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Yamuna Nagar News: पुलिस के हत्थे चढ़ा प्रॉपर्टी डीलर अश्विनी कुमार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 19 Sep 2024 08:03 AM IST
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Property dealer Ashwini Kumar caught by police
यमुनानगर। एनआरआई राकेश कपूर की माॅडल टाउन स्थित करोड़ों रुपये की प्रापर्टी बेचने के मामले में पुलिस ने फर्जीवाड़े की मुख्य कड़ी प्रॉपर्टी डीलर माडल टाउन निवासी अश्विनी कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को वीरवार को अदालत में पेश किया जाएगा। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी इधर उधर भागता रहा। यही नहीं, अग्रिम जमानत के लिए जिला न्यायालय व उच्च न्यायालय में याचिका भी दायर की। आरोपी कुछ दिन वृंदावन में भी रहा। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है।
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अब तक की पूछताछ में सामने आया कि फर्जी दस्तावेजों पर प्राॅपर्टी बेचने का केस दर्ज होने के बाद प्रॉपर्टी डीलर अश्विनी, आरोपी एसडीएम कार्यालय का कर्मी राममेहर व करनैल सिंह लगभग एक सप्ताह तक एक साथ रहे। तीनों गिरफ्तारी से बचने के लिए इधर उधर छिपते रहे। बाद में आरोपी अश्विनी वृंदावन चला गया। जिसके बाद पुलिस ने उसे धर दबोचा। अश्विनी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को अब एसडीएम कार्यालय के कर्मी राममेहर व करनैल की तलाश है। आर्थिक अपराध शाखा इंचार्ज सुभाष का कहना है कि आरोपी अश्विनी कुमार को वीरवार को अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा। उससे पूछताछ के दौरान अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जाएगा।
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अब तक हो पांच आरोपी हो चुके गिरफ्तार -

प्रॉपर्टी आईडी बदलकर किए गए इस फर्जीवाड़े में आर्थिक अपराध शाखा गहनता से पड़ताल कर रही है। अब तक इस केस में दिल्ली निवासी परमजीत कौर, उर्दू अनुवादक इस्लाम उर्फ इस्लामुद्दीन, उसकी भाभी इमराना व भाई रमजान को गिरफ्तार कर जेल भेजा चुका है। अब प्रापर्टी डीलर अश्विनी कुमार को गिरफ्तार किया गया है। एसडीएम कार्यालय कर्मी राममेहर समेत कई अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी अभी बाकी है। पुलिस उनकी भी तलाश में लगी है।
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करोड़ों रुपये का गोलमाल

जानकारी के अनुसार एनआरआई की प्रॉपर्टी की कीमत लगभग दस करोड़ के आसपास है। आरोपियों ने फर्जीवाड़ा कर इसमें हिस्सेदारी की। आरोपी परमजीत कौर, अश्विनी समेत कई आरोपियों के हिस्से में एक-एक करोड़ रुपये की राशि आई तो उर्दू अनुवादक इस्लाम व राममेहर के हिस्से में दो-दो करोड़ रुपये आए। आर्थिक अपराध शाखा ने इस केस में आरोपियों के खातों को पहले ही सीज करा दिया है। अब तक की जांच में सामने आया कि यह आरोपी ऐसी प्रापर्टी की तलाश करते जो काफी समय से खाली पड़ी हो या विवादित हो। ऐसी प्राॅपर्टी को लेकर वह नगर निगम में अधिकारियों से मिलकर प्रापर्टी आईडी बदलवा देते थे। जिसके बाद जनरल पावर आफ अटार्नी तैयार करा तहसील से रजिस्ट्री करा देते। औने पौने भाव पर यह महंगी प्राॅपर्टी को बेच देते। खरीददार भी सस्ती के लालच में आकर इनके जाल में फंस जाता। इस तरह से आरोपियों ने कई प्रापर्टी बेची। मामला तब खुलता जब प्रापर्टी के असल मालिक सामने आते।
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