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Yamuna Nagar News: अफसर सालभर करते अनदेखी, मानसून में याद आते नाले
Fri, 22 May 2026 01:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 22 May 2026 01:24 AM IST
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ट्विनसिटी में कूड़े से जाम बड़ा नाला। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। ट्विन सिटी जगाधरी और यमुनानगर में नालों की आज जो स्थिति है, उसकी वजह सालभर इनकी तरफ ध्यान नहीं देना है। नगर निगम की ओर से केवल मानसून सीजन के दौरान ही नालों की सफाई करवाई जाती है। इसके बाद पूरा साल कोई नालों की सफाई तो दूर, कोई इनके बारे में बात तक नहीं करता। अनदेखी के चलते नाले कूड़े व सिल्ट से अट जाते हैं।
मानसून से पहले जब इन नालों की सफाई का नंबर आता है तो यह ठीक से साफ नहीं हो पाते। हर साल औसतन डेढ़ करोड़ रुपये नालों की सफाई पर नगर निगम की ओर से खर्च किए जाते हैं। इस साल बड़े व छोटे नालों की सफाईपर करीब पांच करोड़ रुपये खर्च होने हैं। जगाधरी बर्तन बाजार, मटका चौक, भागीरथ काॅलोनी, मुखर्जी पार्क, प्रोफेसर काॅलोनी, प्रोफेसर कालोनी एक्सटेंशन-टू, लाजपत नगर, शिव नगर, तिलक नगर, जसवंत काॅलोनी, पटेल नगर सहित अन्य कई कालोनियां बारिश के दिनों में जलमग्न हो जाती हैं।
शहर के निचले क्षेत्रों में हर साल मानसून के दौरान जलभराव की समस्या सामने आती है। इससे आमजन, दुकानदारों और वाहन चालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सड़कों पर पानी जमा होने से यातायात भी बाधित होता है। दो माह बाद मानसून सीजन आने वाला है और नाले गंदगी व कूड़े से अटे पड़े हैं। नालों पर अवैध कब्जे अलग से हैं।
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यमुनानगर में प्रोफेसर कालोनी, स्वामी विवेकानंद स्कूल के पास का क्षेत्र, एफसीआइ गोदाम के पास का क्षेत्र, यमुनानगर बस स्टैंड के पास का क्षेत्र सहित अन्य जगहों पर दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बरसात में नाले ओवरफ्लो होने की वजह से लोगों के घरों में गंदा पानी घुस जाता है।
पूर्व पार्षद निर्मल चौहान व नीरज राणा का कहना है कि अधिकतर नाले गाद व गंदगी से अटे पड़े हैं। यदि स्थिति ऐसी ही रही तो मानसून सीजन में परेशानी बढ़ना तय है। नालों की नियमित रूप से सफाई की जानी चाहिए। नालों पर अवैध निर्माण होने के कारण नियमित रूप से सफाई नहीं हो पाती और पानी की निकासी रुक जाती है। नाले पहले से ही संकरे हैं और इन पर निर्माण हो जाने के बाद पानी की निकासी नहीं हो पाती और न ही सफाई होती है।
नाला गैंग खत्म, अब एजेंसी से सफाई
कुछ साल पहले तक नालों की सफाई का कार्य नाला गैंग से करवाया जाता था। इसके लिए निगम की ओर से लगभग 70 कर्मचारियों की पांच नाला गैंग बनाई जाती थी। प्रत्येक गैंग में 14 कर्मचारी होते थे, जो शहर के सभी नालों से गंदगी निकालते थे। ताकि मानसून के समय शहर में जलभराव की दिक्कत का लोगों को सामना न करना पड़े। परंतु अब सफाई का कार्य केवल एजेंसी के माध्यम से ही होता है। नगर निगम एजेंसी को ठेका देता है जो हर साल नालों की सफाई करती है। परंतु एजेंसी का कार्य संतोषजनक नहीं होता जिससे जलभराव का समाधान न के बराबर ही होता है।
नालों की सफाई का कार्य शुरू करवा दिया गया है। कूड़े व सिल्ट को नालों से निकाल कर साफ किया जाएगा। इस बार सालभर नालों की सफाई का कार्य करवाया जाएगा ताकि मानसून में दिक्कत न आए। - सुमन बहमनी, मेयर यमुनानगर-जगाधरी नगर निगम।
