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Yamuna Nagar News: शहीद स्मारक के लिए एक एकड़ भूमि की दरकार
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देश के लिए सरहद पर मर मिटने वाले शहीदों के लिए शासन-प्रशासन एक एकड़ जमीन उपलब्ध नहीं करा सका। यही कारण है कि शहीद स्मारक के लिए जिला सैनिक बोर्ड के तमाम प्रयास नाकाफी साबित हुए।
कारगिल युद्ध के 24 साल बाद भी शहीद स्मारक न बन पाने का जिला सैनिक बोर्ड को मलाल है। बोर्ड की तरफ से शहीद स्मारक बनाने के लिए कई बार प्रयास किए गए। सैनिक बोर्ड के अधिकारियों की तरफ से कई बार जिला प्रशासन व मंत्रियों के समक्ष स्मारक के लिए एक एकड़ भूमि की मांग उठाई गई। फिर भी किसी ने शहीद स्मारक बनाने के लिए एक कदम भी आगे नहीं बढ़ाया। जिला सैनिक बोर्ड के कल्याण एवं व्यवस्थापक रणजीत सिंह ने बताया कि जिले में शहीद स्मारक बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए करीब एक एकड़ जगह चाहिए। इसके लिए डीसी और नगर निगम के आयुक्त से मिलेंगे ताकि जिले में शहीद स्मारक बनाया जा सके।
वर्ष 1999 में हुए कारगिल युद्ध में जिले से एकमात्र सैनिक शहर निवासी नवीन कुमार मेहता दुश्मनों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे। उन्होंने 22 जुलाई 1999 को शहादत दी थी। मॉडल टाउन में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के साथ राजकीय स्कूल का नाम शहीद नवीन वैद्य के नाम रखा गया है। स्कूल में लोगों ने अपने स्तर पर नवीन मेहता की एक प्रतिमा भी स्थापित की है, लेकिन दो दशक बाद भी शहीद के परिवार को गैस एजेंसी और पेट्रोल पंप नसीब नहीं हो सका।
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शहीद की पत्नी डोली मेहता का कहना है कि पति की शहादत पर सरकार ने 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी थी। इस राशि से उन्होंने घर बनवाया और बच्चों को पढ़ाया। बेटी की शादी भी कर दी, लेकिन इसके बाद किसी ने उनकी सुध नहीं ली। उन्होंने गैस एजेंसी व पेट्रोल पंप के लिए दर्जनों बार सरकार को अर्जी दी पर हर बार मांग खारिज कर दी गई। उन्होंने बताया कि पति नवीन कुमार ने अपने फौजी पिता अमरनाथ मेहता से प्रेरित होकर देश सेवा की राह चुनी थी। मुकंद लाल स्कूल से 10वीं तक पढ़ाई कर मात्र 18 वर्ष की आयु में वे 1982 में सेना में हवलदार के पद पर भर्ती हुए। इसके बाद कारगिल युद्ध में 22 जुलाई 1999 को दुश्मनों से लोहा लेते हुए देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी पत्नी डोली मेहता के पास तब छह साल की बेटी चीना और तीन साल का बेटा राघव था।
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कारगिल युद्ध के 24 साल बाद भी शहीद स्मारक न बन पाने का जिला सैनिक बोर्ड को मलाल है। बोर्ड की तरफ से शहीद स्मारक बनाने के लिए कई बार प्रयास किए गए। सैनिक बोर्ड के अधिकारियों की तरफ से कई बार जिला प्रशासन व मंत्रियों के समक्ष स्मारक के लिए एक एकड़ भूमि की मांग उठाई गई। फिर भी किसी ने शहीद स्मारक बनाने के लिए एक कदम भी आगे नहीं बढ़ाया। जिला सैनिक बोर्ड के कल्याण एवं व्यवस्थापक रणजीत सिंह ने बताया कि जिले में शहीद स्मारक बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए करीब एक एकड़ जगह चाहिए। इसके लिए डीसी और नगर निगम के आयुक्त से मिलेंगे ताकि जिले में शहीद स्मारक बनाया जा सके।
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वर्ष 1999 में हुए कारगिल युद्ध में जिले से एकमात्र सैनिक शहर निवासी नवीन कुमार मेहता दुश्मनों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे। उन्होंने 22 जुलाई 1999 को शहादत दी थी। मॉडल टाउन में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के साथ राजकीय स्कूल का नाम शहीद नवीन वैद्य के नाम रखा गया है। स्कूल में लोगों ने अपने स्तर पर नवीन मेहता की एक प्रतिमा भी स्थापित की है, लेकिन दो दशक बाद भी शहीद के परिवार को गैस एजेंसी और पेट्रोल पंप नसीब नहीं हो सका।
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शहीद की पत्नी डोली मेहता का कहना है कि पति की शहादत पर सरकार ने 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी थी। इस राशि से उन्होंने घर बनवाया और बच्चों को पढ़ाया। बेटी की शादी भी कर दी, लेकिन इसके बाद किसी ने उनकी सुध नहीं ली। उन्होंने गैस एजेंसी व पेट्रोल पंप के लिए दर्जनों बार सरकार को अर्जी दी पर हर बार मांग खारिज कर दी गई। उन्होंने बताया कि पति नवीन कुमार ने अपने फौजी पिता अमरनाथ मेहता से प्रेरित होकर देश सेवा की राह चुनी थी। मुकंद लाल स्कूल से 10वीं तक पढ़ाई कर मात्र 18 वर्ष की आयु में वे 1982 में सेना में हवलदार के पद पर भर्ती हुए। इसके बाद कारगिल युद्ध में 22 जुलाई 1999 को दुश्मनों से लोहा लेते हुए देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी पत्नी डोली मेहता के पास तब छह साल की बेटी चीना और तीन साल का बेटा राघव था।