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नायब तहसीलदार न मिले तो जाम
यमुनानगर
Updated Sat, 11 Jan 2014 12:22 AM IST
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छछरौली के नायब तहसीलदार के मामले में शुक्रवार को लघु सचिवालय में करीब
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चार घंटे तक पंचायत हुई। इस दौरान लापता नायब तहसीलदार की तलाश के लिए
प्रशासन को और समय देने को लेकर पंचायत में मौजूद लोगों में तनातनी हो गई।
पुलिस प्रशासन की ओर से इस मामले की सीबीआई जांच की पेशकश को परिजनों ने नकार दिया। पुलिस प्रशासन को अल्टीमेटम दिया गया कि यदि सोमवार तक नायब तहसीलदार का पता न लग पाया तो दोबारा पंचायत कर सड़क पर जाम लगाया जाएगा। तयशुदा कार्यक्रम के तहत नायब तहसीलदार आनंद रावल के परिजन और छछरौली इलाके के सैकड़ों लोग लघु सचिवालय के सामने अनाजमंडी गेट पर पहुंचे।
उनके साथ घरौंडा के विधायक नरेंद्र सांगवान और पूर्व विधायक भरत सिंह छौक्कर भी थे। कुछ देर तक अनाजमंडी गेट पर बैठने के बाद सभी लघु सचिवालय परिसर की ओर बढ़े। लघु सचिवालय परिसर में आकर सरकार, पुलिस प्रशासन और कांग्रेसी नेता के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
इसके बाद सभी परिसर में पंचायत हुई। इस दौरान कुछ लोग सड़क पर जाम लगाने की बात कह रहे थे, वहीं कुछ लोग प्रशासन से बातचीत के पक्ष में थे। बाद में इस मामले में बनाई गई कमेटी के कुछ सदस्य पुलिस अधीक्षक से बातचीत के लिए उनके कमरे में गए। करीब आधे घंटे बाद उन्होंने बाहर आकर बताया कि पुलिस प्रशासन नायब तहसीलदार का पता लगाने के लिए सोमवार तक समय मांग रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस अधीक्षक ने पेशकश की है कि यदि नायब तहसीलदार के परिजन पुलिस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है तो वे इस मामले की सीबीआई जांच की मांग कर सकते हैं। इस पर चर्चा के दौरान पंचायत में मौजूद लोग दोफाड़ हो गए। एक पक्ष पुलिस प्रशासन को और समय न देेने के हक में था, जबकि दूसरा पक्ष सोमवार तक समय देने की वकालत कर रहा था।
इस मामले की सीबीआई से जांच की पेशकश को परिजन और मौजिज लोगों ने सिरे से नकार दिया। उनका कहना था कि पहले पुलिस इस मामले में अपनी कार्रवाई करे। तनातनी के दौरान कमेटी में शामिल सत्ता पक्ष के नेता पर राजनीति करने और इस मामले में कांग्रेस नेता को बचाने का आरोप भी मढ़ा गया।
साथ ही प्रदेश सरकार के इशारे पर पुलिस प्रशासन द्वारा कांग्रेसी नेता के खिलाफ कार्रवाई न करने का आरोप भी लगाया गया। तनातनी बढ़ने पर लोगों ने बीच बचाव कर मामला शांत करवाया। इसके बाद डीएसपी अजय राणा ने मौके आकर लोगों को समझाया कि नायब तहसीलदार को ढूंढने की पूरी कोशिश की जा रही है। इसके लिए कई टीमें बनाई गई हैं, जो दिन-रात संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
करीब चार घंटे तक चली पंचायत में आखिरकार यह फैसला हुआ कि पुलिस प्रशासन को सोमवार तक का समय दिया जाए। यदि तब तक पुलिस नायब तहसीलदार का पता न लगा पाई तो दोबारा पंचायत कर अगली रणनीति बनाई जाएगी और सड़क पर जाम लगाया जाएगा।
इस मौके पर घरौंडा विधायक नरेश सांगवान, पूर्व विधायक रतन सिंह छौक्कर, पूर्व विधायक कंवर पाल, पूर्व विधायक अर्जुन सिंह, अमरपाल आर्य, प्रो. विधु रावल, सुभाष धौड़ंग, रतन सिंह देवधर, सतीश पोसवाल, साहिब सिंह गुर्जर, मोहन वर्मा, चरन सिंह रावल, सचिन गुर्जर, देवरथ एडवोकेट, बलदेव तेलीपुरा, पंडित उदयवीर शास्त्री, राधे कौहंड, प्रीतम देवधर, नसीन खान, परमिंदर देवधर, मेघराज रावल, सरपंच ओम सिंह, किरपाल माड़ो, सरपंच भरत सिंह, मान सिंह मुजाफत, संजय आर्य, सुशील गुर्जर, तेजपाल फौजी, विकास बोहता, देवराज घोड़ो पीपली, विनीत पोसवाल मौजूद रहे।
