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Yamuna Nagar News: श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर जहां भंडारे के लिए छह माह की प्रतीक्षा

Thu, 02 Apr 2026 03:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Thu, 02 Apr 2026 03:11 AM IST
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Shri Panchmukhi Hanuman Temple where there is a six-month wait for the Bhandara
श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर की रसोई भंडारा बनाने की तैयारी करते हलवाई। संवाद
यमुनानगर। श्रीराम भक्त हनुमान जी का जन्मोत्सव आज धूमधाम से मनाया जा रहा है। जिले में हनुमान जी का उपमंडल व्यासपुर के गांव बसातियांवाला में श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर एक ऐसा धार्मिक स्थल है जहां पर भंडारा देने के लिए श्रद्धालुओं को कम से कम छह माह का इंतजार करना पड़ता है। बावजूद इसके भंडार देने वालों की लाइन कम होने का नाम नहीं लेती। मंदिर में प्रत्येक शनिवार व मंगलवार को इतना विशाल भंडारा लगता है कि सुबह से शाम तक भी प्रसाद ग्रहण करने के लिए भक्तों की भीड़ लगी रहती है।
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श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर में भंडारा देने के लिए पहले लोगों का नंबर ढाई से तीन साल बाद आता था। मगर इतनी लंबी वेटिंग होने से हनुमान भक्तों को काफी लंबा इंतजार करना पड़ता था। इसलिए लोगों की इस समस्या को देखते हुए प्रबंधन समिति द्वारा किए गए बदलाव से अब यह वेटिंग सीधे ढाई साल से छह माह पर आ गई है। पहले मंगलवार को जहां एक समय में केवल एक व्यक्ति ही भंडारे का आयोजन करता था, वहीं अब एक साथ तीन से चार लोग मिलकर भंडारा देते हैं। सामूहिक रूप से भंडारा दिए जाने से लोगों को अब लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता। इसका फायदा यह हुआ कि भंडारे के लिए तो लोगों का नंबर जल्दी आने लगा। वहीं श्रद्धालुओं को भी भंडारे में विभिन्न प्रकार के पकवान चखने को मिलने लगे हैं। मंदिर में केवल जिले या प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर के विभिन्न राज्यों से लोग भंडारा देने के लिए आते हैं। दरअसल श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर की बहुत ज्यादा मान्यता है। जो लोग यहां पर मन्नत मांग कर जाते हैं वह पूरी होने पर लोग भंडारा देने के लिए आते हैं। एक भंडारे में करीब 20 क्विंटल चावल बनाए जाते हैं। अन्य पकवान अलग से हैं। संवाद
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यह है मंदिर का इतिहास:
मंदिर प्रबंधन समिति के मुताबिक महाभारत काल में पांडव यहां ठहरे थे और उन्हें हनुमान जी के दर्शन हुए थे। उस दौरान यह क्षेत्र वीरान जंगल था और करीब 400 वर्ष की तपस्या के दौरान बाबा जानकी दास महाराज को ढाक के पेड़ पर हनुमान जी के दर्शन हुए। दर्शन होने के बाद उन्होंने हाथ से वैसी ही हनुमान जी की प्रतिमा बनाई। तब से यह स्थान आस्था का केंद्र बना हुआ है। एक के बाद एक तपस्वी आए और मंदिर की भव्यता बढ़ती चली गई। आज करीब पांच एकड़ में मंदिर बना हुआ है। शुरुआती दौर में पंचमुखी हनुमान जी की मिट्टी की प्रतिमा हुआ करती थीं, लेकिन समय के साथ भव्यता बढ़ती चली गई। वर्ष 1990 में हनुमान जी की प्रतिमा खंडित हो गई थी, उसके बाद उस प्रतिमा के स्थान पर श्री पंचमुखी हनुमान की भव्य मूर्ति स्थापित कराई गई। मंदिर की अपनी गोशाला भी है। मंदिर परिसर में ही यात्री निवास भी बनाया जा रहा है।
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बुकिंग के बाद ही भंडारा दे सकते हैं: सुखबीर सिंह
समिति के प्रधान एडवोकेट सुखबीर सिंह का कहना है कि मंदिर में मंगलवार व शनिवार को लंगर देने के लिए एडवांस बुकिंग होती है। अभी छह महीने की वेटिंग हो गई है जो पहले ढाई से तीन साल होती थी। श्री पंचमुखी हनुमान कल्याण समिति की तरफ से दो अप्रैल को शाम बालाजी का महा जागरण करवाया जाएगा।

श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर की रसोई भंडारा बनाने की तैयारी करते हलवाई। संवाद

श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर की रसोई भंडारा बनाने की तैयारी करते हलवाई। संवाद

श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर की रसोई भंडारा बनाने की तैयारी करते हलवाई। संवाद

श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर की रसोई भंडारा बनाने की तैयारी करते हलवाई। संवाद

श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर की रसोई भंडारा बनाने की तैयारी करते हलवाई। संवाद

श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर की रसोई भंडारा बनाने की तैयारी करते हलवाई। संवाद

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