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Yamuna Nagar News: कपालमोचन मेले पर बारिश का साया
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यमुनानगर। मौसम विभाग के अनुसार आज से 27 नवंबर तक मौसम खराब रहेगा। इस दौरान आसमान में बादल छाए रहेंगे। वहीं हल्की बारिश की भी संभावना जताई है। यदि बारिश होती है तो कपालमोचन मेला की व्यवस्था बिगड़ सकती है। इसका असर मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं पर पड़ेगा, क्योंकि श्रद्धालु जिन टेंट से बने जिन तंबुओं में ठहरे हुए हैं वह खेतों में हैं। थोड़ी सी बारिश हुई नहीं की सारे खेतों में कीचड़ हो जाएगा।बादल छाने से अधिकतम व न्यूनतम तापमान में गिरावट आएगी जिससे ठंड में पहले से ज्यादा वृद्धि होगी।
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पांच दिन तक मेले में ठहरते हैं श्रद्धालु
कपालमोचन को लेकर मान्यता है कि मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को पांच स्नान करने जरूरी हैं। तभी उनकी मनोकामना पूर्ण होती है। आखिरी स्नान गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व पर कार्तिक पूर्णिमा की रात होती है। इसलिए ज्यादातर श्रद्धालु कपालमोचन मेला में पांच दिन तक ठहरते हैं। मेले में सात से आठ लाख श्रद्धालु हर साल आते हैं। इतने श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए कपालमोचन में कोई स्थायी व्यवस्था तो नहीं है। इसलिए उन्हें खेतों में लगाए गए अस्थायी तंबुओं में ही ठहरना पड़ता है।
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126 एकड़ में मेले का आयोजन
जिला प्रशासन की तरफ से 126 एकड़ में कपालमोचन मेले का आयोजन किया जा रहा है। सरोवरों की जगह को छोड़ दें तो बाकी बाकी जमीन का प्रशासन की तरफ से अस्थायी अधिग्रहण किया जाता है। मेला शुरू होने से पहले व संपन्न होने तक करीब 15 दिनों के लिए किसानों को इस जमीन पर कोई फसल बिजने की अनुमति नहीं होती। धान की कटाई के बाद किसानों के खेत खाली हो जाते हैं। छह हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से प्रशासन किसानों को राशि का भुगतान करता है।
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पांच दिन तक मेले में ठहरते हैं श्रद्धालु
कपालमोचन को लेकर मान्यता है कि मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को पांच स्नान करने जरूरी हैं। तभी उनकी मनोकामना पूर्ण होती है। आखिरी स्नान गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व पर कार्तिक पूर्णिमा की रात होती है। इसलिए ज्यादातर श्रद्धालु कपालमोचन मेला में पांच दिन तक ठहरते हैं। मेले में सात से आठ लाख श्रद्धालु हर साल आते हैं। इतने श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए कपालमोचन में कोई स्थायी व्यवस्था तो नहीं है। इसलिए उन्हें खेतों में लगाए गए अस्थायी तंबुओं में ही ठहरना पड़ता है।
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126 एकड़ में मेले का आयोजन
जिला प्रशासन की तरफ से 126 एकड़ में कपालमोचन मेले का आयोजन किया जा रहा है। सरोवरों की जगह को छोड़ दें तो बाकी बाकी जमीन का प्रशासन की तरफ से अस्थायी अधिग्रहण किया जाता है। मेला शुरू होने से पहले व संपन्न होने तक करीब 15 दिनों के लिए किसानों को इस जमीन पर कोई फसल बिजने की अनुमति नहीं होती। धान की कटाई के बाद किसानों के खेत खाली हो जाते हैं। छह हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से प्रशासन किसानों को राशि का भुगतान करता है।
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