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डैम निर्माण हस्ताक्षर कार्यक्रम में दोनों मुख्यमंत्रियों को परोसा जाएगा सरसों की साग, मक्की की रोटी व चूरमा
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मुख्यमंत्री कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण करते प्रशासनिक अधिकारी।
- फोटो : Yamuna Nagar
बिलासपुर। आदिबद्री के विकास को लेकर 21 जनवरी को एमओयू पर साइन करने के लिए आदिबद्री पहुंचने पर हिमाचल प्रदेश व हरियाणा के मुख्यमंत्रियों व अन्य मंत्रियों का देसी खाने से स्वागत किया जाएगा। दोनों मुख्यमंत्रियों को खाने में मक्की की रोटी सरसों का साग, बाजरे की रोटी, खिचड़ी व चूरमा परोसा जाएगा।
प्रशासनिक अधिकारी कार्यक्रम की तैयारियां को अंतिम रूप देने के लिए दिन रात जुटे हैं। करीब चार घंटे चलने वाले कार्यक्रम में 341 करोड़ की परियोजनाओं को अमली जामा पहनाया जाएगा। जिसके लिए तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। हरियाणा व हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के आगमन पर काठगढ़ के को-ऑपरेटिव सोसायटी के पास दो हेलीपैड बनाए गए हैं। सबसे पहले सरस्वती उद्गम स्थल पर पूजा की जाएगी। इसके बाद आदिबद्री मंदिर व केदारनाथ मंदिर में पूजा की जाएगी।
वन विभाग के विश्राम गृह में कुछ देर आराम के बाद सरस्वती सरोवर के समीप बनाए गए पंडाल में दोनों प्रदेशों के मुख्यमंत्री एमओयू पर हस्ताक्षर करेंगे। इसके बाद पंडाल में सिंचाई विभाग के अधिकारियों के द्वारा डैम, बैराज, सड़क व अन्य परियोजनाओं के बारे विस्तृत रूप से समझाएंगे। डैम में पहाड़ों से आने वाला बारिश का पानी स्टोर करने की योजना है। यहां से पानी का बंटवारा कर सरस्वती नदी में छोड़ा जाएगा। प्रदेश सरकार सरस्वती हेरिटेज बोर्ड से सरस्वती की धारा को धरा पर लाने का प्रयास कर रही है।
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प्रशासनिक अधिकारी कार्यक्रम की तैयारियां को अंतिम रूप देने के लिए दिन रात जुटे हैं। करीब चार घंटे चलने वाले कार्यक्रम में 341 करोड़ की परियोजनाओं को अमली जामा पहनाया जाएगा। जिसके लिए तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। हरियाणा व हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के आगमन पर काठगढ़ के को-ऑपरेटिव सोसायटी के पास दो हेलीपैड बनाए गए हैं। सबसे पहले सरस्वती उद्गम स्थल पर पूजा की जाएगी। इसके बाद आदिबद्री मंदिर व केदारनाथ मंदिर में पूजा की जाएगी।
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वन विभाग के विश्राम गृह में कुछ देर आराम के बाद सरस्वती सरोवर के समीप बनाए गए पंडाल में दोनों प्रदेशों के मुख्यमंत्री एमओयू पर हस्ताक्षर करेंगे। इसके बाद पंडाल में सिंचाई विभाग के अधिकारियों के द्वारा डैम, बैराज, सड़क व अन्य परियोजनाओं के बारे विस्तृत रूप से समझाएंगे। डैम में पहाड़ों से आने वाला बारिश का पानी स्टोर करने की योजना है। यहां से पानी का बंटवारा कर सरस्वती नदी में छोड़ा जाएगा। प्रदेश सरकार सरस्वती हेरिटेज बोर्ड से सरस्वती की धारा को धरा पर लाने का प्रयास कर रही है।
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