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Yamuna Nagar News: दवाइयों की कमी से परेशान हो रहे मरीज
Tue, 12 Sep 2023 02:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 12 Sep 2023 02:02 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। मरीजों को मुकंद लाल जिला सिविल अस्पताल में रोजमर्रा की दवाइयां भी नहीं मिल रही। मरीज बाजार से महंगे दाम पर दवाइयां खरीदने को मजबूर हैं। सामान्य से लेकर गंभीर बीमारियों की दवाओं का अस्पताल में टोटा है। मरीजों का ज्यादातर समय लाइनों में ही बीत जाता है। कभी ओपीडी की पर्ची के लिए लंबी लाइन में लगना पड़ता है तो कभी टेस्ट की रिपोर्ट लेने के लिए।
जब से मुकंद लाल जिला सिविल अस्पताल का नया भवन 200 बेड का हुआ है, तबसे मरीजों की संख्या दो से ढाई गुना तक बढ़ गई हैं। वहीं अस्पताल में मरीजों को दवाइयों के लिए भटकना पड़ रहा है। कोई किस्मत वाला ही मरीज होगा जिसे लंबी लाइन में लगने के बाद काउंटर से सारी दवाइयां मिल जाए।
कई बार तो ऐसा होता है कि चेकअप के बाद डॉक्टर ने पांच दवाइयां लिखी हों, लेकिन उन्हें मिलती केवल एक या दो दवा ही हैं। बाकी दवाएं बाजार से महंगे रेट पर खरीदनी पड़ती हैं। मरीज जिला अस्पताल में मुफ्त के इलाज के लिए आते हैं
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एलर्जी तक की दवा नहीं मिली
शादीपुर की इसराना ने बताया कि उसके शरीर पर चकते होने के कारण उनमें खारिश रहती है। इदवा लेने के लिए सोमवार को मुकंद लाल जिला सिविल अस्पताल में आई थी। पर्ची बनवाने और फिर डॉक्टर से चेकअप में काफी समय लग गया। इसके बाद दवा के लिए लाइन में लगी तो सारी दवा नहीं मिली। अस्पताल से एलर्जी की दवाई भी नहीं मिलती तो यहां आने का क्या फायदा।
दवा मिलने में काफी समय लगा
नाहरपुर गांव की हसीना ने बताया कि उसकी पुत्रवधू की डिलीवरी हुई थी। वह कई दिन से अस्पताल में भर्ती है। आज उसकी छुट्टी होनी थी। काफी देर तक एंबुलेंस के लिए फोन करते रहे लेकिन किसी ने फोन ही नहीं उठाया। इसके बाद दवाई लेने के लिए काफी देर तक अस्पताल में लाइन में लगी रही। पौने घंटे बाद उसे लाइन में लगने के बाद दवा मिली।
बाहर से खरीदनी पड़ती है दवा
लवानी गांव की राजकुमारी ने बताया कि उसकी दोती के दिल में डॉक्टर ने छेद बता रखा है। डॉक्टर ने कहा था कि नियमित दवा खाने से बच्ची ठीक हो जाएगी। वह अस्पताल में उसकी दवा लेने आती है। अस्पताल में सारी दवाइयां नहीं मिलती। आज उसे आधी दवाई बाजार से खरीदने को बोल दिया गया। वह पहले ही गरीब परिवार से है। ऐसे में इतनी महंगी दवाएं बाहर से कैसे खरीदेगी।
व्यवस्था में सुधार किया जाए
खेड़ा ब्राह्मण गांव की रीना ने बताया कि वह सुबह ही अस्पताल में दवाई लेने आ गई थी। डॉक्टर ने कुछ टेस्ट भी पर्ची पर लिखे थे। टेस्ट तो समय पर हो गए लेकिन दवा नहीं मिली। वहां इतनी लंबी लाइन थी कि खड़ा होना भी मुश्किल था। इसलिए बिना दवा के ही लौट गई। उनका कहना है कि चेकअप के लिए पर्ची बनवाने से लेकर दवा लेने में बहुत ज्यादा समय लगता है।
दवाइयां मंगवाते रहते हैं : दिव्या मंगला
जिला नागरिक अस्पताल की पीएमओ डॉ. दिव्या मंगला ने बताया कि अस्पताल में जो दवाइयां खत्म होती हैं, उन्हें मंगवाते रहते हैं। प्रयास यही रहता है कि सभी मरीजों को अस्पताल से ही सारी दवाइयां मिले। उन्हें एक भी दवा बाहर से न खरीदनी पड़े। कभी कभार दवाएं आने में देरी हो जाती है।
