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श्री रेणुकाजी बस सेवा शुरू होने से यात्रियों को मिल रहा लाभ
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यमुनानगर। एक फरवरी को श्री रेणुकाजी के लिए यमुनानगर बस अड्डे से बस सेवा शुरू की गई थी। इस सेवा के शुरू होने के बाद प्रतिदिन 50 यात्रियों के सफर से रोडवेज को यात्रियों की संख्या में और इजाफा होने की उम्मीद बढ़ी है। इससे यमुनानगर रोडवेज डिपो की रिसीट(आमदनी) भी बढ़ रही है।
डिपो के महाप्रबंधक के अनुसार अगर यात्रियों की संख्या में इजाफा हुआ तो दूसरी बस चलाने के बारे में भी विचार किया जा सकता है। लेकिन फिलहाल एक बस सेवा चलती रहेगी। बता दें एक फरवरी को डीसी पार्थ गुप्ता ने बस अड्डे से इस बस सेवा को हरी झंडी देकर रवाना किया था। रेणुकाजी के लिए यह बस सर्विस पहली बार चलाई गई है। यह बस सेवा यमुनानगर से जाकर धनौरा रात को रूकती है। अगले दिन वहां से बिलासपुर, कपालमोचन, साढौरा, कालाआम्ब, नाहन से होते हुए रेणुकाजी पहुंच रही।
बाक्स
गिरिपार क्षेत्र का पहला पड़ाव श्रीरेणुकाजी
हिमाचल प्रदेश में सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र का पहला पड़ाव है श्रीरेणुकाजी। भगवान परशुराम की जन्मभूमि श्रीरेणुकाजी उत्तर भारत का प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन स्थल है। यहीं पर श्रीरेणुकाजी झील हिमाचल प्रदेश की सबसे बड़ी प्राकृतिक झील है। यह झील लगभग तीन किमी. में फैली है। इसी झील के किनारे मां श्री रेणुकाजी व भगवान परशुराम के भव्य मंदिर हैं। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब तथा हरियाणा के लोगों की इसमें अटूट श्रद्धा है।
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वर्जन
श्री रेणुकाजी के लिए चलाई गई बस सर्विस से यात्रियों को काफी लाभ मिल रहा है। यात्रा के दौरान धीरे-धीरे यात्रियों की संख्या बढ़ रही है। रूट प्लान के अनुसार बस को ठहराव दिया जा रहा है।
-बालकराम, महाप्रबंधक, रोडवेज।
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डिपो के महाप्रबंधक के अनुसार अगर यात्रियों की संख्या में इजाफा हुआ तो दूसरी बस चलाने के बारे में भी विचार किया जा सकता है। लेकिन फिलहाल एक बस सेवा चलती रहेगी। बता दें एक फरवरी को डीसी पार्थ गुप्ता ने बस अड्डे से इस बस सेवा को हरी झंडी देकर रवाना किया था। रेणुकाजी के लिए यह बस सर्विस पहली बार चलाई गई है। यह बस सेवा यमुनानगर से जाकर धनौरा रात को रूकती है। अगले दिन वहां से बिलासपुर, कपालमोचन, साढौरा, कालाआम्ब, नाहन से होते हुए रेणुकाजी पहुंच रही।
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गिरिपार क्षेत्र का पहला पड़ाव श्रीरेणुकाजी
हिमाचल प्रदेश में सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र का पहला पड़ाव है श्रीरेणुकाजी। भगवान परशुराम की जन्मभूमि श्रीरेणुकाजी उत्तर भारत का प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन स्थल है। यहीं पर श्रीरेणुकाजी झील हिमाचल प्रदेश की सबसे बड़ी प्राकृतिक झील है। यह झील लगभग तीन किमी. में फैली है। इसी झील के किनारे मां श्री रेणुकाजी व भगवान परशुराम के भव्य मंदिर हैं। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब तथा हरियाणा के लोगों की इसमें अटूट श्रद्धा है।
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वर्जन
श्री रेणुकाजी के लिए चलाई गई बस सर्विस से यात्रियों को काफी लाभ मिल रहा है। यात्रा के दौरान धीरे-धीरे यात्रियों की संख्या बढ़ रही है। रूट प्लान के अनुसार बस को ठहराव दिया जा रहा है।
-बालकराम, महाप्रबंधक, रोडवेज।