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सार्वजनिक शौचालयों से सुलभता गायब
अमर उजाला ब्यूरो/यमुनानगर
Updated Fri, 18 Jul 2014 01:17 AM IST
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यमुनानगर। प्रशासन द्वारा ग्रामीण स्तर पर घर-घर शौचालय मुहैया कराने पर जोर दिया जा रहा है। जबकि शहर में सार्वजनिक स्थानों पर बने शौचालयों के प्रति उदासीनता के कारण अधिकतर शौचालयाें में गंदगी के अंबार लगे हैं। जिसके कारण ये लोगों को सुलभ नहीं हो पा रहे हैं। साथ ही इनसे आती दुर्गंध ने आसपास के लोगों का जीना दुश्वार कर दिया है।
मीराबाई बाजार, प्यारा चौक, यूको बैंक के सामने मार्केट और जगाधरी के नगर निगम कार्यालय के साथ में बने सुलभ शौचालयों का जायजा लेने पर पाया कि सभी जगह गंदगी के अंबार लगे हैं और इनसे आती दुर्गंध के कारण आसपास में खड़ा रहना भी मुश्किल है।
जिससे शौचालयों के साथ लगती दुकानों के संचालकों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दुकानदार अविनाश शर्मा, गुरजंत सिंह, अरुण यादव ने बताया कि विभाग द्वारा समय रहते शौचालयों की सफाई नहीं की जाती है। साथ ही शौचालयों के दरवाजे न होने के कारण आते-जाते लोग इनमें कूड़ेदान की तरह गंदगी गिराकर चले जाते हैं। दुकानदाराें का कहना है कि अधिकतर दुकानाें में शौचालय नहीं हैं, ऐसे में उन्हें लघुशंका के लिए भी दूर भटकना पड़ रहा है।
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लाखों के प्रोजेक्ट पर वर्षों से लटका है ताला
तेजली खेल स्टेडियम के पीछे चिट्टा मंदिर रोड की तरफ लाखों रुपये की लागत से सुलभ शौचालय बनाया गया था। विभाग की मंशा थी इस प्रोजेक्ट से तेजली खेल स्टेडियम में पहुंचने वाले खिलाड़ियों सहित क्षेत्रवासियों को सुविधा दी जाए, लेकिन वर्षों से इसके गेट पर ताला लटका हुआ है। ऐसी स्थिति में सुलभ शौचालय की सुविधा होने के बावजूद क्षेत्र के लोगों को इस कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। तेजली रोड निवासी संदीप, ब्रिजेश ने बताया कि इस प्रोजेक्ट को 2004 में लाखों रुपये खर्च कर तैयार किया गया था। लेकिन विभाग द्वारा इसके निर्माण के पूरा होने के बाद भी इसे लोगाें की सुविधा के लिए मुहैया नहीं कराया गया। जबकि वर्षों से इसके गेट पर ताला लटका हुआ है।
इको-फ्रेंडली टॉयलेट भी नहीं आए काम
नगर निगम की ओर से पायलट प्रोजेक्ट के तहत सितंबर 2012 में दिल्ली से करीब आठ लाख 50 हजार रुपये की लागत से 10 इको फ्रेंडली टॉयलेट मंगाए गए थे। निगम की सोच थी कि लोगों को सुलभ शौचालय की सुविधा देने के साथ ही इन इको फ्रेंडली टॉयलेट की मदद से पर्यावरण का भी ख्याल रखा जा सकेगा। क्योंकि इन टॉयलेट को कुछ इस प्रकार से बनवाया गया था कि इनसे मल-मूत्र की निकासी सीधे सीवरेज में होनी थी। किंतु यह योजना केवल ट्रायल तक ही सिमटकर रह गई। निगम नेट्रायल के लिए यमुनानगर बस स्टैंड पर एक टॉयलेट लगाया था, लेकिन इसे सीवरेज से कनेक्ट नहीं किया जा सका। जिसके कारण इसके इस्तेमाल करने पर आसपास गंदगी फैलती जा रही है और यह टॉयलेट इको फ्रेंडली के बजाए पर्यावरण को दूषित करता दिखाई दे रहा है। उधर, ऐसे ही करीब नौ टॉयलेट निगम के स्टोर में धूल फांक रहे हैं। सभी नौ टॉयलेट खुले में पड़े हैं और बारिश और धूप के कारण जंग खाने लगे हैं। जिन्हें लोगों को इस्तेमाल के लिए मुहैया कराने के लिए निगम की ओर से कोई सुध नहीं ली जा रही है।
विभाग को देंगे दिशा-निर्देश
