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बदलते परिवेश ने फीका किया रंगों का त्योहार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 12 Mar 2022 12:55 AM IST
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The changing environment has faded the festival of colors
होली का त्योहार जो जीवन में खुशी के नए रंग घोलता है। वहीं बदलते परिवेश ने इस रंगों को फीका कर दिया है। रंग हर प्रकार के जरूर, मगर पहले जो खुशियों से भरी होली होती थी और उत्साह होता था, वहीं अब केवल हुड़दंगबाजी रह गई।
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इस त्योहार को लेकर गांव व शहरों में बसे लोगों में भारी उत्साह होता था। लेकिन जैसे जैसे समय बीतता गया तो होली का पर्व भी फीका पड़ता जा रहा है। लोगों में अब होली के पर्व को लेकर पहले जैसा उत्साह देखने को नहीं मिलता। अक्सर कहा जाता है कि विरोधी भी होली के दिन अपनी भेदभाव भूल एक दूसरे को गुलाल लगाकर अपने गिले शिकवे मिटा देते थे। लेकिन अब ऐसा देखने को नहीं मिलता।
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70 वर्षीय देवीदयाल पांडे बताते हैं उनके समय में वर्ष भर होली के त्योहार के आने का इंतजार करते थे। होली के दिन वह अपने साथियों के साथ मिलकर एक दूसरे के साथ जमकर गुलाल लगाया करते थे। अब वो बात देखने को नहीं मिलती। अब एक दूसरे को गुलाल लगाने पर अक्सर लोगों को बुरा मानते देखा जाता है। कई बार तो एक दूसरे को गुलाल लगाने पर झगड़े तक होते देखे गए। पहले ऐसा नहीं था।
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61 वर्षीय मोहनलाल अरोड़ा ने कहते हैं होली का त्योहार हिंदुओं के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है। पहले जमाने में होली के त्योहार से कुछ दिन पहले ही लोग एक दूसरे को रंग लगाना शुरू कर देते थे। लोगों में आपस में बहुत प्यार था। अब रंग लगाने पर मारपीट की नौबत तक आ जाती है। लोगों के अंदर स्वार्थ की भावना ने अपना स्थान ले लिया है।
44 वर्षीय मुकेश अरोड़ा मक्की के मुताबिक अब होली के त्योहार पर लोग खाने पीने में मस्त रहते हैं। होली के त्योहार पर लोग जमकर शराब पीते हैं और हुड़दंगबाजी करते हैं। जिससे अब इस त्योहार पर लोगों के बीच झगड़े होना आम बात हो गई है। अब लोग एक दूसरे को गुलाल लगाने की बजाय अपने घरों में रहना ज्यादा पसंद करते हैं।

आर्य समाज मंदिर के प्रधान रमेशचंद आर्य बताते हैं पहले होली का त्योहार अनेक खुशियां व उमंग लेकर आता था। लेकिन अब इसका अर्थ बदलता जा रहा है। महंगाई का असर भी त्योहारों पर पड़ता जा रहा है। उस दौरान लोगों में एक दूसरे के प्रति प्रेेम और विश्वास था, लेकिन अब द्वेष की भावना पैदा हो गई। सभी को मिलजुल होली के पर्व को प्यार और सद्भावना से मनाना चाहिए।
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