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Yamuna Nagar News: श्रीराम ने तोड़ा शिव का धनुष, माता सीता ने डाला जयमाला
Tue, 23 Sep 2025 01:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 23 Sep 2025 01:30 AM IST
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गांव नाचरौन में सीता स्वयंवर प्रसंग का मंचन करते कलाकार। आयोजक
संवाद न्यूज एजेंसी
रादौर। ग्रामीण रामा ड्रामेटिक क्लब की ओर से गांव नाचरौन में रामलीला का मंचन किया जा रहा है। रविवार की रात सीता स्वयंवर के प्रसंग का मंचन किया गया। श्रीराम की ओर से शिव का धनुष तोड़ने पर माता सीता ने उन्हें जयमाला डाल दी।
मंचन में दिखाया गया कि महर्षि विश्वामित्र राजा जनक के बुलावे पर श्रीराम व लक्ष्मण को साथ लेकर मिथिलापुरी जाते हैं। यहां पर राजा जनक ने स्वयंवर की पूरी व्यवस्था की हुई थी। स्वयंवर के लिए राजा जनक की शर्त थी कि जो भी वीर शिव के धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, वहीं राजकुमारी सीता से विवाह करेगा।
तभी सभा में उपस्थित राजा व महाराजा धनुष को उठाने की भरपूर कोशिश करते हैं, पर सभा में उपस्थित कोई भी राजा धनुष को हिला नहीं पाता। तभी रावण का आगमन होता है। जैसे ही रावण धनुष की तरफ बढ़ता है, तभी आकाशवाणी होती है। आकाशवाणी सुनकर रावण तुरंत वापस लौट जाता है और यह प्रण करता है कि सीता को एक दिन अवश्य लंका में ले जाएगा। यह सब देख राजा जनक के चेहरे पर निराशा छा जाती है।
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राजा जनक सभी क्षत्रिय राजाओं को उनकी वीरता के लिए धिक्कारते हैं। राजकुमार लक्ष्मण से यह सब नहीं सहा गया और वह राजा जनक को खरी खरी सुनाते हैं। तभी विश्वामित्र के कहने पर श्रीराम उठते हैं और धनुष की प्रत्यंचा चढ़ा देते हैं। धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने के कारण धनुष टूट जाता है। धनुष के टूटने की गर्जना सुनकर महर्षि परशुराम क्रोधित होकर सभा में पधारते हैं। जिससे सभी राजा डर जाते हैं। तभी महर्षि परशुराम व वीरवर लक्ष्मण के बीच काफी नोकझोंक होती है।
इसके बाद परशुराम से श्रीराम क्षमा याचना करते हैं। तभी महर्षि परशुराम श्रीराम को पहचान जाते हैं कि भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में अवतार धारण किया है। इसके बाद वह वापस चले जाते हैं। इस मौके पर क्लब के सदस्य राहुल पुंडीर, राज शर्मा, सेठपाल शर्मा, धर्मबीर राणा, चंद्रपाल कोच, यशपाल राणा, मुकेश जेलदार, प्रदीप राणा, रूपेंद्र, राजपाल, सोमपाल कश्यप मौजूद रहे।
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रादौर। ग्रामीण रामा ड्रामेटिक क्लब की ओर से गांव नाचरौन में रामलीला का मंचन किया जा रहा है। रविवार की रात सीता स्वयंवर के प्रसंग का मंचन किया गया। श्रीराम की ओर से शिव का धनुष तोड़ने पर माता सीता ने उन्हें जयमाला डाल दी।
मंचन में दिखाया गया कि महर्षि विश्वामित्र राजा जनक के बुलावे पर श्रीराम व लक्ष्मण को साथ लेकर मिथिलापुरी जाते हैं। यहां पर राजा जनक ने स्वयंवर की पूरी व्यवस्था की हुई थी। स्वयंवर के लिए राजा जनक की शर्त थी कि जो भी वीर शिव के धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, वहीं राजकुमारी सीता से विवाह करेगा।
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तभी सभा में उपस्थित राजा व महाराजा धनुष को उठाने की भरपूर कोशिश करते हैं, पर सभा में उपस्थित कोई भी राजा धनुष को हिला नहीं पाता। तभी रावण का आगमन होता है। जैसे ही रावण धनुष की तरफ बढ़ता है, तभी आकाशवाणी होती है। आकाशवाणी सुनकर रावण तुरंत वापस लौट जाता है और यह प्रण करता है कि सीता को एक दिन अवश्य लंका में ले जाएगा। यह सब देख राजा जनक के चेहरे पर निराशा छा जाती है।
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राजा जनक सभी क्षत्रिय राजाओं को उनकी वीरता के लिए धिक्कारते हैं। राजकुमार लक्ष्मण से यह सब नहीं सहा गया और वह राजा जनक को खरी खरी सुनाते हैं। तभी विश्वामित्र के कहने पर श्रीराम उठते हैं और धनुष की प्रत्यंचा चढ़ा देते हैं। धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने के कारण धनुष टूट जाता है। धनुष के टूटने की गर्जना सुनकर महर्षि परशुराम क्रोधित होकर सभा में पधारते हैं। जिससे सभी राजा डर जाते हैं। तभी महर्षि परशुराम व वीरवर लक्ष्मण के बीच काफी नोकझोंक होती है।
इसके बाद परशुराम से श्रीराम क्षमा याचना करते हैं। तभी महर्षि परशुराम श्रीराम को पहचान जाते हैं कि भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में अवतार धारण किया है। इसके बाद वह वापस चले जाते हैं। इस मौके पर क्लब के सदस्य राहुल पुंडीर, राज शर्मा, सेठपाल शर्मा, धर्मबीर राणा, चंद्रपाल कोच, यशपाल राणा, मुकेश जेलदार, प्रदीप राणा, रूपेंद्र, राजपाल, सोमपाल कश्यप मौजूद रहे।