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Yamuna Nagar News: शहर की मंडी में उठान तेज, ग्रामीण क्षेत्रों में धीमी रफ्तार
Wed, 21 Oct 2026 12:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Wed, 21 Oct 2026 12:46 AM IST
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जगाधरी अनाज मंडी में धान की बोरियों को लेकर जाते प्रवासी मजदूर। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले की अनाज मंडियों में धान की आवक और खरीद का सिलसिला जारी है। उठान की धीमी रफ्तार किसानों और आढ़तियों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। शहर की मंडी में उठान की स्थिति ग्रामीण क्षेत्र की मंडियों के मुकाबले बेहतर है, जबकि ग्रामीण मंडियों में धान का उठान धीमा होने से जगह की कमी हो रही है।
किसान मंडियों में उपलब्ध जगह के अनुसार धान की ढेरियां लगाकर किसी तरह अपनी फसल सुखाने में जुटे हैं। उठान में तेजी नहीं आने से मंडियों में व्यवस्था बनाए रखना चुनौती बन रहा है। जिले की सभी 13 अनाज मंडियों में अब तक 2,25,301 मीट्रिक टन धान की आवक हो चुकी है। इसमें से 1,96,647 मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, खरीदे गए धान में से करीब 1,30,091 मीट्रिक टन का उठान हुआ है। यह कुल खरीद का लगभग 66.15 प्रतिशत है। यानी खरीदे गए धान का करीब एक तिहाई हिस्सा अभी भी मंडियों में पड़ा हुआ है। इससे मंडियों में जगह की उपलब्धता प्रभावित हो रही है।
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ग्रामीण क्षेत्र की मंडियों में धान का उठान धीमा होने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मंडियों में धान की ढेरियां लगी होने के कारण नई फसल को रखने और सुखाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही है। किसान उपलब्ध स्थान में ही अपनी फसल को व्यवस्थित करने का प्रयास कर रहे हैं।
उठान में तेजी आने से मंडियों में जगह खाली होगी और किसानों को अपनी उपज रखने में राहत मिलेगी। जगाधरी मार्केट कमेटी के सचिव मोहित बेरी का कहना है उठान में तेजी लाई गई है। जल्द ही शेष धान का उठान हो जाएगा।
सरस्वतीनगर मंडी में 54 प्रतिशत उठान
ग्रामीण क्षेत्र में सरस्वतीनगर अनाज मंडी में सबसे अधिक धान की आवक होती है। यहां अब तक 52,542 मीट्रिक टन धान की खरीद हो चुकी है। इसमें से 25,646 मीट्रिक टन धान का उठान किया गया है। इस तरह मंडी में उठान करीब 49 प्रतिशत बनता है। बड़ी मात्रा में धान मंडी में पड़ा होने से जगह की समस्या बनी हुई है।
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यमुनानगर। जिले की अनाज मंडियों में धान की आवक और खरीद का सिलसिला जारी है। उठान की धीमी रफ्तार किसानों और आढ़तियों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। शहर की मंडी में उठान की स्थिति ग्रामीण क्षेत्र की मंडियों के मुकाबले बेहतर है, जबकि ग्रामीण मंडियों में धान का उठान धीमा होने से जगह की कमी हो रही है।
किसान मंडियों में उपलब्ध जगह के अनुसार धान की ढेरियां लगाकर किसी तरह अपनी फसल सुखाने में जुटे हैं। उठान में तेजी नहीं आने से मंडियों में व्यवस्था बनाए रखना चुनौती बन रहा है। जिले की सभी 13 अनाज मंडियों में अब तक 2,25,301 मीट्रिक टन धान की आवक हो चुकी है। इसमें से 1,96,647 मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है।
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उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, खरीदे गए धान में से करीब 1,30,091 मीट्रिक टन का उठान हुआ है। यह कुल खरीद का लगभग 66.15 प्रतिशत है। यानी खरीदे गए धान का करीब एक तिहाई हिस्सा अभी भी मंडियों में पड़ा हुआ है। इससे मंडियों में जगह की उपलब्धता प्रभावित हो रही है।
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ग्रामीण क्षेत्र की मंडियों में धान का उठान धीमा होने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मंडियों में धान की ढेरियां लगी होने के कारण नई फसल को रखने और सुखाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही है। किसान उपलब्ध स्थान में ही अपनी फसल को व्यवस्थित करने का प्रयास कर रहे हैं।
उठान में तेजी आने से मंडियों में जगह खाली होगी और किसानों को अपनी उपज रखने में राहत मिलेगी। जगाधरी मार्केट कमेटी के सचिव मोहित बेरी का कहना है उठान में तेजी लाई गई है। जल्द ही शेष धान का उठान हो जाएगा।
सरस्वतीनगर मंडी में 54 प्रतिशत उठान
ग्रामीण क्षेत्र में सरस्वतीनगर अनाज मंडी में सबसे अधिक धान की आवक होती है। यहां अब तक 52,542 मीट्रिक टन धान की खरीद हो चुकी है। इसमें से 25,646 मीट्रिक टन धान का उठान किया गया है। इस तरह मंडी में उठान करीब 49 प्रतिशत बनता है। बड़ी मात्रा में धान मंडी में पड़ा होने से जगह की समस्या बनी हुई है।

जगाधरी अनाज मंडी में धान की बोरियों को लेकर जाते प्रवासी मजदूर। संवाद