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उपद्रव मचाने वालों के खिलाफ निकाला रोष मार्च
यमुनानगर/ब्यूराो
Updated Fri, 26 Feb 2016 12:30 AM IST
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अखिल भारतीय विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के सदस्यों ने गुरुवार को प्रदेश में असमाजिक तत्वों द्वारा गैर जाट समुदाय की समत्ति को नष्ट करने व आगजनी की घटनाओं को अंजाम देने के विरोध में रोष मार्च निकाला। इसके बाद लघु सचिवालय में आकर महासभा के पदाधिकारियों ने राज्यपाल व मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में सरकारी व निजी संपत्ति को नष्ट करने वालों का मुआवजा न देने और उपद्रव मचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग की गई।
अखिल भारतीय विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के सदस्य गुरुवार सुबह प्रदेशाध्यक्ष राम कुमार धीमान के नेतृत्व में जगाधरी अनाजमंडी पर एकत्रित हुए। यहां से रोष मार्च निकालते हुए सभी सदस्य नेशनल हाईवे 73 से होते हुए लघु सचिवालय पहुंचे और तहसीलदार को मुख्यमंत्री व राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा।
प्रदेशाध्यक्ष राम कुमार धीमान ने कहा कि हरियाणा प्रदेश में आरक्षण आंदोलन की आड़ में असामाजिक तत्वों ने जो गैर समुदाय की समत्ति व आगजनी कर करीब 50 हजार करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाया है, उसने समाज के ताने बाने को तार-तार कर दिया है, जिसकी भरपाई करना आसान नहीं है। अखिल भारतीय विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा इसका पुरजोर विरोध करती है और मांग करती है कि समाज में जहर घोलने वाले इन नेताओं की पहचान करके इनको कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। किसी भी उपद्रवी को मरने के बाद मुआवजा एवं नौकरी न दी जाए।
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पीड़ितों को उनकी नष्ट हुई संपत्ति का उचित मुआवजा दिया जाए। उपद्रव में मारे गए बेकसूर लोगों के परिजनों को ही मुआवजा और सरकारी नौकरी दी जाए। रोष मार्च में राजपाल, जय प्रकाश, ओमपाल, सीता राम, संदीप, धर्मपाल, चमनलाल, सुशील, लाखन, रामकुमार, विरेंद्र, रामकरण, अंतुराम, नाथीराम, सुनील, राजेश, कृष्ण, अशोक, नरेश आदि शामिल हुए।
घोषणा करने वाले मंत्री अपने निजी कोष से दे मुआवजा
महासभा के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार में मौजूद जिन मंत्रियों ने उपद्रवियों को दस लाख रुपये मुआवजा व नौकरी देने की घोषणा की है, वे अपने निजी कोष से उन्हें मुआवजा दें। लेकिन सरकारी खजाने से नहीं, क्योकि यह पैसा आम जनता का है। उपद्रवियों ने कोई देश के लिए कुर्बानी नहीं दी, बल्कि प्रदेश में भाईचारा एवं सद्भावना को समाप्त करने का काम किया है। ऐसे लोगों को सरकारी नौकरी व मुआवजा न दें, जिन्होंने प्रदेश 50 वर्ष पीछे धकेल दिया।
मूकदर्शक बने रहे अधिकारियों पर भी हो कार्रवाई
महासभा के पदाधिकारियों ने कहा कि उन प्रशासनिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ ठोस कार्यवाही की जाए, जो उपद्रव के समय मौके पर मूकदर्शक बने रहे। आगजनी की घटनाओं को अंजाम देने वाले आरोपियों को रोकने की कोशिश तक न की। उन्होंने ऐसे अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की मांग की।
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अखिल भारतीय विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के सदस्य गुरुवार सुबह प्रदेशाध्यक्ष राम कुमार धीमान के नेतृत्व में जगाधरी अनाजमंडी पर एकत्रित हुए। यहां से रोष मार्च निकालते हुए सभी सदस्य नेशनल हाईवे 73 से होते हुए लघु सचिवालय पहुंचे और तहसीलदार को मुख्यमंत्री व राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा।
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प्रदेशाध्यक्ष राम कुमार धीमान ने कहा कि हरियाणा प्रदेश में आरक्षण आंदोलन की आड़ में असामाजिक तत्वों ने जो गैर समुदाय की समत्ति व आगजनी कर करीब 50 हजार करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाया है, उसने समाज के ताने बाने को तार-तार कर दिया है, जिसकी भरपाई करना आसान नहीं है। अखिल भारतीय विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा इसका पुरजोर विरोध करती है और मांग करती है कि समाज में जहर घोलने वाले इन नेताओं की पहचान करके इनको कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। किसी भी उपद्रवी को मरने के बाद मुआवजा एवं नौकरी न दी जाए।
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पीड़ितों को उनकी नष्ट हुई संपत्ति का उचित मुआवजा दिया जाए। उपद्रव में मारे गए बेकसूर लोगों के परिजनों को ही मुआवजा और सरकारी नौकरी दी जाए। रोष मार्च में राजपाल, जय प्रकाश, ओमपाल, सीता राम, संदीप, धर्मपाल, चमनलाल, सुशील, लाखन, रामकुमार, विरेंद्र, रामकरण, अंतुराम, नाथीराम, सुनील, राजेश, कृष्ण, अशोक, नरेश आदि शामिल हुए।
घोषणा करने वाले मंत्री अपने निजी कोष से दे मुआवजा
महासभा के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार में मौजूद जिन मंत्रियों ने उपद्रवियों को दस लाख रुपये मुआवजा व नौकरी देने की घोषणा की है, वे अपने निजी कोष से उन्हें मुआवजा दें। लेकिन सरकारी खजाने से नहीं, क्योकि यह पैसा आम जनता का है। उपद्रवियों ने कोई देश के लिए कुर्बानी नहीं दी, बल्कि प्रदेश में भाईचारा एवं सद्भावना को समाप्त करने का काम किया है। ऐसे लोगों को सरकारी नौकरी व मुआवजा न दें, जिन्होंने प्रदेश 50 वर्ष पीछे धकेल दिया।
मूकदर्शक बने रहे अधिकारियों पर भी हो कार्रवाई
महासभा के पदाधिकारियों ने कहा कि उन प्रशासनिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ ठोस कार्यवाही की जाए, जो उपद्रव के समय मौके पर मूकदर्शक बने रहे। आगजनी की घटनाओं को अंजाम देने वाले आरोपियों को रोकने की कोशिश तक न की। उन्होंने ऐसे अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की मांग की।