{"_id":"64e2672d86b855511406b91b","slug":"no-one-filled-the-names-of-world-class-companies-in-the-tender-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1020-4299-2023-08-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Yamuna Nagar News: टेंडर में नाम विश्वस्तरीय कंपनियों के, भरा ही किसी ने नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Yamuna Nagar News: टेंडर में नाम विश्वस्तरीय कंपनियों के, भरा ही किसी ने नहीं
विज्ञापन
शहर में स्मार्ट ट्रैफिक लाइट लगाने के लिए नगर निगम की ओर से कॉल किया टेंडर खोल दिया गया है। इस टेंडर में बीएचईएल सहित अन्य वर्ल्ड क्लास कंपनियों के सिग्नल की बात कही गई, लेकिन हैरत की बात है कि इनमें से किसी कंपनी ने टेंडर ही नहीं भरा। इस टेंडर के लिए सिर्फ दो कंपनियों ने ही बीड दी है। वहीं अधिकारियों की इसमें की गई डिमांड भी मनमर्जी की है। जो कि कोई बड़ी कंपनी पूरी नहीं कर सकती है।
भले ही शहर के चौराहों पर स्मार्ट ट्रैफिक लाइट नगर निगम की ओर से लगाई जा रही है, लेकिन इसका इस्तेमाल यातायात पुलिस की ओर से किया जाना है। नगर निगम की प्रक्रिया शुरू से ही सवाल उठ रहे थे। वहीं अब टेंडर खुलने के बाद कई तरह सवाल और सामने हैं। नगर निगम ने यातायात पुलिस की सिफारिश व मांग ही दरकिनार नहीं की, बल्कि प्रदेश के गृहमंत्री के जिले में लगने एंड्रायड ट्रैफिक सिग्नल को नकार दिया है। नगर निगम के अधिकारी नई ही तकनीक इजाद कर बैठे हैं, जो वास्तविकता में नहीं है। यही कारण है कि यातायात पुलिस इस टेंडर को लेकर काफी खफा है, चूंकि टेंडर में पुलिस के अनुसार कोई डिमांड व तकनीक नहीं रखी गई है।
प्रदेश के कई जिलों में स्मार्ट एंड्रायड ट्रैफिक सिग्नल सिस्टम लगा हुआ है। यही नहीं गृहमंत्री के जिले अंबाला के मुख्य और अधिकांश चौक पर एंड्रायड ट्रैफिक लाइट सिस्टम काम कर रहा है। इसमें किसी प्रकार के इंटरनेट, डाटा, कंट्रोल रूम, वेब कंट्रोलर की जरूरत नहीं है। लेकिन यहां नगर निगम की ओर से डिमांडेड सिग्नल सिस्टम किसी जुगाड़ से कम नहीं है। टेंडर में बीएचईएल, सिग्नेस सहित अन्य बड़ी कंपनियों के प्रोजेक्ट की बात कही गई है। जबकि इनमें से किसी कंपनी ने टेंडर नहीं भरा। वहीं यह कंपनियां अंतरराष्ट्रीय एवं उच्च गुणवत्ता का सामान बनाती है और निगम की ओर से डिमांड प्रोजेक्ट कोई कंपनी नहीं बनाती है।
विज्ञापन
पुलिस इसे बोगस प्रोजेक्ट और जुगाड़ बता रही है। जो लगने के बाद सालों इसे ढोना पड़ेगा। टेंडर की विवरण पत्र (स्पेसिफिकेशन शीट) में वेब सिस्टम की बात की है। जिस पर काम करने के लिए वेब कंट्रोलर चाहिए। वहीं लाइव सिग्नल ऑपरेट सिस्टम है। इसके लिए कंट्रोल रूम बनाना होगा। यदि यातायात पुलिस इसके लिए कंट्रोल रूम बनाती है तो डेढ़ से दो करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इसके लिए जीपीएस ट्रैकर, सर्वर, वेब कंट्रोल, सुपर स्पीड इंटरनेट, बिजली, यूपीएस, जनरेटर सहित अन्य कई तरह के उपकरण चाहिए। इसके अलावा इसमें लाइव डिसप्ले की बात जबकि यह बिना कैमरे के नहीं होगा। टेंडर सिर्फ सिग्नल लाइट का है कैमरे हैं ही नहीं। बता दें कि यह टेंडर नगर निगम जेई प्रतीक ने तैयार किया गया है। जबकि इसमें स्पेसीफिकेशन पर एक्सईएन, एसई बड़े अधिकारियों की ओर से दी जाती है। परंतु यहां पर जेई के सहारे ही यह टेंडर छोड़ दिया गया है। इस बारे जेई प्रतीक ने कहा कि उन्हाेंने यह टेंडर तैयार किया है। टेंडर कॉल करना और खोलना अधिकारियों के हाथ में है। फिलहाल इसके लिए दो कंपनियों ने बीड दी है।
बढ़ते यातायात दबाव को नियंत्रित व व्यवस्थित करने के लिए नई तकनीक की जरूरत है। प्रदेश के कई जिलों में एंड्रायड व एप बेस्ड ट्रैफिक सिग्नल सिस्टम लगाया गया है। पुलिस ने इसका डेमो लिया था और वही तकनीक शहर के चौराहों पर लगाने की मांग की गई है। टेंडर निगम का काम है। टेंडर खुलने और देने के समय इसका पता चल पाएगा।
