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Yamuna Nagar News: मंडियों में जूट के बजाय प्लास्टिक बैग में की जाएगी गेहूं की भराई
Fri, 03 Apr 2026 03:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 03 Apr 2026 03:54 AM IST
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जगाधरी अनाज मंडी में तौलाई के लिए खड़ी ट्रैक्टर ट्राली। संवाद
राजेश कुमार
यमुनानगर। अनाज मंडियों में इस बार गेहूं की सरकारी खरीद के साथ एक बड़ा बदलाव किया गया है। अब तक जहां गेहूं की भराई जूट की बोरियों में की जाती थी, वहीं इस बार सरकार के निर्देश पर प्लास्टिक के एचडीपीई (हाई डेंसिटी पॉलीएथिलीन) बैग में गेहूं भरा जाएगा।
इस नई व्यवस्था के तहत आढ़तियों को प्लास्टिक का बारदाना उपलब्ध कराया जाएगा और तौलाई के बाद सीधे इन्हीं कट्टों में गेहूं की पैकिंग होगी। हालांकि इस बदलाव के कारणों के संबंध में स्थानीय अधिकारी खुलकर कुछ नहीं बता रहे हैं, लेकिन माना जा रहा है कि एचडीपीई बैग जूट की बोरी के मुकाबले सस्ते पड़ते हैं।
इसके अलावा वीरवार को विभिन्न मंडियों में कुल 4612 क्विंटल गेहूं की आवक दर्ज की गई, जिसमें से केवल 900 क्विंटल की ही खरीद हो सकी। इन बैगों की एक खासियत यह भी है कि बाहर से ही यह स्पष्ट हो जाता है कि अंदर कौन सा अनाज भरा है, जबकि जूट की बोरियों में यह संभव नहीं होता। वहीं प्लास्टिक बैग में बारिश के दौरान गेहूं के भीगने का खतरा भी न के बराबर है।
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ऐसे में फसल खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से भी यह निर्णय लिया गया माना जा रहा है। जिले में डीएफएससी, हैफेड और हरियाणा स्टेट वेयरहाउस कॉरपोरेशन की ओर से गेहूं की खरीद की जा रही है। जिले में इस बार गेहूं का कुल रकबा 90 हजार हेक्टेयर है। एजेंसियों ने करीब 3.36 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा है। मंडियों में गेहूं की खरीद प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन दूसरे दिन वीरवार को भी आवक अपेक्षाकृत धीमी रही। खरीद की रफ्तार धीमी रहने का मुख्य कारण गेहूं में नमी की मात्रा अधिक होना है। संवाद
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यमुनानगर। अनाज मंडियों में इस बार गेहूं की सरकारी खरीद के साथ एक बड़ा बदलाव किया गया है। अब तक जहां गेहूं की भराई जूट की बोरियों में की जाती थी, वहीं इस बार सरकार के निर्देश पर प्लास्टिक के एचडीपीई (हाई डेंसिटी पॉलीएथिलीन) बैग में गेहूं भरा जाएगा।
इस नई व्यवस्था के तहत आढ़तियों को प्लास्टिक का बारदाना उपलब्ध कराया जाएगा और तौलाई के बाद सीधे इन्हीं कट्टों में गेहूं की पैकिंग होगी। हालांकि इस बदलाव के कारणों के संबंध में स्थानीय अधिकारी खुलकर कुछ नहीं बता रहे हैं, लेकिन माना जा रहा है कि एचडीपीई बैग जूट की बोरी के मुकाबले सस्ते पड़ते हैं।
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इसके अलावा वीरवार को विभिन्न मंडियों में कुल 4612 क्विंटल गेहूं की आवक दर्ज की गई, जिसमें से केवल 900 क्विंटल की ही खरीद हो सकी। इन बैगों की एक खासियत यह भी है कि बाहर से ही यह स्पष्ट हो जाता है कि अंदर कौन सा अनाज भरा है, जबकि जूट की बोरियों में यह संभव नहीं होता। वहीं प्लास्टिक बैग में बारिश के दौरान गेहूं के भीगने का खतरा भी न के बराबर है।
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ऐसे में फसल खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से भी यह निर्णय लिया गया माना जा रहा है। जिले में डीएफएससी, हैफेड और हरियाणा स्टेट वेयरहाउस कॉरपोरेशन की ओर से गेहूं की खरीद की जा रही है। जिले में इस बार गेहूं का कुल रकबा 90 हजार हेक्टेयर है। एजेंसियों ने करीब 3.36 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा है। मंडियों में गेहूं की खरीद प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन दूसरे दिन वीरवार को भी आवक अपेक्षाकृत धीमी रही। खरीद की रफ्तार धीमी रहने का मुख्य कारण गेहूं में नमी की मात्रा अधिक होना है। संवाद

जगाधरी अनाज मंडी में तौलाई के लिए खड़ी ट्रैक्टर ट्राली। संवाद