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संसद में भी गूंजा सरस्वती नदी का मुद्दा

Tue, 15 Oct 2013 12:20 AM IST
यमुनानगर।
यमुनानगर। Updated Tue, 15 Oct 2013 12:20 AM IST
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Parliament also coined the issue of river Saraswati
सरस्वती नदी पर देश की संसद में भी चर्चा हो चुकी है। राज्यसभा में भी इसके बारे में प्रश्न किया जा चुका है। यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल में सरकार ने इसके अस्तित्व को स्वीकार किया और इस पर रिसर्च की बात कबूली।
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भाजपा नेता प्रकाश जावेडकर ने राज्यसभा में 3 दिसंबर 2009 को प्रश्नकाल के दौरान जल संसाधन मंत्री से सरस्वती नदी केे बारे में प्रश्न पूछा कि जमीन के नीचे मौजूद सरस्वती नदी के पानी के स्रोतों को खोजने के लिए क्या किया जा रहा है? जल संसाधन मंत्री विन्सेंट एच पाला ने जवाब दिया कि इस पर कोई मिशन नहीं शुरू किया गया है। हालांकि उस समय उन्होंने स्वीकार किया कि सरस्वती नदी मिथक नहीं है और भू-वैज्ञानिकों के अध्ययन से साबित हुआ है कि सरस्वती नदी कभी इस धरती पर बहती थी।
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इसके बाद लोकसभा में भी सरस्वती नदी का मुद्दा उठाया गया। राजस्थान से कांग्रेस सांसद हरीश चौधरी ने 22 मार्च 2013 को तेल एवं प्राकृतिक गैस मंत्री से प्रश्न (संख्या 4316) किया कि क्या ऑयल एंड नेचुरल गैस कारपोरेशन ने राजस्थान में जमीन के नीचे पानी को खोजने के लिए प्रोजेक्ट सरस्वती लांच किया था। यदि हां, तो इस प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया जाए। तेल एवं प्राकृतिक गैस मंत्री पी लक्ष्मी ने जवाब दिया कि ऑयल एंड नेचुरल गैस कारपोरेशन ने ओएनजीसी प्रोजेक्ट सरस्वती के नाम से प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसके तहत जमीन के नीचे गहराई में मौजूद सरस्वती के जल का पता लगाया जा रहा है।
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जैसलमेर से 6 किलोमीटर दूर एक वेल की खुदाई भी की जा चुकी है। मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि सरस्वती प्रोजेक्ट के तहत राजस्थान, हरियाणा और गुजरात के बीच वेल की खुदाई के लिए एमओयू पर भी हस्ताक्षर हुए हैं। सांसद हरीश चौधरी पहले भी एक बार सरस्वती नदी के बारे में संसद में प्रश्न कर चुके हैं। सरस्वती नदी शोध संस्थान के संस्थापक दर्शन लाल जैन ने बताया कि यूपीए सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में सरस्वती नदी के अस्तित्व को मानने से इंकार कर दिया था, लेकिन अपने दूसरे कार्यकाल में सरकार ने माना कि सरस्वती नदी इस धरातल पर थी।
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