फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Yamuna Nagar News ›   Pregnant women are being referred from the district hospital, which cost 105 crore rupees

Yamuna Nagar News: 105 करोड़ के जिला अस्पताल से गर्भवतियों को किया जा रहा रेफर

Tue, 10 Feb 2026 01:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Tue, 10 Feb 2026 01:17 AM IST
विज्ञापन
Pregnant women are being referred from the district hospital, which cost 105 crore rupees
मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल यमुनानगर। आर्काइव - फोटो : udhampur news
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

यमुनानगर। 105 करोड़ रुपये की लागत से बने 200 बेड के जिला नागरिक अस्पताल की व्यवस्थाएं सवालों के घेरे में हैं। यहां से गर्भवती महिलाओं को डिलीवरी के लिए अपने से छोटे उप जिला नागरिक अस्पताल जगाधरी में रेफर किया जा रहा है। रात के समय यह कहकर लौटा दिया जाता है कि गायनी डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं।
हालात यह हैं कि जिस अवस्था में गर्भवती महिलाएं ठीक से चल भी नहीं पातीं, उन्हें रात के अंधेरे में जिला अस्पताल से तीन से चार किलोमीटर दूर जगाधरी अस्पताल भेजा जा रहा है। इस दौरान किसी भी तरह की लिखित रेफरल पर्ची नहीं दी जाती, जिससे रास्ते में किसी अनहोनी की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाता है।
विज्ञापन

जिला नागरिक अस्पताल में तीन गायनी डॉक्टर तैनात हैं और उप जिला नागरिक अस्पताल जगाधरी में केवल एक गायनी डॉक्टर के सहारे प्रसव कराए जा रहे हैं। इसके बावजूद आंकड़े चौंकाने वाले हैं। जगाधरी अस्पताल में हर माह औसतन 450 से 500 डिलीवरी हो रही हैं। वहीं जिला अस्पताल में तीन डॉक्टर होने के बावजूद केवल करीब 150 डिलीवरी ही दर्ज की जा रही हैं। आरोप है कि रात में गर्भवतियों की देखभाल के दौरान परेशान न होना पड़े, इसलिए स्टाफ अपने स्तर पर ही उन्हें जगाधरी में भेज देते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

स्वास्थ्य विभाग से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि जिला अस्पताल से छोटे अस्पताल में लिखित रेफर किया जाए तो प्रशासन पर कई तरह के सवाल खड़े हो सकते हैं। नियमों के अनुसार बड़े अस्पताल से छोटे अस्पताल में रेफर करना व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है। यही वजह मानी जा रही है कि रेफर की प्रक्रिया को जानबूझकर मौखिक रखा जा रहा है, ताकि किसी तरह की जवाबदेही तय न हो सके।
यह मुद्दा पहले भी उठ चुका है। हाल ही में जिला अस्पताल में हुए प्रदर्शन के दौरान आशा वर्करों ने भी आरोप लगाए थे कि गर्भवती महिलाओं को बेवजह कभी जगाधरी तो कभी मुलाना रेफर किया जा रहा है। आशा वर्करों का कहना था कि इससे न केवल महिलाओं को शारीरिक परेशानी झेलनी पड़ती है, बल्कि उन्हें भी गर्भवतियों के साथ यहां वहां भागदौड़ करनी पड़ती है।
यदि जच्चा-बच्चा को कुछ हो जाए तो उनसे भी जवाब मांगा जाता है। एडवोकेट वरयाम सिंह का कहना है कि करोड़ों की लागत से बने जिला अस्पताल का उद्देश्य ही जिले की महिलाओं को बेहतर और सुरक्षित प्रसव सुविधा देना था। यदि वहां संसाधन और विशेषज्ञ मौजूद होने के बावजूद महिलाओं को इधर-उधर भटकाया जा रहा है, तो यह गंभीर लापरवाही है।
हमारे अस्पताल में हर माह 450 से 500 डिलीवरी हो रही हैं। रोजाना औसतन 10 महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी होती है। ऐसे में एक ही डॉक्टर प्रसव करवा रही है। कम डॉक्टरों व स्टाफ के बावजूद सबसे ज्यादा डिलीवरी करवा रहे हैं। - डॉ. अनुज मंगला, एमएस, उप जिला अस्पताल जगाधरी।

जिला नागरिक अस्पताल में अब तीन गायनी डॉक्टर हैं। स्टाफ रात में ड्यूटी से बचने के लिए अपने स्तर पर ही गर्भवतियों को जगाधरी भेज रहा है तो इसकी जांच करके कार्रवाई की जाएगी। किसी भी स्टाफ को ऐसा करने का अधिकार नहीं है। - डॉ. जितेंद्र सिंह, सिविल सर्जन, यमुनानगर।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed