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Yamuna Nagar News: छात्राओं ने झारखंड के पारंपरिक नृत्य से मोहा मन
Fri, 14 Nov 2025 12:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 14 Nov 2025 12:16 AM IST
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सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाली छात्राएं व अन्य। प्रवक्ता
- फोटो : सिंचाई बंधु समिति की बैठक में मौजूद उपाध्यक्ष व अन्य।
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापनगर। पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय गुलाबगढ़ में जनजातीय गौरव पखवाड़ा दिवस के अंतर्गत सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। इसके तहत नृत्य एवं कविताओं के माध्यम से सभी को बिरसा मुंडा के जीवन एवं उनके योगदान के बारे में प्रकाश डाला गया। इस कार्यक्रम में कक्षा सातवीं, आठवीं व नौवीं की छात्राओं द्वारा नृत्य की प्रस्तुतियां दी गई। इस कार्यक्रम में विद्यालय के सभी विद्यार्थी और सभी शिक्षक उपस्थित रहे।
विद्यालय के प्राचार्य अशोक कुमार व उप प्राचार्या विमला राठौर ने बच्चों को बताया कि बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को झारखंड के जिला खूंटी के उलिहातू गांव में हुआ था। बिरसा को 25 साल में ही आदिवासियों के सामाजिक और आर्थिक शोषण का काफी ज्ञान हो गया था। धरती आबा के नाम से प्रसिद्ध बिरसा मुंडा भारत के आदिवासी समाज के महान क्रांतिकारी नायक थे।
वह सिर्फ 25 साल की उम्र में अंग्रेजों के खिलाफ एक बड़ा विद्रोह खड़ा करने वाले योद्धा बने थे। छात्रों को उनके बारे में जरूर जानना चाहिए। उन्होंने अपने जीवन को आदिवासियों के अधिकार, संस्कृति और पहचान को बचाने में समर्पित कर दिया। आज भी आदिवासी समाज उन्हें श्रद्धा से याद करता है और भगवान का दर्जा देता है। 1895 में बिरसा मुंडा ने बिरसाइत धर्म की स्थापना की, जो आदिवासी संस्कृति को पुनर्जीवित करने का एक आंदोलन बना।
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उन्होंने मुंडा विद्रोह सहित कई आंदोलनों का नेतृत्व किया और आदिवासी समाज को एकजुट किया। अंग्रेजों के अत्याचार के खिलाफ उन्होंने जन जागरूकता और सशक्तिकरण की भावना जगाई। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के शिक्षक वंदना, रजनी, विपिन कौशिक, सोनू का सहयोग रहा। रविशंकर श्रीवास्तव ने सभी का धन्यवाद किया।
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प्रतापनगर। पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय गुलाबगढ़ में जनजातीय गौरव पखवाड़ा दिवस के अंतर्गत सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। इसके तहत नृत्य एवं कविताओं के माध्यम से सभी को बिरसा मुंडा के जीवन एवं उनके योगदान के बारे में प्रकाश डाला गया। इस कार्यक्रम में कक्षा सातवीं, आठवीं व नौवीं की छात्राओं द्वारा नृत्य की प्रस्तुतियां दी गई। इस कार्यक्रम में विद्यालय के सभी विद्यार्थी और सभी शिक्षक उपस्थित रहे।
विद्यालय के प्राचार्य अशोक कुमार व उप प्राचार्या विमला राठौर ने बच्चों को बताया कि बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को झारखंड के जिला खूंटी के उलिहातू गांव में हुआ था। बिरसा को 25 साल में ही आदिवासियों के सामाजिक और आर्थिक शोषण का काफी ज्ञान हो गया था। धरती आबा के नाम से प्रसिद्ध बिरसा मुंडा भारत के आदिवासी समाज के महान क्रांतिकारी नायक थे।
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वह सिर्फ 25 साल की उम्र में अंग्रेजों के खिलाफ एक बड़ा विद्रोह खड़ा करने वाले योद्धा बने थे। छात्रों को उनके बारे में जरूर जानना चाहिए। उन्होंने अपने जीवन को आदिवासियों के अधिकार, संस्कृति और पहचान को बचाने में समर्पित कर दिया। आज भी आदिवासी समाज उन्हें श्रद्धा से याद करता है और भगवान का दर्जा देता है। 1895 में बिरसा मुंडा ने बिरसाइत धर्म की स्थापना की, जो आदिवासी संस्कृति को पुनर्जीवित करने का एक आंदोलन बना।
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उन्होंने मुंडा विद्रोह सहित कई आंदोलनों का नेतृत्व किया और आदिवासी समाज को एकजुट किया। अंग्रेजों के अत्याचार के खिलाफ उन्होंने जन जागरूकता और सशक्तिकरण की भावना जगाई। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के शिक्षक वंदना, रजनी, विपिन कौशिक, सोनू का सहयोग रहा। रविशंकर श्रीवास्तव ने सभी का धन्यवाद किया।

सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाली छात्राएं व अन्य। प्रवक्ता- फोटो : सिंचाई बंधु समिति की बैठक में मौजूद उपाध्यक्ष व अन्य।