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Yamuna Nagar News: टोपरा कलां, सुघ और संधाए गांव में तलाशेंगे बौद्ध विरासत
Fri, 10 Jan 2025 01:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 10 Jan 2025 01:28 AM IST
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सुरेश सैनी
यमुनानगर। टोपरा कलां, सुघ व संधाए गांव की जमीन में समाई अमूल्य ऐतिहासिक बौद्ध विरासत को धरातल पर लाने के लिए अब भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर (आईआईटी) की टीम जीपीएस सर्वे से खोज करेगी। यह टीम 20 जनवरी को जिले की तीनों साइटों पर दस्तक देगी।
सर्वे के दौरान जहां जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) तकनीक की मदद से डिजिटल मैप तैयार किया जाएगा। सर्वे में जहां-जहां विरासत मिलने के संकेत मिलेंगे, वहां पर गड्ढे किए जाएंगे।
इसके बाद उनकी खोदाई कराकर उस विरासत को बाहर निकाला जाएगा, यह पूरी प्रक्रिया पुरातत्व विभाग की देखरेख में होगी। इस प्रकार की ऐतिहासिक विरासत की खोज के लिए यमुनानगर जिले में अब तक का यह सबसे बड़ा जीपीएस सर्वे होगा।
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उल्लेखनीय है कि भगवान बुद्ध के जिले में चरण पड़े थे। इस पर यमुनानगर एक समय में बौद्ध धर्म की नगरी रहा है, जिसके साक्ष्य आज भी मौजूद हैं। पुरातत्व विभाग की डिप्टी डायरेक्टर बिनानी भट्टाचार्य के मुताबिक टोपरा कलां में 2400 साल से भी अधिक समय की अमूल्य ऐतिहासिक विरासत यहां की भूमि में समाई हुई है। वर्ष 2023 नवंबर माह में टोपरा कलां गांव में हड़प्पा काल के बर्तन और ठीकरे मिल चुके हैं।
टोपरा कलां गांव में ही देश का सबसे ऊंचा 30 फीट का अशोक चक्र स्थापित है, जिसका नाम लिम्का बुक ऑफ में रिकॉर्ड है। इसी अशोक चक्र के नाम से अशोका पार्क भी बना है। सुघ गांव में प्राचीन टीला, जिसे सुघ के प्राचीन स्थल के रूप में भी जाना जाता है। इस टीले की परिधि लगभग पांच किमी है।
यह यमुना नदी के बाढ़ क्षेत्र के पश्चिमी तट पर स्थित है। इसी प्रकार संधाए गांव में भी ऐतिहासिक वस्तुएं समाई हुई हैं। वहीं गांव चनेटी के करीब 100 वर्ग मीटर के क्षेत्र में ईंटों से बने से 8 मीटर की ऊंचाई वाला एक विशाल मकबरा है। गोल आकार में बना, यह एक पुराना बौद्ध स्तूप है। संवाद
अग्रोहा में टीम कर चुकी सर्वे
टोपरा कलां, सुघ व संधाए गांव में ऐतिहासिक बौद्ध विरासत को बाहर निकालने के लिए पुरातत्व विभाग ने पांच -छह माह पूर्व कानपुर की आईआईटी स्पेशल टीम से संपर्क किया था। यह टीम अग्रोहा में भी सर्वे कर चुकी है। ऐसे में अब 20 जनवरी को यह टीम जिले में पहुंचकर यहां की विरासत को धरातल पर लाने के लिए कार्य करेगी। बताया जा रहा है इस टीम में छह से सात लोग होंगे। निकलने वाली धरोहर को बाद में संग्रहालय में रखा जाएगा।
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यमुनानगर। टोपरा कलां, सुघ व संधाए गांव की जमीन में समाई अमूल्य ऐतिहासिक बौद्ध विरासत को धरातल पर लाने के लिए अब भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर (आईआईटी) की टीम जीपीएस सर्वे से खोज करेगी। यह टीम 20 जनवरी को जिले की तीनों साइटों पर दस्तक देगी।
सर्वे के दौरान जहां जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) तकनीक की मदद से डिजिटल मैप तैयार किया जाएगा। सर्वे में जहां-जहां विरासत मिलने के संकेत मिलेंगे, वहां पर गड्ढे किए जाएंगे।
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इसके बाद उनकी खोदाई कराकर उस विरासत को बाहर निकाला जाएगा, यह पूरी प्रक्रिया पुरातत्व विभाग की देखरेख में होगी। इस प्रकार की ऐतिहासिक विरासत की खोज के लिए यमुनानगर जिले में अब तक का यह सबसे बड़ा जीपीएस सर्वे होगा।
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उल्लेखनीय है कि भगवान बुद्ध के जिले में चरण पड़े थे। इस पर यमुनानगर एक समय में बौद्ध धर्म की नगरी रहा है, जिसके साक्ष्य आज भी मौजूद हैं। पुरातत्व विभाग की डिप्टी डायरेक्टर बिनानी भट्टाचार्य के मुताबिक टोपरा कलां में 2400 साल से भी अधिक समय की अमूल्य ऐतिहासिक विरासत यहां की भूमि में समाई हुई है। वर्ष 2023 नवंबर माह में टोपरा कलां गांव में हड़प्पा काल के बर्तन और ठीकरे मिल चुके हैं।
टोपरा कलां गांव में ही देश का सबसे ऊंचा 30 फीट का अशोक चक्र स्थापित है, जिसका नाम लिम्का बुक ऑफ में रिकॉर्ड है। इसी अशोक चक्र के नाम से अशोका पार्क भी बना है। सुघ गांव में प्राचीन टीला, जिसे सुघ के प्राचीन स्थल के रूप में भी जाना जाता है। इस टीले की परिधि लगभग पांच किमी है।
यह यमुना नदी के बाढ़ क्षेत्र के पश्चिमी तट पर स्थित है। इसी प्रकार संधाए गांव में भी ऐतिहासिक वस्तुएं समाई हुई हैं। वहीं गांव चनेटी के करीब 100 वर्ग मीटर के क्षेत्र में ईंटों से बने से 8 मीटर की ऊंचाई वाला एक विशाल मकबरा है। गोल आकार में बना, यह एक पुराना बौद्ध स्तूप है। संवाद
अग्रोहा में टीम कर चुकी सर्वे
टोपरा कलां, सुघ व संधाए गांव में ऐतिहासिक बौद्ध विरासत को बाहर निकालने के लिए पुरातत्व विभाग ने पांच -छह माह पूर्व कानपुर की आईआईटी स्पेशल टीम से संपर्क किया था। यह टीम अग्रोहा में भी सर्वे कर चुकी है। ऐसे में अब 20 जनवरी को यह टीम जिले में पहुंचकर यहां की विरासत को धरातल पर लाने के लिए कार्य करेगी। बताया जा रहा है इस टीम में छह से सात लोग होंगे। निकलने वाली धरोहर को बाद में संग्रहालय में रखा जाएगा।