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Yamuna Nagar News: अंग्रेज करने आए थे कब्जा पर मंदिर की तरफ उठ न सके कदम

Thu, 03 Apr 2025 02:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Thu, 03 Apr 2025 02:49 AM IST
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The British had come to capture the temple but could not even move a step towards it
जागधरी। शहर के मध्य स्थित देवी भवन मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है। इस मंदिर की ख्याति देश सहित विदेशों में भी है। पूरा इस मंदिर में भक्तों की भीड़ रहती है।
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नवरात्र में यहां पर भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है। नवरात्र पर यहां देशभर से श्रद्धालु मन्नतें लेकर आते हैं। दो सदी से ज्यादा समय से लोगों का इस मंदिर के प्रति अटूट विश्वास व आस्था है। मान्यता है सवा दो सौ साल पुराने मां मनसा देवी मंदिर में भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है। यही नहीं सन् 1800 में जब देश में अंग्रेज अपने शासन का विस्तार कर रहे थे, तब सार्वजनिक व धार्मिक स्थलों को भी नियंत्रण में ले रहे थे। इस दौरान ब्रिटिश सरकार के अधिकारी व सेना जगाधरी के देवी भवन मंदिर भी पहुंचे थे।
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यहां मंदिर से पहले एक सराय थी, जिस पर अंग्रेज कब्जा करने के उद्देश्य से आए थे। अंग्रेजी सेना भवन तक तो पहुंच गई पर इसके बाद किसी के कदम उठ नहीं पाए। कई बार इसका प्रयास किया गया गया, लेकिन मां की शक्ति के सामने एक न चली। मंदिर के प्रति लोगों की आस्था व विश्वास देखते सभी ने घुटने टेक दिए और फिर मंदिर पर कब्जा करने का प्रयास नहीं किया।
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मंदिर सेवादारों व जगाधरी के बुजुर्गों की मानें तो शहर के बीच बने प्राचीन देवी भवन मंदिर का निर्माण सन 1797 में शुरू हुआ था, जो छह साल में पूरा हुआ।
सन् 1803 में मंदिर का निर्माण होने पर यहां जयपुर से मां मनसा देवी की प्रतिमा लाकर प्राण प्रतिष्ठा की गई। आज मंदिर की भव्यता व मान्यता दूर-दराज तक विख्यात है। प्राचीन मंदिर होने के कारण शहर के बाजार को देवी भवन बाजार के नाम से जाना जाता है।
बताया जाता है कि सन् 1797 से पहले बूड़िया रियासत के समय यहां एक सराय हुआ करती थी। यहां बने कमरों में यात्री व देर रात आने वाले लोग शरण लेते थे।
ऐसे में लोगों के लिए एक भवन में मंदिर निर्माण की योजना बनाई गई। अन्य से अलग एक भवन बनाया गया। जिसे देवी भवन कहा जाता था। इसके बाद यह देवी भवन मंदिर के नाम से विख्यात हुआ।
इस मंदिर में पुजारी के परिवार की सातवीं पीढ़ी सेवा कर रही है। वर्तमान में पंडित अतुल शास्त्री मंदिर में नियमित रूप से पूजन, धार्मिक व वैदिक अनुष्ठान कर रहे हैं।उन्होंने बताया कि शारदीय व चैत्र नवरात्र में देश के विभिन्न हिस्सों से मंदिर में श्रद्धालु आते हैं।

इस बार भी नवरात्र में मंदिर को फूलों व रंग बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। पहले नवरात्र से सुबह-शाम विशेष आरती हो रही है। आरती में दूर-दूर से श्रद्धालु देवी मां के दर्शनों व पूजन के लिए पहुंच रहे हैं। अष्टमी पर हर वर्ष की तरह मेला लगेगा, जिसमें मंदिर के बाहर पूरे बाजार को भी सजाया जाता है। पूजन सामग्री से लेकर बच्चों के खिलौनों की रेहड़ियां-फड़ियां लगती हैं।
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