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टेंडर खत्म होने के तीसरे दिन ही बिगड़े हालात, हर तरफ कूड़ा ही कूड़ा
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यमुनानगर। नगर निगम के एक से 11 वार्ड में डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने का टेंडर खत्म होते ही शहर में डोर टू डोर कूड़े के ढेर लग गए हैं। शायद ही कोई ऐसा डस्टबिन होगा जिसके चारों तरफ कूड़ा न बिखरा हो। इससे शहर की हालत दयनीय हो गई। माना जा रहा है कि निगम ने इस समस्या का समाधान तत्काल नहीं ढूंढ़ा तो भीषण गर्मी के इस वातावरण में संक्रामक बीमारी फैलने में देर नहीं लगेगी।
शहर के सभी 22 वार्डों से रोजाना 272 टन कूड़ा निकलता है। नए टेंडर कब तक लगेंगे इसका पता खुद अधिकारियों को भी नहीं है। इससे साफ है कि आने वाले दिनों में कॉलोनियों में कूड़े के ढेर इससे भी ज्यादा लगने वाले हैं। नगर निगम अधिकारियों ने दावा किया था कि नया टेंडर होने तक वह खुद के संसाधनों से कॉलोनियों से कूड़ा उठवाएंगे। कॉलोनियों के हालात देखते हुए तो नहीं लग रहा है कि कूड़ा उठ रहा है। नगर निगम के पास केवल 786 सफाई कर्मचारी हैं। इनमें से काफी कर्मचारी तो अधिकारियों व नेताओं की कोठियों पर काम कर रहे हैं। यदि सभी 786 कर्मचारी भी काम करें तो फिर भी प्रत्येक वार्ड में 35 कर्मचारी ही आएंगे। नियमानुसार इससे तीन गुणा कर्मचारी प्रत्येक वार्ड में चाहिए ताकि सफाई ठीक से हो सके। पहले 786 कर्मचारी केवल सफाई करते थे, लेकिन टेंडर खत्म होने के बाद अब उन्हें कूड़ा भी उठाना पड़ रहा है। काम बढ़ जाने से वार्डों से कूड़ा नहीं उठ रहा है। पार्षद विनोद मरवाह व देवेंद्र सिंह का कहना है कि सारे डस्टबिन कूड़े से भरे पड़े हैं। कोई कर्मचारी कूड़ा उठाने नहीं आ रहा।
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दो जोन बनाकर उठाया जा रहा था कूड़ा, दोनों का टेंडर खत्म
नगर निगम द्वारा पहले 22 वार्डों को दो जोन बनाकर घरों से कूड़ा उठाया जा रहा था। एक से 11 वार्ड तक जोन-एक व 12 से 22 वार्डों को जोन-दो में बांटा गया था। जोन-दो का टेंडर फरवरी में खत्म हो गया था। अब जोन-वन का टेंडर 12 अप्रैल को पूरा हो गया है। अधिकारी इस प्रयास में लगे थे कि जब तक नया टेंडर नहीं हो जाता तब तक इसी एजेंसी को का ही काम आगे बढ़ा दिया जाए, लेकिन टेंडर पूरा होने से पहले ही एजेंसी ने निगम को लिखित में दिया है कि वह टेंडर को आगे बढ़ाने की इच्छुक नहीं है।
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कूड़ा उठाने की आ रही हैं 60 से 80 शिकायतें
टेंडर खत्म होने के बाद से नगर निगम में कूड़ा उठाने की शिकायतें भी बढ़ गई हैं। चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर व दारोगा के पास रोजाना 60 से 80 शिकायतें कूड़ा न उठने की आ रही हैं। अधिकारी उन्हें एक ही जवाब देते हैं कि कूड़ा उठाने का टेंडर खत्म हो गया है। इसलिए थोड़े दिन एडजस्ट करना होगा। मार्च के आखिरी सप्ताह में अधिकारियों ने सभी 22 वार्डों से कूड़ा उठाने का सिंगल टेंडर लगाया था। इसका पार्षदों ने यह कहकर विरोध किया कि सिंगल टेंडर से सफाई ठीक से नहीं होगी। 12 अप्रैल को हाउस की बैठक कर ढाई करोड़ तक के छोटे-छोटे टेंडर लगाने का निर्णय लिया गया।
