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Yamuna Nagar News: कुम्हारों ने तैयार किए ढाई लाख दीये
Thu, 17 Sep 2026 03:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Thu, 17 Sep 2026 03:19 AM IST
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मिट्टी से बने बर्तन पसंद करता युवक। संवाद
यमुनानगर। दिवाली आने में अभी समय है, लेकिन ससौली गांव के कुम्हार परिवार के लिए त्योहार पहले ही दस्तक दे चुका है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम के लिए जिले के कुम्हारों को ढाई लाख मिट्टी के दीये तैयार करने का ऑर्डर मिला। महज एक सप्ताह में इतना बड़ा ऑर्डर पूरा करना आसान नहीं था। मौसम में बदलाव, बारिश के कारण दीयों को सुखाने में परेशानी और बिजली की समस्या के बीच कुम्हारों ने पूरे परिवार ने दिन-रात मेहनत कर ऑर्डर तैयार किया।
कुम्हारों ने बताया कि कुछ दीयों का स्टॉक उन्होंने पहले से तैयार कर रखा था, जिससे काम में थोड़ी मदद मिली। बाकी दीये तैयार करने के लिए परिवार के सभी सदस्य जुट गए।
कुम्हार प्रिंस, प्रवीन, करनैलो देवी, रेखा देवी, गुंजन और परिवार के बच्चे भी दीये बनाने और उन्हें तैयार करने के काम में लगे रहे। उन्होंने बताया कि रविवार को कैथल, शाहाबाद समेत अन्य स्थानों पर दीयों की खेप भेजी गई।
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बिजली के चाक ने बढ़ाई रफ्तार: प्रिंस के मुताबिक पहले परिवार हाथ से दीये तैयार करता था, लेकिन बड़े ऑर्डर को देखते हुए अब बिजली के चाक का इस्तेमाल किया गया।
एक साथ ढाई लाख दीये तैयार करना संभव नहीं था। इसलिए आसपास के अन्य कुम्हारों से भी माल तैयार करवाकर ऑर्डर पूरा किया गया। रामचंद्र, राजेश, कमलेश, अजय, अहम, बीना, नैना, उमा, राजेश प्रजापत, मुकेश, अमित, भगत राम, नरेश आदि ने बताया कि पहले ससौली और आसपास में ही मिट्टी आसानी से उपलब्ध हो जाती थी। तालाबों और खुदाई वाले स्थानों से चिकनी मिट्टी मिल जाती थी, लेकिन अब मिट्टी के बर्तन और दीये बनाने के लिए चिकनी मिट्टी पंचकूला के कक्कड़ माजरा से मंगानी पड़ती है। इससे कारोबार की लागत बढ़ गई है। संवाद
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम के लिए जिले के कुम्हारों को ढाई लाख मिट्टी के दीये तैयार करने का ऑर्डर मिला। महज एक सप्ताह में इतना बड़ा ऑर्डर पूरा करना आसान नहीं था। मौसम में बदलाव, बारिश के कारण दीयों को सुखाने में परेशानी और बिजली की समस्या के बीच कुम्हारों ने पूरे परिवार ने दिन-रात मेहनत कर ऑर्डर तैयार किया।
कुम्हारों ने बताया कि कुछ दीयों का स्टॉक उन्होंने पहले से तैयार कर रखा था, जिससे काम में थोड़ी मदद मिली। बाकी दीये तैयार करने के लिए परिवार के सभी सदस्य जुट गए।
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कुम्हार प्रिंस, प्रवीन, करनैलो देवी, रेखा देवी, गुंजन और परिवार के बच्चे भी दीये बनाने और उन्हें तैयार करने के काम में लगे रहे। उन्होंने बताया कि रविवार को कैथल, शाहाबाद समेत अन्य स्थानों पर दीयों की खेप भेजी गई।
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बिजली के चाक ने बढ़ाई रफ्तार: प्रिंस के मुताबिक पहले परिवार हाथ से दीये तैयार करता था, लेकिन बड़े ऑर्डर को देखते हुए अब बिजली के चाक का इस्तेमाल किया गया।
एक साथ ढाई लाख दीये तैयार करना संभव नहीं था। इसलिए आसपास के अन्य कुम्हारों से भी माल तैयार करवाकर ऑर्डर पूरा किया गया। रामचंद्र, राजेश, कमलेश, अजय, अहम, बीना, नैना, उमा, राजेश प्रजापत, मुकेश, अमित, भगत राम, नरेश आदि ने बताया कि पहले ससौली और आसपास में ही मिट्टी आसानी से उपलब्ध हो जाती थी। तालाबों और खुदाई वाले स्थानों से चिकनी मिट्टी मिल जाती थी, लेकिन अब मिट्टी के बर्तन और दीये बनाने के लिए चिकनी मिट्टी पंचकूला के कक्कड़ माजरा से मंगानी पड़ती है। इससे कारोबार की लागत बढ़ गई है। संवाद

मिट्टी से बने बर्तन पसंद करता युवक। संवाद

मिट्टी से बने बर्तन पसंद करता युवक। संवाद