{"_id":"699b5293b1df530627045a47","slug":"told-the-devotees-the-importance-of-faith-and-devotion-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1018-151824-2026-02-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Yamuna Nagar News: श्रद्धालुओं को बताया श्रद्धा और भक्ति का महत्व","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Yamuna Nagar News: श्रद्धालुओं को बताया श्रद्धा और भक्ति का महत्व
Mon, 23 Feb 2026 12:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 23 Feb 2026 12:31 AM IST
विज्ञापन
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में प्रवचन सुनने पहुंचे श्रद्धालु। आयोजक
संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में आयोजित साप्ताहिक सत्संग में स्वामी कृष्णकुमारानंद ने श्रद्धा और भक्ति के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्रद्धा ही भक्ति में दिव्यता और पूर्णता का संचार करती है। श्रद्धा के बिना भक्ति केवल एक औपचारिकता बनकर रह जाती है।
उन्होंने कहा कि अधिकांश लोग सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति या दुख-संकट से बचने के लिए भक्ति करते हैं, जबकि सच्ची भक्ति श्रद्धा और समर्पण से ही संभव है। गीत का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा है कि श्रद्धावान मनुष्य ही ज्ञान और भक्ति का अधिकारी होता है। श्रद्धा से ही भक्त का हृदय प्रभु कृपा को ग्रहण करने योग्य बनता है।
उनहोंने कहा कि द्रौपदी की रक्षा उसकी अटूट श्रद्धा के कारण हुई और माता शबरी की श्रद्धा ने उन्हें श्रीराम की पहचान कराई। उन्होंने कहा कि बिना आध्यात्मिक जागृति के सच्ची श्रद्धा उत्पन्न नहीं हो सकती। ब्रह्मज्ञान के माध्यम से आत्म साक्षात्कार होने पर ही परमात्मा के प्रति वास्तविक विश्वास और प्रेम प्रकट होता है। कार्यक्रम का समापन सामूहिक ध्यान साधना और भजन-कीर्तन के साथ हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन
व्यासपुर। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में आयोजित साप्ताहिक सत्संग में स्वामी कृष्णकुमारानंद ने श्रद्धा और भक्ति के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्रद्धा ही भक्ति में दिव्यता और पूर्णता का संचार करती है। श्रद्धा के बिना भक्ति केवल एक औपचारिकता बनकर रह जाती है।
उन्होंने कहा कि अधिकांश लोग सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति या दुख-संकट से बचने के लिए भक्ति करते हैं, जबकि सच्ची भक्ति श्रद्धा और समर्पण से ही संभव है। गीत का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा है कि श्रद्धावान मनुष्य ही ज्ञान और भक्ति का अधिकारी होता है। श्रद्धा से ही भक्त का हृदय प्रभु कृपा को ग्रहण करने योग्य बनता है।
विज्ञापन
उनहोंने कहा कि द्रौपदी की रक्षा उसकी अटूट श्रद्धा के कारण हुई और माता शबरी की श्रद्धा ने उन्हें श्रीराम की पहचान कराई। उन्होंने कहा कि बिना आध्यात्मिक जागृति के सच्ची श्रद्धा उत्पन्न नहीं हो सकती। ब्रह्मज्ञान के माध्यम से आत्म साक्षात्कार होने पर ही परमात्मा के प्रति वास्तविक विश्वास और प्रेम प्रकट होता है। कार्यक्रम का समापन सामूहिक ध्यान साधना और भजन-कीर्तन के साथ हुआ।
विज्ञापन