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धरी रह गईं चुनाव की तैयारियां, प्रत्याशियों के चेहरे उतरे
ब्यूरो/अमर उजाला यमुनानगर
Updated Wed, 23 Sep 2015 12:09 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा में पंचायत चुनाव पर फिलहाल रोक लगा दी है। अब सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई तक चुनाव प्रक्रिया रुकी रहेगी। सुनवाई सात अक्तूबर को है। कोर्ट ने कहा कि सुनवाई के बाद नया नोटिफिकेशन जारी करके फिर से प्रक्रिया शुरू की जाए। मालूम हो कि प्रदेश सरकार द्वारा पंचायत चुनाव में शैक्षिक योग्यता समेत अन्य शर्तें निर्धारित के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है।
पंचायत चुनाव पर रोक लग जाने से उन भावी उम्मीदवारों के चेहरे उतर गए हैं, जिन्होंने चुनाव लड़ने की पूरी तैयार कर ली थी। अधिकतर प्रत्याशी तो पहले चरण में नामांकन करने के बाद चुनाव प्रचार में भी जुट गए थे। प्रदेश सरकार द्वारा चुनाव लड़ने के लिए शैक्षिक योग्यता निर्धारित करने के बाद कई युवाओं ने आनन-फानन में चुनाव मैदान में उतरने का मन बना लिया था। इन युवाओं ने चुनाव प्रचार से लेकर चुनाव जीतने पर समाज सेवा की रूपरेखा भी बना ली थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इन्हें काफी मायूसी हुई है।
जगाधरी खंड के तिगरा ग्राम पंचायत महिला के लिए आरक्षित है। यहां से सरपंच पद की उम्मीदवार ओमलता बारहवीं पास हैं। नामांकन के बाद ओमलता और उसके पति नरेंद्र राणा चुनाव प्रचार में भी जुट गए थे। ओमलता का कहना है कि सरकार ने चुनाव के लिए शैक्षिक योग्यता निर्धारित कर ठीक किया था। इससे पढ़े-लिखे जन प्रतिनिधियों को समाजसेवा का मौका मिलता।
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पंचायत चुनाव पर भले ही फिलहाल प्रश्न चिह्न लग गया है, लेकिन बिजली निगम के लिए अब तक यह सुखद ही रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा बिजली निगम के बकायादारों पर चुनाव लड़ने से लगाई गई रोक के चलते बड़ी संख्या में चुनाव लड़ने के इच्छुक व्यक्तियों ने अपने बकाया बिलों का भुगतान कर दिया है। सोमवार तक बिजली निगम के पास एक करोड़ 71 लाख रुपये जमा हो चुके थे। हालांकि पंचायत चुनाव को लेकर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद बकायादारों ने अपने बिलों का भुगतान करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई।
पहले चरण के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद चुनाव लड़ने के इच्छुक व्यक्तियों ने अपने बकाया बिलों का भुगतान करने में काफी तेजी दिखाई लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक के बाद इस ओर लोगों का रुझान कम हो गया। पहले चरण में जगाधरी और छछरौली खंड में नामांकन भरे गए। इन खंडों में ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली निगम के करीब 18 करोड़ रुपये बकाया थे। 21 सितंबर तक इन खंडों में करीब एक करोड़ रुपये 71 लाख रुपये जमा हो चुके थे।
पंचायत चुनाव के लिए पहले चरण में जगाधरी और छछरौली खंड के लिए पर्चे दाखिल किए गए। शुरुआती तीन दिन में कम नामांकन हुए लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा शैक्षिक योग्यता की शर्त पर रोक लगाए जाने के बाद नामांकन के लिए होड़ लग गई। 18 सितंबर तक विभिन्न पदों के लिए 806 नामांकन हुए, वहीं अंतिम दिन तक सभी पदों के लिए 5573 पर्चे दाखिल किए गए। इनमें जिला परिषद के 18 वार्डों के लिए 73 महिलाओं सहित कुल 200 नामांकन हुए। जगाधरी व छछरौली खंड में पंचायत समिति के 52 पदों के लिए 317 पर्चे भरे गए। वहीं जगाधरी खंड की 67 ग्राम पंचायतों में सरपंच पद के लिए कुल 1435 नामांकन हुए। जबकि छछरौली खंड के 122 सरपंच पदों के लिए 901 नामांकन हुए। इसी प्रकार जगाधरी खंड में 499 पंचों के लिए 574 व छछरौली खंड में 1008 पंचों के लिए 2146 नामांकन दाखिल किए गए।
पंचायत चुनाव के दूसरे चरण में मंगलवार को बिलासपुर खंड में पंचायत समिति, सरपंच व पंच पद के लिए नामांकन प्रक्रिया दोपहर करीब पौने तीन बजे तक जारी रही। सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई से पहले और बाद में किसी भी उम्मीदवार ने नामांकन नहीं किया। बिलासपुर खंड के सरपंचों, पंचों और ब्लाक समिति सदस्यों के नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया मंगलवार को तय समय पर शुरू हुई। सुबह जैसे की बीडीपीओ कार्यालय खुला तो ब्लाक समिति के पदों के उम्मीदवार नामांकन पत्र लेने के लिए कार्यालय पहुंच गए। घाड़ क्षेत्र के कुछ गांवों के उम्मीदवार तो समय से पहले ही सुबह नौ बजे बीडीपीओ कार्यालय पहुंच गए थे। कुछ देर तक कार्यालय में चहल-पल बनी रही। उम्मीदवारों की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर भी टिकी हुई थी। जैसे ही लोगों को पंचायत चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई का पता चला तो कार्यालय से भीड़ छंटनी शुरू हो गई।