रामपाल, प्रभारी थाना यातायात पुलिस।
नगर निगम शहर के चौराहाें पर स्मार्ट एंड्रायड ट्रैफिक सिग्नल ही लगाए जाएंगे। इसके लिए टेंडर काॅल किया गया है। इसके बाद बीड भरने वाली कंपनियों से डेमो लिया जाएगा। पहले लिए डेमो के बारे मुझे जानकारी नहीं है। पुलिस ने डेमो लिया है इस बारे में मैं नहीं जानता। नियमों के अनुसार ही टेंडर दिया जाएगा।
विकास धीमान, एक्सईएन, नगर निगम।
विज्ञापन
भले ही शहर के चौराहों पर स्मार्ट ट्रैफिक लाइट नगर निगम की ओर से लगाई जा रही है, लेकिन इसका इस्तेमाल यातायात पुलिस की ओर से किया जाना है। नगर निगम की प्रक्रिया शुरू से ही सवाल उठ रहे थे। वहीं अब टेंडर खुलने के बाद कई तरह सवाल और सामने हैं। नगर निगम ने यातायात पुलिस की सिफारिश व मांग ही दरकिनार नहीं की, बल्कि प्रदेश के गृहमंत्री के जिले में लगने एंड्रायड ट्रैफिक सिग्नल को नकार दिया है। नगर निगम के अधिकारी नई ही तकनीक इजाद कर बैठे हैं, जो वास्तविकता में नहीं है। यही कारण है कि यातायात पुलिस इस टेंडर को लेकर काफी खफा है, चूंकि टेंडर में पुलिस के अनुसार कोई डिमांड व तकनीक नहीं रखी गई है।
विज्ञापन
प्रदेश के कई जिलों में स्मार्ट एंड्रायड ट्रैफिक सिग्नल सिस्टम लगा हुआ है। यही नहीं गृहमंत्री के जिले अंबाला के मुख्य और अधिकांश चौक पर एंड्रायड ट्रैफिक लाइट सिस्टम काम कर रहा है। इसमें किसी प्रकार के इंटरनेट, डाटा, कंट्रोल रूम, वेब कंट्रोलर की जरूरत नहीं है। लेकिन यहां नगर निगम की ओर से डिमांडेड सिग्नल सिस्टम किसी जुगाड़ से कम नहीं है। टेंडर में बीएचईएल, सिग्नेस सहित अन्य बड़ी कंपनियों के प्रोजेक्ट की बात कही गई है। जबकि इनमें से किसी कंपनी ने टेंडर नहीं भरा। वहीं यह कंपनियां अंतरराष्ट्रीय एवं उच्च गुणवत्ता का सामान बनाती है और निगम की ओर से डिमांड प्रोजेक्ट कोई कंपनी नहीं बनाती है।
विज्ञापन
पुलिस इसे बोगस प्रोजेक्ट और जुगाड़ बता रही है। जो लगने के बाद सालों इसे ढोना पड़ेगा। टेंडर की विवरण पत्र (स्पेसिफिकेशन शीट) में वेब सिस्टम की बात की है। जिस पर काम करने के लिए वेब कंट्रोलर चाहिए। वहीं लाइव सिग्नल ऑपरेट सिस्टम है। इसके लिए कंट्रोल रूम बनाना होगा। यदि यातायात पुलिस इसके लिए कंट्रोल रूम बनाती है तो डेढ़ से दो करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इसके लिए जीपीएस ट्रैकर, सर्वर, वेब कंट्रोल, सुपर स्पीड इंटरनेट, बिजली, यूपीएस, जनरेटर सहित अन्य कई तरह के उपकरण चाहिए। इसके अलावा इसमें लाइव डिसप्ले की बात जबकि यह बिना कैमरे के नहीं होगा। टेंडर सिर्फ सिग्नल लाइट का है कैमरे हैं ही नहीं। बता दें कि यह टेंडर नगर निगम जेई प्रतीक ने तैयार किया गया है। जबकि इसमें स्पेसीफिकेशन पर एक्सईएन, एसई बड़े अधिकारियों की ओर से दी जाती है। परंतु यहां पर जेई के सहारे ही यह टेंडर छोड़ दिया गया है। इस बारे जेई प्रतीक ने कहा कि उन्हाेंने यह टेंडर तैयार किया है। टेंडर कॉल करना और खोलना अधिकारियों के हाथ में है। फिलहाल इसके लिए दो कंपनियों ने बीड दी है।
बढ़ते यातायात दबाव को नियंत्रित व व्यवस्थित करने के लिए नई तकनीक की जरूरत है। प्रदेश के कई जिलों में एंड्रायड व एप बेस्ड ट्रैफिक सिग्नल सिस्टम लगाया गया है। पुलिस ने इसका डेमो लिया था और वही तकनीक शहर के चौराहों पर लगाने की मांग की गई है। टेंडर निगम का काम है। टेंडर खुलने और देने के समय इसका पता चल पाएगा।
रामपाल, प्रभारी थाना यातायात पुलिस।
नगर निगम शहर के चौराहाें पर स्मार्ट एंड्रायड ट्रैफिक सिग्नल ही लगाए जाएंगे। इसके लिए टेंडर काॅल किया गया है। इसके बाद बीड भरने वाली कंपनियों से डेमो लिया जाएगा। पहले लिए डेमो के बारे मुझे जानकारी नहीं है। पुलिस ने डेमो लिया है इस बारे में मैं नहीं जानता। नियमों के अनुसार ही टेंडर दिया जाएगा।
विकास धीमान, एक्सईएन, नगर निगम।