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सिपाही की परीक्षा रद्द, सड़कों पर भटकते रहे अभ्यार्थी
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अन्य राज्यों से जिले में सिपाही की परीक्षा देने आए 74 हजार युवा शनिवार को परीक्षा रद्द होने के बाद शहर की सड़कों पर भटकते रहे। अचानक रद्द हुई परीक्षा से उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। दूरदराज के क्षेत्रों और अन्य राज्यों से आने वाले युवा शनिवार रात को यहां पहुंच गए थे। यहां पहुंचने पर उन्हें परीक्षा रद्द होने का पता चला। ऐसे में न तो उनके पास घर लौटने का विकल्प था और न ही कहीं ठहरने की व्यवस्था थी। ऐसे में काफी संख्या में युवाओं को पूरी रात सड़क किनारे गुजारनी पड़ी। सबसे ज्यादा परेशानी दूसरे राज्यों से आए अभ्यर्थियों को हुई। क्योंकि उन्होंने परीक्षा के अनुसार अपना आरक्षण करवाया हुआ था। इस दौरान युवाओं में परीक्षा रद्द होने को लेकर भारी निराशा और रोष देखने को मिला।
जानकारी के अनुसार आयोग की ओर से शनिवार व रविवार को पुलिस सिपाही पद के लिए 74 हजार अभ्यर्थियों की परीक्षा होनी थी। जिसमें से करीब 37500 युवाओं का शनिवार और बाकी का रविवार को पेपर था। शनिवार सुबह की परीक्षा हो गई थी। शाम की परीक्षा चल रही थी, इसी बीच रद्द के आदेश जारी कर दिए गए। परीक्षा देने आए युवाओं के कारण शहर के सभी होटल, धर्मशाला, गेस्ट हाउस भर चुके थे। अभ्यर्थियों ने लौटने के लिए परीक्षा के बाद की ट्रेन इत्यादि की बुकिंग करवाई थी। ऐसे में हजारों युवा शहर की सड़कों पर मारे मारे फिरते थे। जिसे जहां जगह मिली सो गया। समूह में आए अभ्यर्थियों में से सभी बारी बारी सामान की निगरानी करते और बाकी सड़क पर ही आराम करते नजर आए।
ट्रेन का लंबा सफर कर पहुंचे
परीक्षा के लिए राजस्थान के हनुमानगढ़, सीकर, जैसलमेर, श्रीगंगानगर, भरतपुर, जालौर, कोटा के मोहित, प्रशांत, भारत कुमार, यादविंद्र, प्रतीक, भानूप्रताप, दीपक, रविकुमार ने बताया कि कोरोना संक्रमण के कारण बस सेवा नहीं है। रोडवेज से आने के लिए कई बसें बदलनी पड़ती हैं। ऐसे में वे ट्रेन से परीक्षा देने के लिए आए, ताकि समय पर पहुंच सके। बता दें कि यमुनानगर से कोटा, जैसलमेर, श्रीगंगानगर इत्यादि का सफर करीब 12 से 15 घंटे का है। इतने लंबे सफर करके वे आए सोचा था कि सुबह परीक्षा देंगे। परंतु अब उनकी मेहनत, धन व समय सब नष्ट हो गया है। इसी तरह उत्तरप्रदेश के मुरादाबाद, बरेली, बदायूं, पीलीभीत, पितांबरपुर, लखनऊ, बाराबंकी, बनारस, गोरखपुर, सुल्तानपुर, फैजाबाद, हरदोई, प्रयागराज, बलिया इत्यादि जिलों से भी अभ्यार्थी पहुंचे। जतिन, दीपक, लक्ष्य, चेतनप्रकाश, वैभव, कपिल, आशीष, योगेश, वरुण ने बताया कि देर रात पहुंचने पर वे शहर की सड़कों पर मारे मारे फिरते रहे। कुछ पार्क खुले मिले तो वहां सो गए, तो कई सड़कों किनारे फुटपाथ इत्यादि पर बैठे रहे। उन्होंने कहा कि परीक्षा रद्द होने की उन्हें जानकारी यहां पहुंचने पर मिली। कई लोगों को ट्रेन में आते समय इसका पता चला, लेकिन सोशल मीडिया पर भ्रामक सामग्री समझकर पूरी तरह विश्वास नहीं हुआ।
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बिलासपुर से आए पैदल