पुलिस प्रशासन की ओर से इस मामले की सीबीआई जांच की पेशकश को परिजनों ने नकार दिया। पुलिस प्रशासन को अल्टीमेटम दिया गया कि यदि सोमवार तक नायब तहसीलदार का पता न लग पाया तो दोबारा पंचायत कर सड़क पर जाम लगाया जाएगा। तयशुदा कार्यक्रम के तहत नायब तहसीलदार आनंद रावल के परिजन और छछरौली इलाके के सैकड़ों लोग लघु सचिवालय के सामने अनाजमंडी गेट पर पहुंचे।
उनके साथ घरौंडा के विधायक नरेंद्र सांगवान और पूर्व विधायक भरत सिंह छौक्कर भी थे। कुछ देर तक अनाजमंडी गेट पर बैठने के बाद सभी लघु सचिवालय परिसर की ओर बढ़े। लघु सचिवालय परिसर में आकर सरकार, पुलिस प्रशासन और कांग्रेसी नेता के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
इसके बाद सभी परिसर में पंचायत हुई। इस दौरान कुछ लोग सड़क पर जाम लगाने की बात कह रहे थे, वहीं कुछ लोग प्रशासन से बातचीत के पक्ष में थे। बाद में इस मामले में बनाई गई कमेटी के कुछ सदस्य पुलिस अधीक्षक से बातचीत के लिए उनके कमरे में गए। करीब आधे घंटे बाद उन्होंने बाहर आकर बताया कि पुलिस प्रशासन नायब तहसीलदार का पता लगाने के लिए सोमवार तक समय मांग रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस अधीक्षक ने पेशकश की है कि यदि नायब तहसीलदार के परिजन पुलिस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है तो वे इस मामले की सीबीआई जांच की मांग कर सकते हैं। इस पर चर्चा के दौरान पंचायत में मौजूद लोग दोफाड़ हो गए। एक पक्ष पुलिस प्रशासन को और समय न देेने के हक में था, जबकि दूसरा पक्ष सोमवार तक समय देने की वकालत कर रहा था।
इस मामले की सीबीआई से जांच की पेशकश को परिजन और मौजिज लोगों ने सिरे से नकार दिया। उनका कहना था कि पहले पुलिस इस मामले में अपनी कार्रवाई करे। तनातनी के दौरान कमेटी में शामिल सत्ता पक्ष के नेता पर राजनीति करने और इस मामले में कांग्रेस नेता को बचाने का आरोप भी मढ़ा गया।
साथ ही प्रदेश सरकार के इशारे पर पुलिस प्रशासन द्वारा कांग्रेसी नेता के खिलाफ कार्रवाई न करने का आरोप भी लगाया गया। तनातनी बढ़ने पर लोगों ने बीच बचाव कर मामला शांत करवाया। इसके बाद डीएसपी अजय राणा ने मौके आकर लोगों को समझाया कि नायब तहसीलदार को ढूंढने की पूरी कोशिश की जा रही है। इसके लिए कई टीमें बनाई गई हैं, जो दिन-रात संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
करीब चार घंटे तक चली पंचायत में आखिरकार यह फैसला हुआ कि पुलिस प्रशासन को सोमवार तक का समय दिया जाए। यदि तब तक पुलिस नायब तहसीलदार का पता न लगा पाई तो दोबारा पंचायत कर अगली रणनीति बनाई जाएगी और सड़क पर जाम लगाया जाएगा।
इस मौके पर घरौंडा विधायक नरेश सांगवान, पूर्व विधायक रतन सिंह छौक्कर, पूर्व विधायक कंवर पाल, पूर्व विधायक अर्जुन सिंह, अमरपाल आर्य, प्रो. विधु रावल, सुभाष धौड़ंग, रतन सिंह देवधर, सतीश पोसवाल, साहिब सिंह गुर्जर, मोहन वर्मा, चरन सिंह रावल, सचिन गुर्जर, देवरथ एडवोकेट, बलदेव तेलीपुरा, पंडित उदयवीर शास्त्री, राधे कौहंड, प्रीतम देवधर, नसीन खान, परमिंदर देवधर, मेघराज रावल, सरपंच ओम सिंह, किरपाल माड़ो, सरपंच भरत सिंह, मान सिंह मुजाफत, संजय आर्य, सुशील गुर्जर, तेजपाल फौजी, विकास बोहता, देवराज घोड़ो पीपली, विनीत पोसवाल मौजूद रहे।