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Yamuna Nagar News: तेजली गांव के प्रवेशद्वार का बोर्ड खराब, ग्रामीणों में रोष
Wed, 29 May 2024 04:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 29 May 2024 04:56 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। तेजली गांव के प्रवेशद्वार का बोर्ड खराब होने से ग्रामीणों में रोष है। प्रवेशद्वार पर बोर्ड तक लगा है लेकिन गांव का नाम अंकित नहीं है। ऐसे में केवल बोर्ड ही रह गया। चूंकि बोर्ड पर नाम अंकित होने से गांव की पहचान तो है साथ ही बाहरी लोगों को गांव के बारे भी पता चल जाता है।
कुछ समय पहले एक गद्दे की दुकान करने वाले ने अपना खुद की ऐड करने के लिए इस बोर्ड पर फ्लैक्स लगवा दिया था हालांकि उसमें गांव का नाम अंकित था, लेकिन तेजली गांव का नाम कम, गद्दे की ऐड ज्यादा हो रही थी। हालांकि वह फ्लेक्स बोर्ड से उतरवा दिया था, परंतु अब बोर्ड खाली नजर आ रहा है जिस पर तेजली गांव का नाम नहीं है। गांव के मनीष सांगवान, बिट्टू, नवीन, जितेंद्र, चरणजीत सिंह, रमेश, मनीराम नंबरदार, मुकेश, रमेश, राम कुमार, कमल, राज कमल, धर्मवीर, काला, प्रवीन आदि ग्रामीणों ने नगर निगम को बोर्ड पर तेजली गांव का नाम लिखने की मांग की है।
गांव के मनीष सांगवान ने बताया कि निगम से ठीक तो पंचायत ठीक थी क्योंकि गांव के सरपंच को कहकर गांव के विकास कार्याें को करवा लिया जाता था। नगर निगम के बार-बार चक्कर काटने के बाद भी काम नहीं होते हैं। बिट्टू सांगवान ने बताया कि गांव के प्रवेश द्वार क्षतिग्रस्त हालत में होने से गांव की सुंदरता को भी दाग लग रहा हैं और गांव में दाखिल होते ही क्षतिग्रस्त हालत में गांव में लगा बोर्ड दिखाई देता है। चरणजीत सिंह ने बताया कि गांव के अलावा यहां से सैंकड़ों गांवों के लोगों का आना-जाना होता हैं। किसी भी गांव के प्रवेश द्वार का ये हाल नहीं है। तेजली गांव नगर निगम में आने की वजह से सुविधा के नाम पर नहीं के बराबर है।
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सोहन लाल ने बताया कि सभी गांवों में लगभग हर प्रकार की सुविधा उपलब्ध है लेकिन गांव की छोटी गलियों में आज तक सीवरेज की समस्या आज तक बनी हुई है। मुकेश का कहना है कि निगम को चाहिए कि गांव में जाकर गांव के लोगों की समस्या के बारे में भी पूछना चाहिए कि गांव में किस प्रकार की समस्याएं हैं और उन समस्याओं का समाधान भी करवाना चाहिए।
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यमुनानगर। तेजली गांव के प्रवेशद्वार का बोर्ड खराब होने से ग्रामीणों में रोष है। प्रवेशद्वार पर बोर्ड तक लगा है लेकिन गांव का नाम अंकित नहीं है। ऐसे में केवल बोर्ड ही रह गया। चूंकि बोर्ड पर नाम अंकित होने से गांव की पहचान तो है साथ ही बाहरी लोगों को गांव के बारे भी पता चल जाता है।
कुछ समय पहले एक गद्दे की दुकान करने वाले ने अपना खुद की ऐड करने के लिए इस बोर्ड पर फ्लैक्स लगवा दिया था हालांकि उसमें गांव का नाम अंकित था, लेकिन तेजली गांव का नाम कम, गद्दे की ऐड ज्यादा हो रही थी। हालांकि वह फ्लेक्स बोर्ड से उतरवा दिया था, परंतु अब बोर्ड खाली नजर आ रहा है जिस पर तेजली गांव का नाम नहीं है। गांव के मनीष सांगवान, बिट्टू, नवीन, जितेंद्र, चरणजीत सिंह, रमेश, मनीराम नंबरदार, मुकेश, रमेश, राम कुमार, कमल, राज कमल, धर्मवीर, काला, प्रवीन आदि ग्रामीणों ने नगर निगम को बोर्ड पर तेजली गांव का नाम लिखने की मांग की है।
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गांव के मनीष सांगवान ने बताया कि निगम से ठीक तो पंचायत ठीक थी क्योंकि गांव के सरपंच को कहकर गांव के विकास कार्याें को करवा लिया जाता था। नगर निगम के बार-बार चक्कर काटने के बाद भी काम नहीं होते हैं। बिट्टू सांगवान ने बताया कि गांव के प्रवेश द्वार क्षतिग्रस्त हालत में होने से गांव की सुंदरता को भी दाग लग रहा हैं और गांव में दाखिल होते ही क्षतिग्रस्त हालत में गांव में लगा बोर्ड दिखाई देता है। चरणजीत सिंह ने बताया कि गांव के अलावा यहां से सैंकड़ों गांवों के लोगों का आना-जाना होता हैं। किसी भी गांव के प्रवेश द्वार का ये हाल नहीं है। तेजली गांव नगर निगम में आने की वजह से सुविधा के नाम पर नहीं के बराबर है।
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सोहन लाल ने बताया कि सभी गांवों में लगभग हर प्रकार की सुविधा उपलब्ध है लेकिन गांव की छोटी गलियों में आज तक सीवरेज की समस्या आज तक बनी हुई है। मुकेश का कहना है कि निगम को चाहिए कि गांव में जाकर गांव के लोगों की समस्या के बारे में भी पूछना चाहिए कि गांव में किस प्रकार की समस्याएं हैं और उन समस्याओं का समाधान भी करवाना चाहिए।