व्यवस्था कर रहे हैं: अशोक कुमार
नगर निगम के संयुक्त निगम आयुक्त अशोक कुमार का कहना है कि वार्डों से कूड़ा उठाने के लिए टेंडर लगाने की प्रक्रिया चल रही है। तब तक निगम के संसाधनों से ही कूड़ा उठवाया जा रहा है। प्रयास यही है कि सभी कॉलोनियों से कूड़ा उठे।
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शहर के सभी 22 वार्डों से रोजाना 272 टन कूड़ा निकलता है। नए टेंडर कब तक लगेंगे इसका पता खुद अधिकारियों को भी नहीं है। इससे साफ है कि आने वाले दिनों में कॉलोनियों में कूड़े के ढेर इससे भी ज्यादा लगने वाले हैं। नगर निगम अधिकारियों ने दावा किया था कि नया टेंडर होने तक वह खुद के संसाधनों से कॉलोनियों से कूड़ा उठवाएंगे। कॉलोनियों के हालात देखते हुए तो नहीं लग रहा है कि कूड़ा उठ रहा है। नगर निगम के पास केवल 786 सफाई कर्मचारी हैं। इनमें से काफी कर्मचारी तो अधिकारियों व नेताओं की कोठियों पर काम कर रहे हैं। यदि सभी 786 कर्मचारी भी काम करें तो फिर भी प्रत्येक वार्ड में 35 कर्मचारी ही आएंगे। नियमानुसार इससे तीन गुणा कर्मचारी प्रत्येक वार्ड में चाहिए ताकि सफाई ठीक से हो सके। पहले 786 कर्मचारी केवल सफाई करते थे, लेकिन टेंडर खत्म होने के बाद अब उन्हें कूड़ा भी उठाना पड़ रहा है। काम बढ़ जाने से वार्डों से कूड़ा नहीं उठ रहा है। पार्षद विनोद मरवाह व देवेंद्र सिंह का कहना है कि सारे डस्टबिन कूड़े से भरे पड़े हैं। कोई कर्मचारी कूड़ा उठाने नहीं आ रहा।
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दो जोन बनाकर उठाया जा रहा था कूड़ा, दोनों का टेंडर खत्म
नगर निगम द्वारा पहले 22 वार्डों को दो जोन बनाकर घरों से कूड़ा उठाया जा रहा था। एक से 11 वार्ड तक जोन-एक व 12 से 22 वार्डों को जोन-दो में बांटा गया था। जोन-दो का टेंडर फरवरी में खत्म हो गया था। अब जोन-वन का टेंडर 12 अप्रैल को पूरा हो गया है। अधिकारी इस प्रयास में लगे थे कि जब तक नया टेंडर नहीं हो जाता तब तक इसी एजेंसी को का ही काम आगे बढ़ा दिया जाए, लेकिन टेंडर पूरा होने से पहले ही एजेंसी ने निगम को लिखित में दिया है कि वह टेंडर को आगे बढ़ाने की इच्छुक नहीं है।
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कूड़ा उठाने की आ रही हैं 60 से 80 शिकायतें
टेंडर खत्म होने के बाद से नगर निगम में कूड़ा उठाने की शिकायतें भी बढ़ गई हैं। चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर व दारोगा के पास रोजाना 60 से 80 शिकायतें कूड़ा न उठने की आ रही हैं। अधिकारी उन्हें एक ही जवाब देते हैं कि कूड़ा उठाने का टेंडर खत्म हो गया है। इसलिए थोड़े दिन एडजस्ट करना होगा। मार्च के आखिरी सप्ताह में अधिकारियों ने सभी 22 वार्डों से कूड़ा उठाने का सिंगल टेंडर लगाया था। इसका पार्षदों ने यह कहकर विरोध किया कि सिंगल टेंडर से सफाई ठीक से नहीं होगी। 12 अप्रैल को हाउस की बैठक कर ढाई करोड़ तक के छोटे-छोटे टेंडर लगाने का निर्णय लिया गया।
व्यवस्था कर रहे हैं: अशोक कुमार
नगर निगम के संयुक्त निगम आयुक्त अशोक कुमार का कहना है कि वार्डों से कूड़ा उठाने के लिए टेंडर लगाने की प्रक्रिया चल रही है। तब तक निगम के संसाधनों से ही कूड़ा उठवाया जा रहा है। प्रयास यही है कि सभी कॉलोनियों से कूड़ा उठे।