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यमुनानगर। मरीजों को मुकंद लाल जिला सिविल अस्पताल में रोजमर्रा की दवाइयां भी नहीं मिल रही। मरीज बाजार से महंगे दाम पर दवाइयां खरीदने को मजबूर हैं। सामान्य से लेकर गंभीर बीमारियों की दवाओं का अस्पताल में टोटा है। मरीजों का ज्यादातर समय लाइनों में ही बीत जाता है। कभी ओपीडी की पर्ची के लिए लंबी लाइन में लगना पड़ता है तो कभी टेस्ट की रिपोर्ट लेने के लिए।
जब से मुकंद लाल जिला सिविल अस्पताल का नया भवन 200 बेड का हुआ है, तबसे मरीजों की संख्या दो से ढाई गुना तक बढ़ गई हैं। वहीं अस्पताल में मरीजों को दवाइयों के लिए भटकना पड़ रहा है। कोई किस्मत वाला ही मरीज होगा जिसे लंबी लाइन में लगने के बाद काउंटर से सारी दवाइयां मिल जाए।
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कई बार तो ऐसा होता है कि चेकअप के बाद डॉक्टर ने पांच दवाइयां लिखी हों, लेकिन उन्हें मिलती केवल एक या दो दवा ही हैं। बाकी दवाएं बाजार से महंगे रेट पर खरीदनी पड़ती हैं। मरीज जिला अस्पताल में मुफ्त के इलाज के लिए आते हैं
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एलर्जी तक की दवा नहीं मिली
शादीपुर की इसराना ने बताया कि उसके शरीर पर चकते होने के कारण उनमें खारिश रहती है। इदवा लेने के लिए सोमवार को मुकंद लाल जिला सिविल अस्पताल में आई थी। पर्ची बनवाने और फिर डॉक्टर से चेकअप में काफी समय लग गया। इसके बाद दवा के लिए लाइन में लगी तो सारी दवा नहीं मिली। अस्पताल से एलर्जी की दवाई भी नहीं मिलती तो यहां आने का क्या फायदा।
दवा मिलने में काफी समय लगा
नाहरपुर गांव की हसीना ने बताया कि उसकी पुत्रवधू की डिलीवरी हुई थी। वह कई दिन से अस्पताल में भर्ती है। आज उसकी छुट्टी होनी थी। काफी देर तक एंबुलेंस के लिए फोन करते रहे लेकिन किसी ने फोन ही नहीं उठाया। इसके बाद दवाई लेने के लिए काफी देर तक अस्पताल में लाइन में लगी रही। पौने घंटे बाद उसे लाइन में लगने के बाद दवा मिली।
बाहर से खरीदनी पड़ती है दवा
लवानी गांव की राजकुमारी ने बताया कि उसकी दोती के दिल में डॉक्टर ने छेद बता रखा है। डॉक्टर ने कहा था कि नियमित दवा खाने से बच्ची ठीक हो जाएगी। वह अस्पताल में उसकी दवा लेने आती है। अस्पताल में सारी दवाइयां नहीं मिलती। आज उसे आधी दवाई बाजार से खरीदने को बोल दिया गया। वह पहले ही गरीब परिवार से है। ऐसे में इतनी महंगी दवाएं बाहर से कैसे खरीदेगी।
व्यवस्था में सुधार किया जाए
खेड़ा ब्राह्मण गांव की रीना ने बताया कि वह सुबह ही अस्पताल में दवाई लेने आ गई थी। डॉक्टर ने कुछ टेस्ट भी पर्ची पर लिखे थे। टेस्ट तो समय पर हो गए लेकिन दवा नहीं मिली। वहां इतनी लंबी लाइन थी कि खड़ा होना भी मुश्किल था। इसलिए बिना दवा के ही लौट गई। उनका कहना है कि चेकअप के लिए पर्ची बनवाने से लेकर दवा लेने में बहुत ज्यादा समय लगता है।
दवाइयां मंगवाते रहते हैं : दिव्या मंगला
जिला नागरिक अस्पताल की पीएमओ डॉ. दिव्या मंगला ने बताया कि अस्पताल में जो दवाइयां खत्म होती हैं, उन्हें मंगवाते रहते हैं। प्रयास यही रहता है कि सभी मरीजों को अस्पताल से ही सारी दवाइयां मिले। उन्हें एक भी दवा बाहर से न खरीदनी पड़े। कभी कभार दवाएं आने में देरी हो जाती है।