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संतों से मिलती सही मार्ग की प्रेरणा : फकीर दास
Mon, 11 Aug 2025 12:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 11 Aug 2025 12:21 AM IST
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कपालमोचन स्थित मंदिर में प्रवचन करते संत फकीर दास महाराज। स्वयं
संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। संतों के दर्शन से जीवन के सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है और हमारे मन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। उनकी शिक्षाएं और उपदेश हमें अपने जीवन को सुधारने, आत्म-साक्षात्कार की दिशा में आगे बढ़ने में मदद करते हैं। यह बात कपालमोचन स्थित गुरु रविदास मंदिर में आयोजित मासिक सत्संग में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए संत फकीर दास महाराज ने कही।
उन्होंने कहा कि संतों के दर्शन मात्र से अंत:करण शुद्ध होने की बात कई धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं में कही जाती है। इसका अर्थ यह है कि संतों की उपस्थिति, उनके विचारों और उनके आचरण का प्रभाव मन और आत्मा पर गहरा प्रभाव डालता है। इस प्रकार, संतों के दर्शन मात्र से हमारे अंत:करण की शुद्धि होती है और हम एक बेहतर जीवन जीने की दिशा में अग्रसर होते हैं।
संतों की कृपा और उनके अनुभव से हमें परमात्मा की व्यापकता को समझने में मदद मिलती है। संतों की वाणी और उनके अनुभव हमें यह समझने में सहायक होते हैं कि परमात्मा हर जगह और हर समय में उपस्थित हैं।
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संतों की शिक्षाएं हमें यह समझने में मदद करती हैं कि परमात्मा की उपस्थिति को महसूस करना होगा।जालंधर से आए संत लखविंद्र सिंह व सोनीपत से आए संत विनोद दास महाराज ने उपस्थित संगत को प्रवचनों से निहाल किया।
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व्यासपुर। संतों के दर्शन से जीवन के सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है और हमारे मन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। उनकी शिक्षाएं और उपदेश हमें अपने जीवन को सुधारने, आत्म-साक्षात्कार की दिशा में आगे बढ़ने में मदद करते हैं। यह बात कपालमोचन स्थित गुरु रविदास मंदिर में आयोजित मासिक सत्संग में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए संत फकीर दास महाराज ने कही।
उन्होंने कहा कि संतों के दर्शन मात्र से अंत:करण शुद्ध होने की बात कई धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं में कही जाती है। इसका अर्थ यह है कि संतों की उपस्थिति, उनके विचारों और उनके आचरण का प्रभाव मन और आत्मा पर गहरा प्रभाव डालता है। इस प्रकार, संतों के दर्शन मात्र से हमारे अंत:करण की शुद्धि होती है और हम एक बेहतर जीवन जीने की दिशा में अग्रसर होते हैं।
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संतों की कृपा और उनके अनुभव से हमें परमात्मा की व्यापकता को समझने में मदद मिलती है। संतों की वाणी और उनके अनुभव हमें यह समझने में सहायक होते हैं कि परमात्मा हर जगह और हर समय में उपस्थित हैं।
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संतों की शिक्षाएं हमें यह समझने में मदद करती हैं कि परमात्मा की उपस्थिति को महसूस करना होगा।जालंधर से आए संत लखविंद्र सिंह व सोनीपत से आए संत विनोद दास महाराज ने उपस्थित संगत को प्रवचनों से निहाल किया।