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पंचायत चुनाव पर रोक लग जाने से उन भावी उम्मीदवारों के चेहरे उतर गए हैं, जिन्होंने चुनाव लड़ने की पूरी तैयार कर ली थी। अधिकतर प्रत्याशी तो पहले चरण में नामांकन करने के बाद चुनाव प्रचार में भी जुट गए थे। प्रदेश सरकार द्वारा चुनाव लड़ने के लिए शैक्षिक योग्यता निर्धारित करने के बाद कई युवाओं ने आनन-फानन में चुनाव मैदान में उतरने का मन बना लिया था। इन युवाओं ने चुनाव प्रचार से लेकर चुनाव जीतने पर समाज सेवा की रूपरेखा भी बना ली थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इन्हें काफी मायूसी हुई है।
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जगाधरी खंड के तिगरा ग्राम पंचायत महिला के लिए आरक्षित है। यहां से सरपंच पद की उम्मीदवार ओमलता बारहवीं पास हैं। नामांकन के बाद ओमलता और उसके पति नरेंद्र राणा चुनाव प्रचार में भी जुट गए थे। ओमलता का कहना है कि सरकार ने चुनाव के लिए शैक्षिक योग्यता निर्धारित कर ठीक किया था। इससे पढ़े-लिखे जन प्रतिनिधियों को समाजसेवा का मौका मिलता।
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पंचायत चुनाव पर भले ही फिलहाल प्रश्न चिह्न लग गया है, लेकिन बिजली निगम के लिए अब तक यह सुखद ही रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा बिजली निगम के बकायादारों पर चुनाव लड़ने से लगाई गई रोक के चलते बड़ी संख्या में चुनाव लड़ने के इच्छुक व्यक्तियों ने अपने बकाया बिलों का भुगतान कर दिया है। सोमवार तक बिजली निगम के पास एक करोड़ 71 लाख रुपये जमा हो चुके थे। हालांकि पंचायत चुनाव को लेकर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद बकायादारों ने अपने बिलों का भुगतान करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई।
पहले चरण के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद चुनाव लड़ने के इच्छुक व्यक्तियों ने अपने बकाया बिलों का भुगतान करने में काफी तेजी दिखाई लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक के बाद इस ओर लोगों का रुझान कम हो गया। पहले चरण में जगाधरी और छछरौली खंड में नामांकन भरे गए। इन खंडों में ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली निगम के करीब 18 करोड़ रुपये बकाया थे। 21 सितंबर तक इन खंडों में करीब एक करोड़ रुपये 71 लाख रुपये जमा हो चुके थे।
पंचायत चुनाव के लिए पहले चरण में जगाधरी और छछरौली खंड के लिए पर्चे दाखिल किए गए। शुरुआती तीन दिन में कम नामांकन हुए लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा शैक्षिक योग्यता की शर्त पर रोक लगाए जाने के बाद नामांकन के लिए होड़ लग गई। 18 सितंबर तक विभिन्न पदों के लिए 806 नामांकन हुए, वहीं अंतिम दिन तक सभी पदों के लिए 5573 पर्चे दाखिल किए गए। इनमें जिला परिषद के 18 वार्डों के लिए 73 महिलाओं सहित कुल 200 नामांकन हुए। जगाधरी व छछरौली खंड में पंचायत समिति के 52 पदों के लिए 317 पर्चे भरे गए। वहीं जगाधरी खंड की 67 ग्राम पंचायतों में सरपंच पद के लिए कुल 1435 नामांकन हुए। जबकि छछरौली खंड के 122 सरपंच पदों के लिए 901 नामांकन हुए। इसी प्रकार जगाधरी खंड में 499 पंचों के लिए 574 व छछरौली खंड में 1008 पंचों के लिए 2146 नामांकन दाखिल किए गए।
पंचायत चुनाव के दूसरे चरण में मंगलवार को बिलासपुर खंड में पंचायत समिति, सरपंच व पंच पद के लिए नामांकन प्रक्रिया दोपहर करीब पौने तीन बजे तक जारी रही। सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई से पहले और बाद में किसी भी उम्मीदवार ने नामांकन नहीं किया। बिलासपुर खंड के सरपंचों, पंचों और ब्लाक समिति सदस्यों के नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया मंगलवार को तय समय पर शुरू हुई। सुबह जैसे की बीडीपीओ कार्यालय खुला तो ब्लाक समिति के पदों के उम्मीदवार नामांकन पत्र लेने के लिए कार्यालय पहुंच गए। घाड़ क्षेत्र के कुछ गांवों के उम्मीदवार तो समय से पहले ही सुबह नौ बजे बीडीपीओ कार्यालय पहुंच गए थे। कुछ देर तक कार्यालय में चहल-पल बनी रही। उम्मीदवारों की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर भी टिकी हुई थी। जैसे ही लोगों को पंचायत चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई का पता चला तो कार्यालय से भीड़ छंटनी शुरू हो गई।