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Yamuna Nagar News: लंबी दूरी की रोडवेज बसों में नहीं बैठा रहे विद्यार्थी, चढ़ने पर देते हैं उतार

Mon, 10 Nov 2025 01:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Mon, 10 Nov 2025 01:29 AM IST
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Students are not allowed to board long-distance roadways buses and are made to alight when they board
बस में चढ़ने के​ लिए जद्दोजहद करते विद्यार्थी। आर्काइव
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। यमुनानगर डिपो से चलाई जा रही लंबी दूरी की बसों में विद्यार्थियों को नहीं बैठाया जा रहा है। वहीं जो विद्यार्थी चढ़ जाते हैं, उन्हें उतार दिया जाता है। बस स्टैंड यमुनानगर में परिचालक आवाज लगाकर कहते हैं कि रादौर से पहले कोई न बैठे। ऐसे में विद्यार्थियों को रोडवेज की बसों का कोई फायदा नहीं मिल रहा।
यमुनानगर बस स्टैंड से रोजाना जींद, रोहतक, हिसार, दिल्ली समेत कई लॉग रूट के लिए रोडवेज बस चलती है। रूट लंबा होने के कारण यह बसें दिन में केवल एक चक्कर ही लगा पाती हैं। इन बसों के परिचालक अपनी मर्जी से सवारी को बैठाते हैं। इस रूट पर जब तक कोई बड़ा कस्बा या जहां पर बस स्टैंड न हो वहां से पहले की कोई सवारी नहीं बिठाई जाती।
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कुरुक्षेत्र रूट पर 18-20 किलोमीटर दूर स्थित रादौर से पहले किसी भी सवारी को नहीं बिठाया जाता। इसी तरह जो बसें चंडीगढ़ के लिए चलती हैं वह छप्पर से पहले की सवारी को नहीं बिठाते। रादौर निवासी प्रियांशु व दामला के राहुल ने बताया कि वह रोजाना रोडवेज की बस से यमुनानगर के कॉलेज में पढ़ने आता है।
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सबसे ज्यादा दिक्कत दोपहर को कॉलेज की छुट्टी के बाद घर जाने में होती है। बस स्टैंड से जींद, रोतक, हिसार व दिल्ली जाने वाली जो बसें चलती हैं वह रादौर से पहले नहीं रूकती। इसलिए रादौर से पहले जितने भी गांव इस सड़क पर लगते हैं उनका कोई भी छात्र या छात्रा इन बसों में बैठ नहीं पाते।
काउंटर पर बस लगते ही परिचालक कहता है कि रादौर से पहले कोई भी बस में न चढ़े। पहले परिचालक टिकट लेने वालों को बस में चढ़ाते हैं। यदि कोई छात्र चढ़ जाता है तो उन्हें नीचे उतार देते हैं। यदि सवारी कम होने के बाद थोड़ी बहुत जगह बच जाती है तो छात्रों को फिर चढ़ाया जाता है। दोपहर 12 बजे के बाद बस बहुत कम मिलती है। जगूड़ी गांव निवासी योगेश ने बताया कि वह यमुनानगर शहर के इंस्टीट्यूट से कोचिंग ले रहा है। उनके गांव में पहले सरस्वतीनगर से होते हुए रोडवेज की बस यमुनानगर आती थी। यह बस सुबह करीब साढ़े सात बजे जगूड़ी गांव में पहुंचती थी।
शाम को साढ़े चार बजे बस लौटती थी। तीन माह पहले इस बस को बंद कर दिया गया। अब उनकी तरह तमाम विद्यार्थियों को अपने गांवों से लिफ्ट लेकर छह किलोमीटर दूर पहले दामला जाना पड़ता है। फिर दामला से रादौर से आ रही किसी बस में बैठ कर यमुनानगर जाना पड़ता है। ऐसा ही सफर वापसी में करना पड़ता है। मांग है कि लंबी दूरी की बसों में उन्हें बैठाया जाए।
प्रतापनगर बस स्टैंड पर हादसे में हो चुकी है छात्रा की मौत

प्रतापनगर बस स्टैंड पर गत दिनों हुए हादसे में छात्रा आरती की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद अभी तक रोडवेज अधिकारियों की तरफ से हादसों को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। शनिवार को छछरौली के मलिकपुर में दिल्ली जा रही बस नहीं रूकी,जिससे छात्राएं बस में नहीं बैठ सकी। इस पर ग्रामीणों ने बाइकों पर बस का पीछा किया और उसे भीलपुरा गांव के पास रोक लिया। इसके बाद अभिभावकों ने बस में छात्राओं को बैठाया। इससे पता चलता है कि एक छात्रा की मौत के बाद भी रोडवेज चालकों-परिचालकों का दिल नहीं पसीजा है।

लंबी दूरी की बसों में सवारी की संख्या बहुत ज्यादा है। बार-बार बस रोकने से समय काफी लग जाता है। स्थानी गांवों की सवारी के लिए दूसरी बसें लगा रखी हैं। लोकल रूटों पर बसों की संख्या बढ़ाने के लिए योजना बनाई जा रही है। - संदीप सैनी, अधीक्षक, बस स्टैंड यमुनानगर।
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