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यमुनानगर। ट्विन सिटी जगाधरी और यमुनानगर में नालों की आज जो स्थिति है, उसकी वजह सालभर इनकी तरफ ध्यान नहीं देना है। नगर निगम की ओर से केवल मानसून सीजन के दौरान ही नालों की सफाई करवाई जाती है। इसके बाद पूरा साल कोई नालों की सफाई तो दूर, कोई इनके बारे में बात तक नहीं करता। अनदेखी के चलते नाले कूड़े व सिल्ट से अट जाते हैं।
मानसून से पहले जब इन नालों की सफाई का नंबर आता है तो यह ठीक से साफ नहीं हो पाते। हर साल औसतन डेढ़ करोड़ रुपये नालों की सफाई पर नगर निगम की ओर से खर्च किए जाते हैं। इस साल बड़े व छोटे नालों की सफाईपर करीब पांच करोड़ रुपये खर्च होने हैं। जगाधरी बर्तन बाजार, मटका चौक, भागीरथ काॅलोनी, मुखर्जी पार्क, प्रोफेसर काॅलोनी, प्रोफेसर कालोनी एक्सटेंशन-टू, लाजपत नगर, शिव नगर, तिलक नगर, जसवंत काॅलोनी, पटेल नगर सहित अन्य कई कालोनियां बारिश के दिनों में जलमग्न हो जाती हैं।
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शहर के निचले क्षेत्रों में हर साल मानसून के दौरान जलभराव की समस्या सामने आती है। इससे आमजन, दुकानदारों और वाहन चालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सड़कों पर पानी जमा होने से यातायात भी बाधित होता है। दो माह बाद मानसून सीजन आने वाला है और नाले गंदगी व कूड़े से अटे पड़े हैं। नालों पर अवैध कब्जे अलग से हैं।
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यमुनानगर में प्रोफेसर कालोनी, स्वामी विवेकानंद स्कूल के पास का क्षेत्र, एफसीआइ गोदाम के पास का क्षेत्र, यमुनानगर बस स्टैंड के पास का क्षेत्र सहित अन्य जगहों पर दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बरसात में नाले ओवरफ्लो होने की वजह से लोगों के घरों में गंदा पानी घुस जाता है।
पूर्व पार्षद निर्मल चौहान व नीरज राणा का कहना है कि अधिकतर नाले गाद व गंदगी से अटे पड़े हैं। यदि स्थिति ऐसी ही रही तो मानसून सीजन में परेशानी बढ़ना तय है। नालों की नियमित रूप से सफाई की जानी चाहिए। नालों पर अवैध निर्माण होने के कारण नियमित रूप से सफाई नहीं हो पाती और पानी की निकासी रुक जाती है। नाले पहले से ही संकरे हैं और इन पर निर्माण हो जाने के बाद पानी की निकासी नहीं हो पाती और न ही सफाई होती है।
नाला गैंग खत्म, अब एजेंसी से सफाई
कुछ साल पहले तक नालों की सफाई का कार्य नाला गैंग से करवाया जाता था। इसके लिए निगम की ओर से लगभग 70 कर्मचारियों की पांच नाला गैंग बनाई जाती थी। प्रत्येक गैंग में 14 कर्मचारी होते थे, जो शहर के सभी नालों से गंदगी निकालते थे। ताकि मानसून के समय शहर में जलभराव की दिक्कत का लोगों को सामना न करना पड़े। परंतु अब सफाई का कार्य केवल एजेंसी के माध्यम से ही होता है। नगर निगम एजेंसी को ठेका देता है जो हर साल नालों की सफाई करती है। परंतु एजेंसी का कार्य संतोषजनक नहीं होता जिससे जलभराव का समाधान न के बराबर ही होता है।
नालों की सफाई का कार्य शुरू करवा दिया गया है। कूड़े व सिल्ट को नालों से निकाल कर साफ किया जाएगा। इस बार सालभर नालों की सफाई का कार्य करवाया जाएगा ताकि मानसून में दिक्कत न आए। - सुमन बहमनी, मेयर यमुनानगर-जगाधरी नगर निगम।

ट्विनसिटी में कूड़े से जाम बड़ा नाला। संवाद