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Yamuna Nagar News: चरण स्पर्श करने का बताया महत्व
Mon, 01 Sep 2025 01:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 01 Sep 2025 01:08 AM IST
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व्यासपुर स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में सत्संग सुनती संगत। आयोजक
संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में साप्ताहिक सत्संग में साध्वी रजविंद्र ने चरण स्पर्श का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में चरणों का बहुत अधिक महत्व है। बालपन से ही बालक को माता पिता एवं उनके गुरु जनों के चरण स्पर्श करने को कहा जाता है।
उन्होंने कहा देखने को यह छोटी सी प्रक्रिया है, किंतु इसके पीछे ऐसा गूढ़ एवं गहन रहस्य है जो कदाचित मानवीय चेतना के उत्थान के मार्ग को सहज रूप से खोल सकता है।
वास्तविकता में प्रत्येक मानव शरीर का अपना एक चुंबकीय क्षेत्र होता है जो ब्रह्मांड में बहती हुई विद्युत ऊर्जा को हमारे मस्तिष्क से जोड़ता है। उन्होंने कहा कि पुरातन समय के हमारे ऋषि मुनि कितने बड़े वैज्ञानिक रहे होंगे, जिन्होंने इस सूत्र को खोज निकाला कि इस ब्रह्मांडीय विद्युत प्रवाह की दिशा सिर से पैरों की ओर बहती है।
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जब बालक अपने माता-पिता एवं गुरुजनों के चरण स्पर्श करता है या अपने मस्तक को उनके चरणों से स्पर्श करवाता है, तब उनके शरीर में प्रवाहित ब्रह्मांडीय विद्युत ऊर्जा बालक के मस्तिष्क एवं हाथों से होते हुए उसके अंत करण को स्पर्श करती है, जिससे उसके माता पिताका आशीर्वाद, भावनाएं एवं सकारात्मक तरंगें उसके जीवन को प्रभावित करती है।
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व्यासपुर। स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में साप्ताहिक सत्संग में साध्वी रजविंद्र ने चरण स्पर्श का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में चरणों का बहुत अधिक महत्व है। बालपन से ही बालक को माता पिता एवं उनके गुरु जनों के चरण स्पर्श करने को कहा जाता है।
उन्होंने कहा देखने को यह छोटी सी प्रक्रिया है, किंतु इसके पीछे ऐसा गूढ़ एवं गहन रहस्य है जो कदाचित मानवीय चेतना के उत्थान के मार्ग को सहज रूप से खोल सकता है।
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वास्तविकता में प्रत्येक मानव शरीर का अपना एक चुंबकीय क्षेत्र होता है जो ब्रह्मांड में बहती हुई विद्युत ऊर्जा को हमारे मस्तिष्क से जोड़ता है। उन्होंने कहा कि पुरातन समय के हमारे ऋषि मुनि कितने बड़े वैज्ञानिक रहे होंगे, जिन्होंने इस सूत्र को खोज निकाला कि इस ब्रह्मांडीय विद्युत प्रवाह की दिशा सिर से पैरों की ओर बहती है।
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जब बालक अपने माता-पिता एवं गुरुजनों के चरण स्पर्श करता है या अपने मस्तक को उनके चरणों से स्पर्श करवाता है, तब उनके शरीर में प्रवाहित ब्रह्मांडीय विद्युत ऊर्जा बालक के मस्तिष्क एवं हाथों से होते हुए उसके अंत करण को स्पर्श करती है, जिससे उसके माता पिताका आशीर्वाद, भावनाएं एवं सकारात्मक तरंगें उसके जीवन को प्रभावित करती है।