उत्तरप्रदेश, राजस्थान, बिहार के युवाओं को यहां पर पहुंचने पर कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। रमन, सुनील, गुरविंद्र, रोमेश, राहुल, निशांत, रामेंद्र ने बताया कि उनका केंद्र बिलासपुर बना था। वे शनिवार शाम को वहां पहुंच गए थे। जब उन्हें परीक्षा रद्द होने की सूचना मिली तो यकीन नहीं हुआ। जानकारी पुख्ता की, तब तक अंधेरा हो गया। ऐसे में यहां से कोई बस नहीं मिली। निजी साधन भी उन्हें नहीं मिल पाए। ऐसे में वे पैदल ही निकल पड़े और देर रात यमुनानगर पहुंचे। यहां उन्हें कहीं कुछ खाने को नहीं मिला। भूख पेट रात काटी और तड़के बिस्कुट खाकर गुजारा किया।
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जानकारी के अनुसार आयोग की ओर से शनिवार व रविवार को पुलिस सिपाही पद के लिए 74 हजार अभ्यर्थियों की परीक्षा होनी थी। जिसमें से करीब 37500 युवाओं का शनिवार और बाकी का रविवार को पेपर था। शनिवार सुबह की परीक्षा हो गई थी। शाम की परीक्षा चल रही थी, इसी बीच रद्द के आदेश जारी कर दिए गए। परीक्षा देने आए युवाओं के कारण शहर के सभी होटल, धर्मशाला, गेस्ट हाउस भर चुके थे। अभ्यर्थियों ने लौटने के लिए परीक्षा के बाद की ट्रेन इत्यादि की बुकिंग करवाई थी। ऐसे में हजारों युवा शहर की सड़कों पर मारे मारे फिरते थे। जिसे जहां जगह मिली सो गया। समूह में आए अभ्यर्थियों में से सभी बारी बारी सामान की निगरानी करते और बाकी सड़क पर ही आराम करते नजर आए।
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ट्रेन का लंबा सफर कर पहुंचे
परीक्षा के लिए राजस्थान के हनुमानगढ़, सीकर, जैसलमेर, श्रीगंगानगर, भरतपुर, जालौर, कोटा के मोहित, प्रशांत, भारत कुमार, यादविंद्र, प्रतीक, भानूप्रताप, दीपक, रविकुमार ने बताया कि कोरोना संक्रमण के कारण बस सेवा नहीं है। रोडवेज से आने के लिए कई बसें बदलनी पड़ती हैं। ऐसे में वे ट्रेन से परीक्षा देने के लिए आए, ताकि समय पर पहुंच सके। बता दें कि यमुनानगर से कोटा, जैसलमेर, श्रीगंगानगर इत्यादि का सफर करीब 12 से 15 घंटे का है। इतने लंबे सफर करके वे आए सोचा था कि सुबह परीक्षा देंगे। परंतु अब उनकी मेहनत, धन व समय सब नष्ट हो गया है। इसी तरह उत्तरप्रदेश के मुरादाबाद, बरेली, बदायूं, पीलीभीत, पितांबरपुर, लखनऊ, बाराबंकी, बनारस, गोरखपुर, सुल्तानपुर, फैजाबाद, हरदोई, प्रयागराज, बलिया इत्यादि जिलों से भी अभ्यार्थी पहुंचे। जतिन, दीपक, लक्ष्य, चेतनप्रकाश, वैभव, कपिल, आशीष, योगेश, वरुण ने बताया कि देर रात पहुंचने पर वे शहर की सड़कों पर मारे मारे फिरते रहे। कुछ पार्क खुले मिले तो वहां सो गए, तो कई सड़कों किनारे फुटपाथ इत्यादि पर बैठे रहे। उन्होंने कहा कि परीक्षा रद्द होने की उन्हें जानकारी यहां पहुंचने पर मिली। कई लोगों को ट्रेन में आते समय इसका पता चला, लेकिन सोशल मीडिया पर भ्रामक सामग्री समझकर पूरी तरह विश्वास नहीं हुआ।
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बिलासपुर से आए पैदल
उत्तरप्रदेश, राजस्थान, बिहार के युवाओं को यहां पर पहुंचने पर कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। रमन, सुनील, गुरविंद्र, रोमेश, राहुल, निशांत, रामेंद्र ने बताया कि उनका केंद्र बिलासपुर बना था। वे शनिवार शाम को वहां पहुंच गए थे। जब उन्हें परीक्षा रद्द होने की सूचना मिली तो यकीन नहीं हुआ। जानकारी पुख्ता की, तब तक अंधेरा हो गया। ऐसे में यहां से कोई बस नहीं मिली। निजी साधन भी उन्हें नहीं मिल पाए। ऐसे में वे पैदल ही निकल पड़े और देर रात यमुनानगर पहुंचे। यहां उन्हें कहीं कुछ खाने को नहीं मिला। भूख पेट रात काटी और तड़के बिस्कुट खाकर गुजारा किया।