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Yamuna Nagar News: पॉपुलर के रेट घटे, फैक्ट्री संचालकों पर उठ रहे सवाल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 05 Feb 2024 02:29 AM IST
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Popular rates reduced, questions being raised on factory operators

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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले की लक्कड़ मंडियों में पॉपुलर की लकड़ी के रेट 200 रुपये तक घट गए हैं। वहीं सफेदा की लकड़ी में भी 50 रुपये तक की गिरावट दर्ज की गई है। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि कुछ दिनों से प्लाईवुड फैक्टरियों में लकड़ी की डिमांड काफी घट गई है। डिमांड कम होने से मंडियों में आई लकड़ी को बेचने में आढ़तियों को मोलभाव करना पड़ रहा है।
आढ़तियों का आरोप है कि फैक्टरी संचालकों की मनमानी से लकड़ी के रेट में गिरावट आ रही है। व्हाट्सएप पर ग्रुप बने हुए हैं, जिसमें फैक्टरी संचालक मिलकर तय करते हैं कि अगले लकड़ी किस भाव पर खरीदी जाएगी। लकड़ी कीमतों में कमी आने से प्लाईवुड फैक्टरी संचालकों को फायदा है। ऐसा इसलिए क्योंकि सस्ती दर पर लकड़ी खरीदने से प्लाई तैयार करने में उनकी लागत कम आएगी।
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जिले में दो लक्कड़ मंडियां हैं। इनमें एक मंडी सहारनपुर मार्ग स्थित मंडौली गांव में तथा दूसरी जगाधरी में छछरौली हाईवे किनारे मानकपुर में है। दोनों ही मंडियों में रोजाना लकड़ी की करीब 400 ट्रालियां आ रही हैं, जबकि 24 जनवरी से पहले मंडियों में 600 तक ट्रालियां आ रही थीं। तब मंडियों में पॉपुलर की जिस वैरायटी का रेट 1600 रुपये प्रति क्विंटल था वो अब 1400 रुपये पर आ गया है। वहीं जो पॉपुलर 1400 रुपये था वह 1200 रुपये पर आ गया है। जिले में प्लाईवुड की 300 फैक्टरियां हैं। इसके अलावा करीब 400 पिलिंग यूनिट व सॉ मिल हैं। फैक्टरियों में रोजाना 7000 क्यूबिक मीटर प्लाई का उत्पादन होता है।
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अधिक बचत के लिए घटाई जाती है लकड़ी की कीमत
अक्सर किसी भी सामान की कमी होने पर उसके रेट बढ़ जाते हैं, परंतु यहां लकड़ी के मामले में उल्टा हो रहा है। मंडियों में पॉपुलर व सफेदे की लकड़ी काफी कम आ रही है। ऐसे में कच्चा माल कम आने से इसकी कीमतों में बढ़ोतरी होनी चाहिए थी, परंतु यहां उल्टा हुआ। रेट बढ़ने के बजाय 200 रुपये तक कम हो गए। आढ़तियों का यह भी कहना है कि फैक्टरी संचालक लकड़ी से जो प्लाई व अन्य सामान तैयार करते हैं उसकी कीमत जो एक बार निर्धारित हो गई, वह उतनी ही रहती है। यानि जिस तरह से लकड़ी की कीमत घटती है, उसी तरह तैयार माल की कीमत में कमी नहीं की जाती। लकड़ी की कीमत इसलिए घटाई जाती है ताकि उन्हें ज्यादा बचत हो सके।


किसानों की मांग सरकार निर्धारित करे रेट
भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान संजू गुंदियाना व भारतीय किसान संघ के प्रदेश महामंत्री रामबीर सिंह चौहान का कहना है कि चाहे फसल हो या फिर पॉपुलर व सफेदा की लकड़ी। हर जगह किसानों को फसल का सही रेट नहीं मिल रहा। फैक्टरी संचालक जानबूझ कर रेट कम करते हैं ताकि वह ज्यादा मुनाफा कमा सके। काफी समय से मांग की जा रही है कि सरकार गेहूं, धान व अन्य फसलों की तरह ही सफेदा व पॉपुलर की लकड़ी का एमएसपी निर्धारित करे ताकि कोई भी कम कीमत पर लकड़ी न खरीद सके।



पेड़ों में नमी बढ़ गई है : जेके बिहानी
हरियाणा प्लाईवुड मेन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष जेके बिहानी ने बताया कि इस काम में मनमानी नहीं हो सकती। जब सामान के सैकड़ों खरीदार हों और लाखों किसान सप्लायर हों तो वहां पर बाजार के आर्थिक नियम काम करते हैं। फैक्टरियों में लकड़ी की डिमांड भी कम है। वहीं पॉपुलर के पत्ते झड़ चुके हैं जिससे लकड़ी में नमी की मात्रा 25 प्रतिशत तक बढ़ गई है, जबकि रेट में महज 10 प्रतिशत की कमी आई है। लकड़ी का जो रेट फिलहाल चल रहा है, उसे खरीदना अभी घाटे का सौदा है।
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