{"_id":"68054e213d5444ccab0d05c5","slug":"this-time-a-rare-coincidence-is-happening-on-akshaya-tritiya-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1023-136463-2025-04-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Yamuna Nagar News: अबकी बार अक्षय तृतीया पर बन रहा दुर्लभ संयोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Yamuna Nagar News: अबकी बार अक्षय तृतीया पर बन रहा दुर्लभ संयोग
विज्ञापन
साढौरा। हर साल वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया के रूप में मनाया जाता है। यह दिन किसी भी शुभ काम की शुरूआत के लिए अच्छा माना जाता है। साथ ही इस दिन देवी लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने से जीवन आर्थिक संपन्नता, सौभाग्य और समृद्धि आती है।
अक्षय का अर्थ ही होता है जिसका कभी क्षय न हो अर्थात कभी भी खत्म न हो इसके अलावा अक्षय तृतीया पर खरीददारी करना भी बहुत अच्छा माना जाता है। अबकी बार अक्षय तृतीया पर बहुत ही शुभ और दुर्लभ संयोग बन रहा है।
अक्षय तृतीया के दिन यानी 30 अप्रैल को दोपहर 12 बजकर 02 मिनट पर शोभन योग का संयोग बन रहा है। साथ ही इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और शुभ योग भी बन रहा है। अक्षय तृतीया के दिन रोहिणी, मृगशिरा नक्षत्र गर और वणिज करण के योग भी बन रहे हैं। गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के संचालक पंडित रामराज कौशिक ने बताया कि तिथियों की घटत बढ़त होने के कारण कई लोग परशुराम जयंती और अक्षय तृतीया की तिथि को लेकर असमंजस में हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार जो दिशा निर्देश दिए हैं उनमें ही यह त्योहार पर्व मनाने शास्त्र सम्मत हैं।
विज्ञापन
वैशाख शुक्ल तृतीया को भगवान परशुराम जयंती मनाई जाती है। भविष्य पुराण के अनुसार वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के रात्रि के प्रथम प्रहर अर्थात प्रदोष काल में भगवान परशुराम का अंश अवतार हुआ था। धर्म सिंधु के अनुसार भी इसे प्रदोष व्यापनी तृतीया तिथि में ग्रहण करने का निर्देश दिया है। इस वर्ष 29 अप्रैल मंगलवार को तृतीया तिथि शाम 5:31 के बाद रात्रि प्रथम प्रहर (प्रदोष) व्यापनी है। अतः भगवान परशुराम जयंती 29 अप्रैल मंगलवार को मनानी शास्त्र सम्मत होगी और अगले दिन 30 अप्रैल को तृतीया तिथि प्रदोष व्यापनी नहीं है अतः उसे दिन उदय तिथि होने के कारण अक्षय तृतीया मनाई जाएगी। इस साल अक्षय तृतीया 30 अप्रैल, दिन बुधवार को है।
तृतीया तिथि की शुरुआत 29 अप्रैल को शाम 05 बजकर 31 मिनट पर हो जाएगी, जिसका समापन 30 अप्रैल दोपहर 02 बजकर 12 मिनट पर होगा।
विज्ञापन
अक्षय का अर्थ ही होता है जिसका कभी क्षय न हो अर्थात कभी भी खत्म न हो इसके अलावा अक्षय तृतीया पर खरीददारी करना भी बहुत अच्छा माना जाता है। अबकी बार अक्षय तृतीया पर बहुत ही शुभ और दुर्लभ संयोग बन रहा है।
विज्ञापन
अक्षय तृतीया के दिन यानी 30 अप्रैल को दोपहर 12 बजकर 02 मिनट पर शोभन योग का संयोग बन रहा है। साथ ही इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और शुभ योग भी बन रहा है। अक्षय तृतीया के दिन रोहिणी, मृगशिरा नक्षत्र गर और वणिज करण के योग भी बन रहे हैं। गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के संचालक पंडित रामराज कौशिक ने बताया कि तिथियों की घटत बढ़त होने के कारण कई लोग परशुराम जयंती और अक्षय तृतीया की तिथि को लेकर असमंजस में हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार जो दिशा निर्देश दिए हैं उनमें ही यह त्योहार पर्व मनाने शास्त्र सम्मत हैं।
विज्ञापन
वैशाख शुक्ल तृतीया को भगवान परशुराम जयंती मनाई जाती है। भविष्य पुराण के अनुसार वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के रात्रि के प्रथम प्रहर अर्थात प्रदोष काल में भगवान परशुराम का अंश अवतार हुआ था। धर्म सिंधु के अनुसार भी इसे प्रदोष व्यापनी तृतीया तिथि में ग्रहण करने का निर्देश दिया है। इस वर्ष 29 अप्रैल मंगलवार को तृतीया तिथि शाम 5:31 के बाद रात्रि प्रथम प्रहर (प्रदोष) व्यापनी है। अतः भगवान परशुराम जयंती 29 अप्रैल मंगलवार को मनानी शास्त्र सम्मत होगी और अगले दिन 30 अप्रैल को तृतीया तिथि प्रदोष व्यापनी नहीं है अतः उसे दिन उदय तिथि होने के कारण अक्षय तृतीया मनाई जाएगी। इस साल अक्षय तृतीया 30 अप्रैल, दिन बुधवार को है।
तृतीया तिथि की शुरुआत 29 अप्रैल को शाम 05 बजकर 31 मिनट पर हो जाएगी, जिसका समापन 30 अप्रैल दोपहर 02 बजकर 12 मिनट पर होगा।