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बिना कनेक्शन भेजा टेलीफोन बिल
यमुनानगर
Updated Sat, 15 Feb 2014 12:32 AM IST
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भारतीय संचार निगम आए दिन तुगलकी फरमान जारी कर अपनी कार्यशैली को लेकर
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सुर्खियों में बना रहता है। इस कारण जहां निगम की कार्यशैली को लेकर
सवालिया निशान लगता नजर आ रहा है, वहीं दूसरी ओर इसका खामियाजा सीधा आम
जनता को भुगतना पड़ता है।
इसका एक उदाहरण बिलासपुर के गांव कोटड़ा खास के देखने को मिला। यहां निगम के कर्मचारियों की ओर से एक उपभोक्ता के घर में बिना कनेक्शन के ही बिल भेज दिया। इस कारण उपभोक्ता और उसका पूूरा परिवार मानसिक परेशानी झेल रहा है। गांव कोटड़ा निवासी संदीप कुमार ने बताया कि उसने अपने घर में कनेक्शन के लिए नवंबर 2013 को अप्लाई किया था। संदीप ने बताया कि उसने कार्यालय जाकर फाइल जमा करवा दी थी और ् निगम के अधिकारियों ने उसे आश्वासन दिया था कि उसका कनेक्शन जल्द ही लग जाएगा।
लेकिन एक माह बीत जाने के पश्चात भी उसके घर में कनेक्शन नहीं लगा। उसके बाद वह यमुनानगर कार्यालय में गया, लेकिन वहां भी उसकी कोई सुनवाई नही हुई। कुछ दिनों के बाद निगम ने उसके घर 1432 रुपये का फोन का बिल भेज दिया गया। इस बिल के मुताबिक उसे फोन नंबर भी अलाट हो गया है। बिना कनेक्शन के बिल आने पर संदीप और उसका पूरा परिवार मानसिक परेशान है। हद तो तब हो गई जब संदीप ने इस बारे यमुनानगर के कार्यालय में जाकर बिल को दिखाया गया उसके पश्चात भी आज लगभग दस दिन गुजर जाने के पश्चात भी निगम ने इस मामले के प्रति गंभीरता नहीं दिखाई।
इसका एक उदाहरण बिलासपुर के गांव कोटड़ा खास के देखने को मिला। यहां निगम के कर्मचारियों की ओर से एक उपभोक्ता के घर में बिना कनेक्शन के ही बिल भेज दिया। इस कारण उपभोक्ता और उसका पूूरा परिवार मानसिक परेशानी झेल रहा है। गांव कोटड़ा निवासी संदीप कुमार ने बताया कि उसने अपने घर में कनेक्शन के लिए नवंबर 2013 को अप्लाई किया था। संदीप ने बताया कि उसने कार्यालय जाकर फाइल जमा करवा दी थी और ् निगम के अधिकारियों ने उसे आश्वासन दिया था कि उसका कनेक्शन जल्द ही लग जाएगा।
लेकिन एक माह बीत जाने के पश्चात भी उसके घर में कनेक्शन नहीं लगा। उसके बाद वह यमुनानगर कार्यालय में गया, लेकिन वहां भी उसकी कोई सुनवाई नही हुई। कुछ दिनों के बाद निगम ने उसके घर 1432 रुपये का फोन का बिल भेज दिया गया। इस बिल के मुताबिक उसे फोन नंबर भी अलाट हो गया है। बिना कनेक्शन के बिल आने पर संदीप और उसका पूरा परिवार मानसिक परेशान है। हद तो तब हो गई जब संदीप ने इस बारे यमुनानगर के कार्यालय में जाकर बिल को दिखाया गया उसके पश्चात भी आज लगभग दस दिन गुजर जाने के पश्चात भी निगम ने इस मामले के प्रति गंभीरता नहीं दिखाई।