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Yamuna Nagar News: आरटीई में दाखिला नहीं देने पर अभिभावकों ने किया प्रदर्शन
Sat, 02 Aug 2025 12:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sat, 02 Aug 2025 12:19 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत बच्चों को दाखिला न देने के विरोध में अभिभावकों ने भाई कन्हैया साहिब चौक के समीप स्थित निजी स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया। अभिभावकों ने बारिश में करीब दो घंटे धरना देकर स्कूल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। आरोप है कि स्कूल प्रबंधन स्कूल को अल्पसंख्यक संस्थान बताकर बच्चों को दाखिला देने से मना कर रहा है।
अभिभावक अंकुश बक्शी, अंकुश कुमार, दिनेश, अनिल, अंजलि, सुनीता ने बताया कि उनके बच्चों को आरटीई के तहत स्कूल अलॉट हुआ है, लेकिन प्रबंधन स्कूल को अल्पसंख्यक संस्थान बताकर दाखिला नहीं दे रहा है। वहीं इसे लेकर 27 जुलाई को जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी की ओर से पत्र जारी कर स्कूल को दाखिला देने के आदेश दिए हैं।
इसके बाद भी प्रबंधन बच्चों को दाखिला नहीं दे रहा है। दो महीने से उनके बच्चे घर पर बैठे हैं और उन्हें बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही है। बच्चों के भविष्य को लेकर उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा है। प्रबंधन समिति प्रधान डॉ. वरयाम सिंह को फोन किया गया तो उन्होंने इस बारे में बात करने से मना कर दिया।
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वहीं, प्रबंधन के अल्पसंख्यक संस्थान के दावों पर प्रश्न उठता है कि पोर्टल पर उन्होंने अपने स्कूल की खाली सीटों का ब्योरा किसी आधार पर दिया था। शहर के इस निजी स्कूल में आरटीई के तहत 40 बच्चों को सीट अलाॅट हुई थी।
स्कूल प्रबंधन बच्चों को दाखिला देने से मना कर रहा है। वे दो महीने से स्कूल के चक्कर लगा रहे हैं, उनके बच्चे घर पर बैठे हैं।
अल्पसंख्यक संस्थान बता स्कूल पीछे हटा : अंकुश बक्शी ने बताया कि 21 जून को आरटीई के तहत शॉर्टलिस्ट बच्चों की सूची पोर्टल पर जारी कर दी थी। जिसके बाद वे बच्चे का दाखिला करवाने पहुंचे तो प्रबंधन ने स्कूल को अल्पसंख्यक संस्थान बताया। प्रबंधन ने कहा कि यह नियम उन पर लागू नहीं होता है। इसी तरह दिनेश ने बताया कि दो जुलाई फार्म जमा करवाने के लिए वह स्कूल पहुंचे तो उन्हें गुमराह किया गया। इस दौरान स्टाफ ने उन्हें एक सप्ताह चक्कर लगवाए और नौ जुलाई को दाखिला न होने की बात बोल दी।
सुनीता ने बताया कि आरटीई के तहत 40 बच्चों के दाखिले होने हैं। पहले इसकी अंतिम तिथि 11 जुलाई थी। बाद में विभाग ने इसे बढ़ाकर 21 जुलाई कर दिया था। उन्हें लगा था कि इस पर कार्रवाई होगी, लेकिन अधिकारियों ने कोई कदम नहीं उठाया।
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जगाधरी। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत बच्चों को दाखिला न देने के विरोध में अभिभावकों ने भाई कन्हैया साहिब चौक के समीप स्थित निजी स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया। अभिभावकों ने बारिश में करीब दो घंटे धरना देकर स्कूल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। आरोप है कि स्कूल प्रबंधन स्कूल को अल्पसंख्यक संस्थान बताकर बच्चों को दाखिला देने से मना कर रहा है।
अभिभावक अंकुश बक्शी, अंकुश कुमार, दिनेश, अनिल, अंजलि, सुनीता ने बताया कि उनके बच्चों को आरटीई के तहत स्कूल अलॉट हुआ है, लेकिन प्रबंधन स्कूल को अल्पसंख्यक संस्थान बताकर दाखिला नहीं दे रहा है। वहीं इसे लेकर 27 जुलाई को जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी की ओर से पत्र जारी कर स्कूल को दाखिला देने के आदेश दिए हैं।
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इसके बाद भी प्रबंधन बच्चों को दाखिला नहीं दे रहा है। दो महीने से उनके बच्चे घर पर बैठे हैं और उन्हें बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही है। बच्चों के भविष्य को लेकर उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा है। प्रबंधन समिति प्रधान डॉ. वरयाम सिंह को फोन किया गया तो उन्होंने इस बारे में बात करने से मना कर दिया।
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वहीं, प्रबंधन के अल्पसंख्यक संस्थान के दावों पर प्रश्न उठता है कि पोर्टल पर उन्होंने अपने स्कूल की खाली सीटों का ब्योरा किसी आधार पर दिया था। शहर के इस निजी स्कूल में आरटीई के तहत 40 बच्चों को सीट अलाॅट हुई थी।
स्कूल प्रबंधन बच्चों को दाखिला देने से मना कर रहा है। वे दो महीने से स्कूल के चक्कर लगा रहे हैं, उनके बच्चे घर पर बैठे हैं।
अल्पसंख्यक संस्थान बता स्कूल पीछे हटा : अंकुश बक्शी ने बताया कि 21 जून को आरटीई के तहत शॉर्टलिस्ट बच्चों की सूची पोर्टल पर जारी कर दी थी। जिसके बाद वे बच्चे का दाखिला करवाने पहुंचे तो प्रबंधन ने स्कूल को अल्पसंख्यक संस्थान बताया। प्रबंधन ने कहा कि यह नियम उन पर लागू नहीं होता है। इसी तरह दिनेश ने बताया कि दो जुलाई फार्म जमा करवाने के लिए वह स्कूल पहुंचे तो उन्हें गुमराह किया गया। इस दौरान स्टाफ ने उन्हें एक सप्ताह चक्कर लगवाए और नौ जुलाई को दाखिला न होने की बात बोल दी।
सुनीता ने बताया कि आरटीई के तहत 40 बच्चों के दाखिले होने हैं। पहले इसकी अंतिम तिथि 11 जुलाई थी। बाद में विभाग ने इसे बढ़ाकर 21 जुलाई कर दिया था। उन्हें लगा था कि इस पर कार्रवाई होगी, लेकिन अधिकारियों ने कोई कदम नहीं उठाया।