प्लाट खरीदने के लिए चार लोगों ने साजिश के तहत स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से फर्जी दस्तावेज देकर 12.82 लाख रुपये का लोन ले लिया, लेकिन कई नोटिस भेजने के बाद भी आरोपियों ने लोन नहीं चुकाया। जब बैंक अधिकारियों ने रिकवरी के लिए दस्तावेज में दिखाए गए प्लाट की जांच की तो उसका खसरा नहीं कोई ओर मिला। बैंक अधिकारियों ने इसकी शिकायत पुलिस को दी। पुलिस ने मामले में चारों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्जकर जांच शुरू कर दी है।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया जगाधरी के चीफ मैनेजर विजय कुमार श्रीवास्तव ने शहर जगाधरी पुलिस को दी शिकायत में बताया कि गोविंदपुरी निवासी मनोज त्यागी, प्रदीप त्यागी, संधाली निवासी राम निवास व गढ़ी सिकंदरा निवासी गोपाल ने प्लाट खरीदने के लिए उनके बैंक से लोन अप्लाई किया था। नौ जुलाई 2010 को 12 लाख 82 हजार 779 का लोन लिया। आरोप है कि इन्होंने बैंक से प्लाट पर लोन लेने के नाम पर फर्जीवाड़ा किया। लोन लेने के बाद आरोपियों ने उसे नहीं चुकाया। बैंक ने उन्हें कई नोटिस भी भेजे। लेकिन आरोपियों ने लोन राशि जमा नहीं करवाई। मैनेजर के अनुसार गोबिंदपुरी निवासी मनोज त्यागी ने बैंक से लोन लेने एक प्लाट के दस्तावेज दिए थे। जब इनकी जांच की तो फर्जीवाड़ा सामने आया। आरोपियों ने जिस खसरा नंबर का प्लाट बताया वहां पर प्लाट नहीं मिला। इसके साथ ही यह प्लाट आगे बेच दिया गया। इस तरह से बैंक को इससे काफी हानी हुई। लोन नहीं चुकाने पर बैंक मैनेजर द्वारा इसकी शिकायत पुलिस को दी गई। पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप में केस दर्जकर जांच शुरू कर दी है।