इस संबंध में जब डीसी मंदीप सिंह बराड़ से फोन पर बात करने की कोशिश की गई तो उनसे संपर्क नहीं हो पाया। एडीसी डॉ. सतबीर सिंह सैनी ने फोन पर बताया कि नगर निगम उनके कार्यक्षेत्र में नहीं है, लेकिन यदि कहीं दिक्कत है तो इस बारे में संबंधित विभाग को दिशा-निर्देश दिए जाएंगे।
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मीराबाई बाजार, प्यारा चौक, यूको बैंक के सामने मार्केट और जगाधरी के नगर निगम कार्यालय के साथ में बने सुलभ शौचालयों का जायजा लेने पर पाया कि सभी जगह गंदगी के अंबार लगे हैं और इनसे आती दुर्गंध के कारण आसपास में खड़ा रहना भी मुश्किल है।
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जिससे शौचालयों के साथ लगती दुकानों के संचालकों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दुकानदार अविनाश शर्मा, गुरजंत सिंह, अरुण यादव ने बताया कि विभाग द्वारा समय रहते शौचालयों की सफाई नहीं की जाती है। साथ ही शौचालयों के दरवाजे न होने के कारण आते-जाते लोग इनमें कूड़ेदान की तरह गंदगी गिराकर चले जाते हैं। दुकानदाराें का कहना है कि अधिकतर दुकानाें में शौचालय नहीं हैं, ऐसे में उन्हें लघुशंका के लिए भी दूर भटकना पड़ रहा है।
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लाखों के प्रोजेक्ट पर वर्षों से लटका है ताला
तेजली खेल स्टेडियम के पीछे चिट्टा मंदिर रोड की तरफ लाखों रुपये की लागत से सुलभ शौचालय बनाया गया था। विभाग की मंशा थी इस प्रोजेक्ट से तेजली खेल स्टेडियम में पहुंचने वाले खिलाड़ियों सहित क्षेत्रवासियों को सुविधा दी जाए, लेकिन वर्षों से इसके गेट पर ताला लटका हुआ है। ऐसी स्थिति में सुलभ शौचालय की सुविधा होने के बावजूद क्षेत्र के लोगों को इस कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। तेजली रोड निवासी संदीप, ब्रिजेश ने बताया कि इस प्रोजेक्ट को 2004 में लाखों रुपये खर्च कर तैयार किया गया था। लेकिन विभाग द्वारा इसके निर्माण के पूरा होने के बाद भी इसे लोगाें की सुविधा के लिए मुहैया नहीं कराया गया। जबकि वर्षों से इसके गेट पर ताला लटका हुआ है।
इको-फ्रेंडली टॉयलेट भी नहीं आए काम
नगर निगम की ओर से पायलट प्रोजेक्ट के तहत सितंबर 2012 में दिल्ली से करीब आठ लाख 50 हजार रुपये की लागत से 10 इको फ्रेंडली टॉयलेट मंगाए गए थे। निगम की सोच थी कि लोगों को सुलभ शौचालय की सुविधा देने के साथ ही इन इको फ्रेंडली टॉयलेट की मदद से पर्यावरण का भी ख्याल रखा जा सकेगा। क्योंकि इन टॉयलेट को कुछ इस प्रकार से बनवाया गया था कि इनसे मल-मूत्र की निकासी सीधे सीवरेज में होनी थी। किंतु यह योजना केवल ट्रायल तक ही सिमटकर रह गई। निगम नेट्रायल के लिए यमुनानगर बस स्टैंड पर एक टॉयलेट लगाया था, लेकिन इसे सीवरेज से कनेक्ट नहीं किया जा सका। जिसके कारण इसके इस्तेमाल करने पर आसपास गंदगी फैलती जा रही है और यह टॉयलेट इको फ्रेंडली के बजाए पर्यावरण को दूषित करता दिखाई दे रहा है। उधर, ऐसे ही करीब नौ टॉयलेट निगम के स्टोर में धूल फांक रहे हैं। सभी नौ टॉयलेट खुले में पड़े हैं और बारिश और धूप के कारण जंग खाने लगे हैं। जिन्हें लोगों को इस्तेमाल के लिए मुहैया कराने के लिए निगम की ओर से कोई सुध नहीं ली जा रही है।
विभाग को देंगे दिशा-निर्देश
इस संबंध में जब डीसी मंदीप सिंह बराड़ से फोन पर बात करने की कोशिश की गई तो उनसे संपर्क नहीं हो पाया। एडीसी डॉ. सतबीर सिंह सैनी ने फोन पर बताया कि नगर निगम उनके कार्यक्षेत्र में नहीं है, लेकिन यदि कहीं दिक्कत है तो इस बारे में संबंधित विभाग को दिशा-निर्देश दिए जाएंगे।