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स्वास्थ्य सेवाओं के लिए नौ करोड़ जारी
यमुनानगर।
Updated Sun, 29 Sep 2013 12:29 AM IST
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यमुनानगर जिले में नेशनल रुरल हेल्थ मिशन इस वर्ष के लिए नौ करोड़ रुपये जारी किए थे, जिसमें से 2.51 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को गति दे रहा है।
सेवाओं के अनुरूप सरकार की ओर से बजट भी जारी किया जा रहा है। जिससे ग्रामीण लोगों को घर में ही स्वास्थ्य संबंधी सेवाआें की जानकारी और लाभ मिल रहा है। इस मिशन को लेकर जिला में 200 के करीब कर्मचारी काम कर रहे हैं। जिसमें 118 एएनएम, 14 यशोदा, चार डॉक्टर, दो सुपरवाइजर, 70 के करीब अन्य कर्मचारी हैं।
मिशन में गर्भवती महिला, नवजात बच्चे और स्कूली बच्चे के स्वास्थ्य को लेकर काम किया जा रहा है। केंद्र की ओर से 2005 में नेशनल रुरल हेल्थ मिशन शुरू किया गया था।
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गत वर्ष 10 करोड़ बजट आया था
मिशन के तहत गत वर्ष 10 करोड़ रुपये स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आया था। जिसमें से स्वास्थ्य विभाग नौ करोड़ ही खर्च कर पाया था। मिशन को सफल बनाने में आशा वर्करों का मुख्य योगदान है। वे लोगों को समय-समय पर स्वास्थ्य संबंधी टिप्स देती हैं।
इसी मिशन के साथ जेएसवाई स्कीम भी है। जिसमें गर्भवती महिलाओं को डिलीवरी पर (बीपीएल) 2200 रुपये दिए जाते हैं। फ्री खाना और आने-जाने की सुविधा भी की जाती है। इसमें महिलाओं को देसी घी भी दिया जाता है। इसके साथ ही स्कूली बच्चों का भी स्कूल में ही चेकअप किया जाता है।
सरकार की स्वास्थ्य संबंधी ज्यादातर सेवाओं का संबंध इस मिशन से है। जो एंबुलेंस चल रही है वे इसी मिशन के तहत चल रही हैं। जिला में कुल 16 एंबुलेंस इस मिशन के तहत लाई गईं थीं, जिनमें से तीन खराब हो चुकी हैं।
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सेवाओं के अनुरूप सरकार की ओर से बजट भी जारी किया जा रहा है। जिससे ग्रामीण लोगों को घर में ही स्वास्थ्य संबंधी सेवाआें की जानकारी और लाभ मिल रहा है। इस मिशन को लेकर जिला में 200 के करीब कर्मचारी काम कर रहे हैं। जिसमें 118 एएनएम, 14 यशोदा, चार डॉक्टर, दो सुपरवाइजर, 70 के करीब अन्य कर्मचारी हैं।
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मिशन में गर्भवती महिला, नवजात बच्चे और स्कूली बच्चे के स्वास्थ्य को लेकर काम किया जा रहा है। केंद्र की ओर से 2005 में नेशनल रुरल हेल्थ मिशन शुरू किया गया था।
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गत वर्ष 10 करोड़ बजट आया था
मिशन के तहत गत वर्ष 10 करोड़ रुपये स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आया था। जिसमें से स्वास्थ्य विभाग नौ करोड़ ही खर्च कर पाया था। मिशन को सफल बनाने में आशा वर्करों का मुख्य योगदान है। वे लोगों को समय-समय पर स्वास्थ्य संबंधी टिप्स देती हैं।
इसी मिशन के साथ जेएसवाई स्कीम भी है। जिसमें गर्भवती महिलाओं को डिलीवरी पर (बीपीएल) 2200 रुपये दिए जाते हैं। फ्री खाना और आने-जाने की सुविधा भी की जाती है। इसमें महिलाओं को देसी घी भी दिया जाता है। इसके साथ ही स्कूली बच्चों का भी स्कूल में ही चेकअप किया जाता है।
सरकार की स्वास्थ्य संबंधी ज्यादातर सेवाओं का संबंध इस मिशन से है। जो एंबुलेंस चल रही है वे इसी मिशन के तहत चल रही हैं। जिला में कुल 16 एंबुलेंस इस मिशन के तहत लाई गईं थीं, जिनमें से तीन खराब हो चुकी हैं।