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औपचारिकता व फीस जमा करने के बाद भी नहीं मिल रहा प्लाईबोर्ड फैक्टरी चलाने का लाइसेंस

Wed, 04 Sep 2019 12:03 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 04 Sep 2019 12:03 AM IST
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पत्रकारों को जानकारी देते व्यापारी। - फोटो : YAMUNA NAGAR
वन विभाग की सभी औपचारिकता पूरी व फीस जमा करने के बाद भी शहर के उद्यमियों को प्लाईबोर्ड फैक्टरी चलाने का लाइसेंस नहीं मिला है। जबकि इस कारोबार को शुरू करने के लिए उद्यमियों ने 50 से 60 करोड़ रुपये तक अपनी-अपनी फैक्टरियों में इन्वेस्टमेंट कर चुके हैं। लाइसेंस न मिलने से अब बैंकों ने भी लोन देने से मना कर दिया।
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कारोबारियों का कहना है यदि उन्हें कारोबार शुरू करने के लिए लाइसेंस नहीं मिला तो उनके करोड़ों रुपये डूब जाएंगे। मंगलवार को जिमखाना क्लब में शहर के उद्यमियों ने अपना दुखड़ा रोया। मीटिंग के बाद सभी व्यवसायी रोष प्रकट करते हुए डीसी ऑफिस पहुंचे और राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर विक्रांत कांबोज, सचिन, जयसिंह, विपिन कुमार, राजेश गुलाटी, सतपाल कौशिक आदि मौजूद रहे।
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इतनी यूनिट के आवेदन प्राप्त हुए : सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार राज्यस्तरीय कमेटी का गठन हुआ था कि प्रदेश में सर्वे करके एनजीटी की गाइड लाइन के अनुसार प्लाईबोर्ड इकाई चलाने के लिए लाइसेंस जारी किए जाएं। जिसमें कमेटी द्वारा लकड़ी की उपलब्धता के आधार पर 2400 प्लाई यूनिट के आवेदन प्राप्त हुए। जिसमें 2017 में 1600 लोगों को लाइसेंस जारी किए गए और जो बाकी 800 लाइसेंस शेष रह गए थे। उनके लिए वन विभाग ने समाचार पत्रों के माध्यम से विज्ञापन देकर दोबारा से प्लाईबोर्ड, पीलिंग, स्लाइसर, आरा मशीन का लाइसेंस निर्धारित फीस जमा करवाकर ले सकता है।
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325 उद्यमियों ने जमा करवाई थी लाइसेंस के लिए फीस : वन विभाग के दिशा-निर्देशों व शर्तों के अनुसार 325 से अधिक उद्यमियों ने राज्य में लाइसेंस के लिए फीस जमा करवा दी थी। यहां तक अपनी यूनिट्स भी तैयार कर ली। लेकिन वन विभाग द्वारा अभी तक लाइसेंस न मिलने से उद्यमियों को आर्थिक नुकसान हो रहा है और इस मामले में उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

ये उद्यमी लगा चुके इतना पैसा : इस कारोबार को शुरू करने में कई उद्यमी काफी पैसा लगा चुके हैं। जिसमें उद्यमी नवीन कुमार के 15.45, जगमाल सिंह के सात लाख, सूचक कांबोज के 16 लाख, शाक्छी छाबड़ा के 6.5 लाख रुपये लगा चुके हैं। अगर हमें जल्द ही लाइसेंस जारी नहीं किए गए तो हमें सरकारी विभाग के खिलाफ सड़कों पर उतरने को मजबूर होना पड़ेगा।
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