीम इस सिंडिकेट को तोड़ने में पूरी तरह से नाकाम साबित हो रही है। छोटे-छोटे तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। वहीं तस्करों के सिंडिकेट को तोड़ने में सफलता नहीं मिली है। संवाद
ये हैं खैर तस्करी के हॉट स्पॉट
यमुनानगर के शिवालिक क्षेत्र में चार रेंज हैं। इनमें जगाधरी, साढौरा, कलेसर, छछरौली हैं। जानकारों के अनुसार साढौरा क्षेत्र में असगरपुर, काठगढ़ और संधाय में तस्करी होती है। कलेसर रेंज में कलेसर, फैजपुर, ताजेवाला, अराइयांवाला, खिजरी, आमवाली, टिपड़ियों, बागपत, खिलांवाला, चिक्कन, कांसली, शहजादवाला, मुकारमुर, छछरौली रेंज में जाट्टोवाला, डारपुर, ताहरपुर, जैतपुर, मोहद्दीनपुर, नगली, राजपुर, गोराबनी, हैदरपुर में खैर की तस्करी अधिक होती है। बताते हैं कि खैर की लकड़़ी की तस्करी करने वाले इन्हीं गांवों से जुड़े हैं।
खैर के जंगलों में तस्करी के मामलों पर लगाम लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं। समय-समय पर तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाता है। साथ ही उनके वाहन भी जब्त किए जाते हैं। विशेष टीम का गठन कर तस्करी से जुड़े गांवों को चिह्नित किया जा रहा है। इन पर विशेष नजर रखी जा रही है। -वीरेंद्र गिल, डीएफओ यमुनानगर।