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कोरोनाकाल की मंदी से भी बुरे दौर में बर्तन उद्योग

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 22 Sep 2022 02:12 AM IST
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Pottery industry in worse times than the recession of Corona period
फैक्टरी में काम करता श्रमिक व तैयार बर्तन। - फोटो : Yamuna Nagar
जगाधरी। बर्तन नगरी को हर बार दीवाली से भारी आशाएं होती हैं। साल भर की मंदी दीवाली से छट जाती है। लेकिन इस साल बर्तन इंडस्ट्री पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। हालत यह है कि बर्तन उद्योग कोरोना काल की मंदी से भी बुरे दौर से गुजर रहा है। बर्तन उद्यमियों को इस बार दीवाली से जो उम्मीद थी वह टूट चुकी है।
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व्यापारियों को दो साल से मंदी झेल रही इंडस्ट्री को इस बार दीवाली में राहत मिलने की आस थी। परंतु उद्यमियों को दीवाली पर अपेक्षा के अनुरूप काम नहीं मिला। हर साल दीवाली पर देशभर से करोड़ों रुपये के बर्तन बनाने के ऑर्डर मिलते थे। जबकि इस बार यह ऑर्डर एक चौथाई भी नहीं हैं। ऐसे में इस बार दीवाली पर स्टील बर्तन की चमक फीकी होती नजर आ रही है। उद्यमियों का कहना है कि दीवाली पर अब तक सभी ऑर्डर तैयार हो जाते थे, केवल डिलीवरी शेष रहती थी। जबकि इस बार क्षेत्र की लगभग सभी इकाइयां ठंडी पड़ी हैं।
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उद्यमियों ने तैयार की इकाईयां पर नहीं मिले आर्डर
दी जगाधरी मेटल इंडस्ट्री एंड सप्लायर्स एसोसिएशन के प्रधान सुंदरलाल बत्रा ने बताया कि इस साल उद्यमियों को ऑर्डर नहीं मिले हैं। उन्होंने बताया कि दीवाली के लिए इकाइयों पहले ही तैयार हो जाती हैं। इस बार भी उद्यमियों ने इकाइयां तैयार की, लेकिन अपेक्षाकृत ऑर्डर नहीं मिले। फैक्टरियों में पितृपक्ष से पहले ही दूर के राज्यों का माल तैयार हो जाता है। जबकि इन दिनों आसपास के क्षेत्रों का माल तैयार किया जाता है। इस बार मुंबई, दिल्ली, चेन्नई, बंगलूरू, उड़ीसा, बिहार, असम, छत्तीसगढ़ इत्यादि राज्यों से बहुत कम ऑर्डर मिले हैं। उन्होंने बताया कि साल 2020 कोरोना संक्रमण के लॉकडाउन के बाद आई दीवाली पर भी करीब 150 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ था। जबकि इस बार व्यापारियों को पांच सौ करोड़ रुपये के कारोबार की उम्मीद थी। जबकि अधिकांश उद्यमी अभी खाली बैठे हैं।
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ढाई सौ फैक्टरियों में 50 हजार मजदूर करते हैं काम
जगाधरी में स्टील, एल्यूमिनियम और तांबे तीनों धातुओं से बर्तन बनाने की फैक्ट्रियां हैं। जिले में करीब 250 बर्तन औद्योगिक इकाइयां हैं। जिसमें करीब 50 हजार श्रमिक काम करते हैं। उद्यमी भारत गर्ग ने बताया कि बर्तन उद्योग लॉकडाउन के समय से मंदी की मार झेल रहा है। इस बार उद्यमियों को भारी उम्मीद थी, लेकिन बाजार ठंडा होने के कारण इकाइयां भी ठंडी पड़ी हैं। इन दिनों बाजार में स्टील ही नहीं बल्कि पीतल, एल्यूमीनियम, कांसे सभी प्रकार के बर्तनों का बाजार मंदी के दौर से गुजर रहा है।

विदेशों में भी है यहां बने स्टील के बर्तनों की मांग
जगाधरी बर्तन नगरी के नाम से देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी मशहूर है। यहां के बने स्टील के बर्तनों की विदेशों में भी मांग है। इन दिनों इंडस्ट्री मंदी से गुजर रही है, जबकि छह साल में यहां की सभी इकाइयों से 1500 करोड़ रुपये का कारोबार किया। 2016 में बर्तन उद्योग ने करीब 250 करोड़ का कारोबार किया। जबकि 2017 में 330 करोड़, 2018 में 300 करोड़, 2019 में 400 करोड़, 2020 में 150 करोड़, जबकि 2021 में 250 करोड़ से ज्यादा का कारोबार हुआ।
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