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Yamuna Nagar News: चार मंजिला अस्पताल में कमरे की तलाश में भटक रहे मरीज

Sat, 19 Jul 2025 01:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Sat, 19 Jul 2025 01:05 AM IST
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Patients wandering in search of rooms in a four-storey hospital
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल के चार मंजिला भवन का उद्घाटन हुए दो साल से ज्यादा बीत चुके हैं। बावजूद इसके अस्पताल में व्यवस्था नहीं बन पा रही है। यहां उपचार के लिए आने वाले मरीजों का आधा दिन तो कमरों के नंबर तलाशने में ही बीत जाता है। कमरों का नंबर पूछने के लिए मरीज यहां से वहां भटकते रहते हैं। वहीं अस्पताल में बने पूछताछ केंद्र पर कर्मचारी नहीं मिलते हैं।
कभी अस्पताल के स्टाफ से पूछते हैं तो कई बार दूसरे मरीज से ही पूछ लेते हैं। कई बार तो ऐसा होता है कि जिन लोगों से कमरे का नंबर पूछ रहे होते हैं, वह खुद भी कमरों को तलाश में ही भटक रहे होते हैं। अस्पताल में कहीं भी भी एक ऐसा बोर्ड नहीं लगा है जिस पर यह लिखा हो कि किस नंबर के कमरे अस्पताल में कहां और कौन से तल पर हैं।
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जिला अस्पताल के नए भवन में ए व बी दो ब्लॉक हैं। दोनों ही ब्लॉक चार मंजिला हैं। ए ब्लॉक में ट्रामा सेंटर भी अस्थायी तौर पर शिफ्ट किया हुआ है। इसलिए भी मरीजों की भीड़ बहुत ज्यादा रहती है। जिला अस्पताल में रोजाना 1500 से 1800 मरीजों की ओपीडी होती है। अस्पताल में आने वाले मरीजों व उनके साथ आए तीमारदारों को पर्ची बनवाने के बाद चेकअप के लिए ओपीडी में डॉक्टर के केबिन में जाना होता है।
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चेकअप के बाद डॉक्टर मरीजों को टेस्ट कराने, बीपी की जांच कराने, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड समेत अन्य चेकअप कराने के लिए लिख देते हैं। ऐसे में डॉक्टर या स्टाफ लोगों को यह नहीं बताते की उन्हें कौन से तल पर जाना है।
बस कमरा नंबर बताकर चलता कर देते हैं। बस यहीं से मरीजों की परेशानी बढ़ जाती है। मरीज कभी स्टाफ से तो कभी उपचार के लिए आए दूसरे लोगों से कमरा नंबर पूछते हैं। दिक्कत तब और ज्यादा बढ़ जाती है जब लोग अंदाजे से गलत दिशा में भेज देते हैं।
पर्ची बनाने वाले ने डॉक्टर के कमरे का नंबर बताया

अस्पताल आए पवन ने बताया कि वह अपने पिता जी का चेकअप कराने के लिए आया था। पर्ची बनाने वाले कर्मचारी ने डॉक्टर का केवल कमरा नंबर बताया। वह कई लोगों से कमरे का नंबर पूछ चुका है, लेकिन किसी को कुछ पता ही नहीं है। प्लास्टर रूम के बाहर पूछताछ केंद्र है, लेकिन इस पर कोई कर्मचारी नहीं मिला। कमरों के बाहर नंबर तो लिखे हैं, लेकिन अस्पताल में एक भी बोर्ड ऐसा नहीं है जिस पर यह लिखा हो कि किस नंबर के कमरे कौन सी दिशा व कौन से तल पर हैं। अस्पताल आईं सत्या देवी ने बताया कि वह काफी देर से भटक रही हैं, लेकिन 52 नंबर कमरा नहीं मिल रहा। कमरे के बारे में कई लोगों से पूछ चुकी है, हर कोई यही कहता है उन्हें नहीं पता। आठ से दस लोगों से पूछने के बाद मरीज कमरे तक पहुंच पाता है।

अस्पताल में कमरों की दिशा सूचक बोर्ड लगा होना जरूरी है ताकि मरीज या उनके साथ आए लोग आसानी से अपना उपचार करवा सकें। अस्पताल में ऐसे बोर्ड क्यों नहीं लगे हैं, इस बारे में वह अस्पताल की पीएमओ से बात करेंगे। - डॉ. मंजीत सिंह, सिविल सर्जन, यमुनानगर
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