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Yamuna Nagar News: सत्संग में बताया गुरु की कृपा का महत्व
Mon, 08 Jun 2026 12:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 08 Jun 2026 12:31 AM IST
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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम जगाधरी में सत्संग के दौरान उपस्थित श्रद्धालु। संस्थान
संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में साप्ताहिक सत्संग कराया गया। आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी सरस्वती भारती ने गुरु कृपा का महत्व समझाया।
उन्होंने कहा कि गुरु कृपा परमात्मा और प्रकृति के द्वारा दिया वह वरदान है जो हमें इस लोक व परलोक में अति दुर्लभ वस्तु को भी सुलभ बना सकता है। गुरु कृपा का दायरा असीमित है और यह मनुष्य को वह भी प्रदान कर सकती है जो उसके भाग्य में भी न हो।
साध्वी सरस्वती भारती ने कहा कि सांसारिक सुख, आध्यात्मिक उन्नति, शक्ति, भक्ति और मुक्ति के प्रदाता गुरु ही होते हैं। गुरु की कृपा से शिष्य वह उपलब्धियां प्राप्त कर सकता है जिन्हें केवल अपने पुरुषार्थ से कई जन्मों में भी पाना कठिन होता है। उन्होंने कहा कि गुरु की प्राप्ति मनुष्य की जिज्ञासा, प्रार्थना और पूर्व जन्मों के पुण्यों के अनुसार होती है।
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उन्होंने गुरु गीता का उल्लेख करते हुए बताया कि उसमें सात प्रकार के गुरुओं का वर्णन मिलता है, जिनमें परम गुरु को ब्रह्मनिष्ठ और भगवान का साकार स्वरूप माना गया है। ऐसे परम गुरु का सान्निध्य अनेक जन्मों के पुण्यों और आत्मा की गहन पुकार से प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि गुरु कृपा पाने के लिए मिथ्या अहंकार का त्याग कर गुरु की शरण में जाना आवश्यक है। ब्रह्मज्ञान, ध्यान साधना और गुरु की आज्ञा के अनुसार जीवन जीने से आत्मिक विकास संभव होता है।
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जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में साप्ताहिक सत्संग कराया गया। आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी सरस्वती भारती ने गुरु कृपा का महत्व समझाया।
उन्होंने कहा कि गुरु कृपा परमात्मा और प्रकृति के द्वारा दिया वह वरदान है जो हमें इस लोक व परलोक में अति दुर्लभ वस्तु को भी सुलभ बना सकता है। गुरु कृपा का दायरा असीमित है और यह मनुष्य को वह भी प्रदान कर सकती है जो उसके भाग्य में भी न हो।
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साध्वी सरस्वती भारती ने कहा कि सांसारिक सुख, आध्यात्मिक उन्नति, शक्ति, भक्ति और मुक्ति के प्रदाता गुरु ही होते हैं। गुरु की कृपा से शिष्य वह उपलब्धियां प्राप्त कर सकता है जिन्हें केवल अपने पुरुषार्थ से कई जन्मों में भी पाना कठिन होता है। उन्होंने कहा कि गुरु की प्राप्ति मनुष्य की जिज्ञासा, प्रार्थना और पूर्व जन्मों के पुण्यों के अनुसार होती है।
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उन्होंने गुरु गीता का उल्लेख करते हुए बताया कि उसमें सात प्रकार के गुरुओं का वर्णन मिलता है, जिनमें परम गुरु को ब्रह्मनिष्ठ और भगवान का साकार स्वरूप माना गया है। ऐसे परम गुरु का सान्निध्य अनेक जन्मों के पुण्यों और आत्मा की गहन पुकार से प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि गुरु कृपा पाने के लिए मिथ्या अहंकार का त्याग कर गुरु की शरण में जाना आवश्यक है। ब्रह्मज्ञान, ध्यान साधना और गुरु की आज्ञा के अनुसार जीवन जीने से आत्मिक विकास संभव होता है।