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प्रॉपर्टी फर्जीवाड़ा : रिमांड में आरोपी से करता रहा गुमराह

Sun, 29 Sep 2024 02:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Sun, 29 Sep 2024 02:29 AM IST
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Property fraud: The accused kept misleading the accused during remand
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। फर्जी दस्तावेजों पर एनआरआई राकेश कपूर की करोड़ों रुपये की संपत्ति बेचने के मामले में आरोपी एसडीएम कार्यालय के कर्मी सेक्टर 18 निवासी राममेहर का शनिवार को रिमांड खत्म हो गया। रिमांड के दौरान पुलिस आरोपी से फर्जीवाड़ा की रकम की बरामदगी नहीं कर पाई। आरोपी राममेहर पुलिस को गुमराह करता रहा।
पूछताछ में आरोपी ने कभी पंजाब में किसी दोस्त तो कभी जयपुर में किसी जानकार के पास रकम होने की बात कही। रुपयों की रिकवरी के लिए पुलिस आरोपी को पंजाब व जयपुर भी ले गई। लेकिन वहां पर आरोपी का कोई जानकार या दोस्त नहीं मिला। रिमांड पूरा होने पर शनिवार को पुलिस ने अदालत में पेश किया। वहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
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आर्थिक अपराध शाखा इंचार्ज सुभाष ने बताया कि आरोपी राममेहर ने पूछताछ में पुलिस का सहयोग नहीं किया। वह शुरू से ही पुलिस को गुमराह करता रहा। रिमांड के दौरान आरोपी से कार की बरामदगी हुई है। फर्जीवाड़े में आरोपी के हिस्से में आए रुपये बरामद नहीं हो पाए। शनिवार को आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
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एनआरआई राकेश कपूर की मॉडल टाउन स्थित प्रॉपर्टी फर्जी दस्तावेज बनाकर आठ करोड़ 58 लाख रुपये में बेच दी गई थी। इसमें से आरोपी राममेहर के हिस्से में लगभग दो करोड़ रुपये आए। जिसकी बरामदगी के लिए पुलिस ने पूरा जोर लगाया लेकिन आरोपी राममेहर ने पुलिस को सही जानकारी नहीं दी।
जिस वजह से पुलिस के हाथ खाली रहे। हालांकि उससे एक कार बरामद की गई। जिसमें फर्जीवाड़ा की रकम इधर से उधर लेकर गए। सात दिन के रिमांड में उसने पुलिस को जो भी जानकारी दी। वह झूठी निकली। अब पुलिस को इस केस में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश है।

छह आरोपी हो चुके है गिरफ्तार
करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े में अब तक पुलिस दिल्ली निवासी परमजीत कौर, प्रॉपर्टी डीलर अश्विनी कुमार, उर्दू अनुवादक इस्लाम, उसकी भाभी इमराना, भाई रमजान व एसडीएम कार्यालय के कर्मी राममेहर को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। राममेहर को छोड़कर अन्य आरोपियों से पुलिस ने फर्जीवाड़ा की रकम बरामद की है। पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी परमजीत कौर, अश्विनी कुमार, इस्लाम और राममेहर की मिलीभगत से ही यह करोड़ों रुपये का फर्जीवाड़ा हुआ। फर्जीवाड़े में हर आरोपी के हिस्से में 50 लाख रुपये से दो करोड़ रुपये तक की रकम आई थी।
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