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नॉन स्टॉप गुजर जाती हैं ट्रेनें, जाना पड़ता है अंबाला-सहारनपुर
ब्यूरो/अमर उजाला/यमुनानगर
Updated Sun, 07 Feb 2016 12:22 AM IST
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यमुनानगर-जगाधरी रेलवे स्टेशन से करीब एक दर्जन ट्रेनें नॉन स्टॉप गुजरती हैं। कई वर्षों से इनके ठहराव की मांग पूरी न होने से जिलावासियों को इन गाड़ियों के लिए अंबाला-सहारनपुर की दौड़ लगानी पड़ती है। अब भाजपा सरकार के रेल बजट से दैनिक व अन्य यात्रियों को उम्मीद है कि उनकी मांगों के मद्देनजर इस बार क्षेत्र को ट्रेनों के ठहराव की सौगात भी मिल सकेगी।
बता दें कि जिले में प्लाइवुड और मैटल से जुड़ी हजारों ओद्यौगिक इकाइयां हैं। इनमें कार्यरत लाखों प्रवासी लोग उत्तरप्रदेश, बिहार व उत्तराखंड सहित देश के विभिन्न राज्यों से आकर जिले में रच-बस गए हैं। इनका तीज-त्योहार, विवाह व अन्य मौकों पर अपने घर आना-जाना लगा रहता है।
साथ लगते जिलों व राज्यों के हजारों छात्र-छात्राओं का शिक्षा ग्रहण करने जिले में आना-जाना रहता है वहीं, जिले से भी हजारों युवा बाहर पढने जाते हैं। इसके अलावा नौकरीपेशा लोग जिले में आते व बाहर जाते हैं। उक्त सभी वर्ग ट्रेनों पर निर्भर हैं, किंतु यमुनानगर-जगाधरी व जिले में लगते अन्य छोटे स्टेशनों पर बहुत कम ट्रेनों के ठहराव के कारण उन्हें रोजाना दिक्कतों से दो-चार होना पड़ रहा है।
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इसी समस्या को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे दैनिक रेल यात्री संघ के संरक्षक नरेश कुमार व विशाल भाटिया और मैढ सुनार परिषद् के प्रधान राजेश वर्मा, हरियाणा व्यापार मंडल सदस्य प्रवीन का कहना है कि जगाधरी स्टेशन व जिले में लगते अन्य छोटे स्टेशनों से हर दिन करीब 20 हजार यात्री ट्रेनों से सफर करते हैं। इतने अधिक यात्रियों की आवाजाही होने के बावजूद जिले के प्रमुख यमुनानगर-जगाधरी स्टेशन पर करीब एक दर्जन ट्रेनें नॉन स्टॉप चल रही हैं, जिनके ठहराव की मांग कई वर्षों से की जा रही है।
इन गाड़ियों को पकडने के लिए यात्रियों को अंबाला या सहारनपुर जाना पड़ता है। इसमें आर्थिक व समय की बर्बादी के बीच लोगों को दिक्कतों से दो-चार होना पड़ रहा है। उन्हें उम्मीद है कि इस बार भाजपा सरकार अपने रेले बजट में क्षेत्र को रेलवे में कई सौगातें देंगी, जिनमें जगाधरी स्टेशन पर मांग के मुताबिक ट्रेनों का ठहराव भी दिया जाएगा।
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बता दें कि जिले में प्लाइवुड और मैटल से जुड़ी हजारों ओद्यौगिक इकाइयां हैं। इनमें कार्यरत लाखों प्रवासी लोग उत्तरप्रदेश, बिहार व उत्तराखंड सहित देश के विभिन्न राज्यों से आकर जिले में रच-बस गए हैं। इनका तीज-त्योहार, विवाह व अन्य मौकों पर अपने घर आना-जाना लगा रहता है।
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साथ लगते जिलों व राज्यों के हजारों छात्र-छात्राओं का शिक्षा ग्रहण करने जिले में आना-जाना रहता है वहीं, जिले से भी हजारों युवा बाहर पढने जाते हैं। इसके अलावा नौकरीपेशा लोग जिले में आते व बाहर जाते हैं। उक्त सभी वर्ग ट्रेनों पर निर्भर हैं, किंतु यमुनानगर-जगाधरी व जिले में लगते अन्य छोटे स्टेशनों पर बहुत कम ट्रेनों के ठहराव के कारण उन्हें रोजाना दिक्कतों से दो-चार होना पड़ रहा है।
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इसी समस्या को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे दैनिक रेल यात्री संघ के संरक्षक नरेश कुमार व विशाल भाटिया और मैढ सुनार परिषद् के प्रधान राजेश वर्मा, हरियाणा व्यापार मंडल सदस्य प्रवीन का कहना है कि जगाधरी स्टेशन व जिले में लगते अन्य छोटे स्टेशनों से हर दिन करीब 20 हजार यात्री ट्रेनों से सफर करते हैं। इतने अधिक यात्रियों की आवाजाही होने के बावजूद जिले के प्रमुख यमुनानगर-जगाधरी स्टेशन पर करीब एक दर्जन ट्रेनें नॉन स्टॉप चल रही हैं, जिनके ठहराव की मांग कई वर्षों से की जा रही है।
इन गाड़ियों को पकडने के लिए यात्रियों को अंबाला या सहारनपुर जाना पड़ता है। इसमें आर्थिक व समय की बर्बादी के बीच लोगों को दिक्कतों से दो-चार होना पड़ रहा है। उन्हें उम्मीद है कि इस बार भाजपा सरकार अपने रेले बजट में क्षेत्र को रेलवे में कई सौगातें देंगी, जिनमें जगाधरी स्टेशन पर मांग के मुताबिक ट्रेनों का ठहराव भी दिया जाएगा।