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Yamuna Nagar News: ग्रीन विहार की प्रिया जरूरतमंदों तक पहुंचा रहीं भोजन
Wed, 13 May 2026 12:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 13 May 2026 12:07 AM IST
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शांति फाउंडेशन से मिली पाठ्य सामग्री दिखाते विद्यार्थी। स्वयं
- फोटो : 1
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। रामपुरा कॉलोनी के ग्रीन विहार में रहने वाली 21 वर्षीय प्रिया अरोड़ा कई वर्षों से शांति फाउंडेशन के माध्यम से रोटी बैंक चला रही हैं। उनकी संस्था से करीब 25 विद्यार्थी और व्यवसायी जुड़े हुए हैं, जो रोजाना रेलवे स्टेशन, झुग्गी-झोपड़ियों और बस्तियों में जाकर जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध करवाते हैं, ताकि कोई भी भूखा न सोए।
इसके साथ ही संस्था महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति भी जागरूक कर रही है। समाजसेवा के इस कार्य के लिए प्रिया को 15 अगस्त के जिला स्तरीय कार्यक्रम में सम्मानित भी किया जा चुका है। प्रिया ने जीएनजी कॉलेज से एमए और पीएचडी की पढ़ाई की है। उन्होंने बताया कि कॉलेज के दिनों में उन्हें इस मुहिम का विचार आया। दोपहर के भोजन के बाद कई छात्राओं की रोटियां बच जाती थीं, जिन्हें वे वापस घर ले जाती थीं।
तब प्रिया को विचार आया कि यदि यह भोजन जरूरतमंद लोगों तक पहुंच जाए तो किसी का पेट भर सकता है। उन्होंने अपनी कक्षा से बची हुई रोटियां एकत्रित करनी शुरू कीं। शुरुआत में छात्राओं को समझ नहीं आया कि वह इन रोटियों का क्या करेंगी, लेकिन धीरे-धीरे पूरा कॉलेज उनके साथ जुड़ गया और रोज करीब 500 रोटियां एकत्रित होने लगीं।
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प्रिया ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी संस्था का प्रचार किया और लोगों से अपील की कि यदि उनके घरों, होटलों, धर्मशालाओं या समारोहों में भोजन बचता है तो उसे फेंकने की बजाय जरूरतमंदों तक पहुंचाने में सहयोग करें। अब स्थिति यह है कि लोग खुद उन्हें फोन कर भोजन लेने के लिए बुलाते हैं। शादी समारोह और अन्य आयोजनों के बाद बचा भोजन संस्था तक पहुंचाया जाता है।प्रिया बताती हैं कि पहले वह अकेले ही कार में भोजन लेकर जरूरतमंदों तक पहुंचती थीं, लेकिन अब उनके साथ 25 सदस्य जुड़ चुके हैं।
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यमुनानगर। रामपुरा कॉलोनी के ग्रीन विहार में रहने वाली 21 वर्षीय प्रिया अरोड़ा कई वर्षों से शांति फाउंडेशन के माध्यम से रोटी बैंक चला रही हैं। उनकी संस्था से करीब 25 विद्यार्थी और व्यवसायी जुड़े हुए हैं, जो रोजाना रेलवे स्टेशन, झुग्गी-झोपड़ियों और बस्तियों में जाकर जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध करवाते हैं, ताकि कोई भी भूखा न सोए।
इसके साथ ही संस्था महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति भी जागरूक कर रही है। समाजसेवा के इस कार्य के लिए प्रिया को 15 अगस्त के जिला स्तरीय कार्यक्रम में सम्मानित भी किया जा चुका है। प्रिया ने जीएनजी कॉलेज से एमए और पीएचडी की पढ़ाई की है। उन्होंने बताया कि कॉलेज के दिनों में उन्हें इस मुहिम का विचार आया। दोपहर के भोजन के बाद कई छात्राओं की रोटियां बच जाती थीं, जिन्हें वे वापस घर ले जाती थीं।
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तब प्रिया को विचार आया कि यदि यह भोजन जरूरतमंद लोगों तक पहुंच जाए तो किसी का पेट भर सकता है। उन्होंने अपनी कक्षा से बची हुई रोटियां एकत्रित करनी शुरू कीं। शुरुआत में छात्राओं को समझ नहीं आया कि वह इन रोटियों का क्या करेंगी, लेकिन धीरे-धीरे पूरा कॉलेज उनके साथ जुड़ गया और रोज करीब 500 रोटियां एकत्रित होने लगीं।
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प्रिया ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी संस्था का प्रचार किया और लोगों से अपील की कि यदि उनके घरों, होटलों, धर्मशालाओं या समारोहों में भोजन बचता है तो उसे फेंकने की बजाय जरूरतमंदों तक पहुंचाने में सहयोग करें। अब स्थिति यह है कि लोग खुद उन्हें फोन कर भोजन लेने के लिए बुलाते हैं। शादी समारोह और अन्य आयोजनों के बाद बचा भोजन संस्था तक पहुंचाया जाता है।प्रिया बताती हैं कि पहले वह अकेले ही कार में भोजन लेकर जरूरतमंदों तक पहुंचती थीं, लेकिन अब उनके साथ 25 सदस्य जुड़ चुके हैं।

शांति फाउंडेशन से मिली पाठ्य सामग्री दिखाते विद्यार्थी। स्वयं- फोटो : 1