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नहीं कटे सूखे पेड़, लेटर रास्ते में गुम
यमुनानगर
Updated Fri, 10 Jan 2014 03:46 PM IST
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वीना नगर कैंप के पार्क में खड़े सूखे पेड़ों को बेचने के एस्टिमेट के लिए
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नगर निगम अधिकारियों की ओर से लिखा पत्र एक माह बाद भी वन विभाग के
कार्यालय में नहीं पहुंच पाया है।
इससे सूखे पड़े अभी भी पार्क में खड़े हैं। इसके साथ ही निगम के अधिकारियों का कहना है कि सूखे पेड़ों को कटवाने से पहले इनका एस्टिमेट लगने के लिए वन विभाग को पत्र लिखा हुआ है जैसे ही उनकी ओर से जवाब आएगा पेड़ कटवा दिया जाएगा।
लेकिन वन विभाग के रिकार्ड में निगम की ओर से कैंप के पार्क में खड़े सूखे पेड़ों से संबंधित कोई पत्र ही नहीं भेजा गया है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार निगम की ओर से उनके पास सूखे पेड़ों से संबंधित पिछले दिनों दो लेटर आए हैं, एक लेटर 27 नवंबर को आया था।
इसमें आदर्श नगर कैंप में एक पीपल का सूखा पेड़ खड़ा है। इसका एस्टिमेट बनाकर भेज दिया गया है, वहीं एक पत्र चार दिसंबर को महाराणा प्रताप पार्क में खड़े दो पेड़ों को काटने का आया है। इसकी रिपोर्ट 12 दिसंबर को वन विभाग की ओर से निगम कार्यालय में भेज दी गई है, लेकिन कैंप पार्क में खड़े सूखे दोनों पेड़ों का एस्टिमेट के लिए कोई पत्र वन विभाग के कार्यालय में नहीं पहुंच पाया है।
इससे निगम अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खडे़ हो रहे हैं। इन सूखे पेड़ों को कटने के निर्देश डीसी ने अपने दौरे के दौरान निगम अधिकारियों को दिए थे, उसके बाद भी यह हाल है। इन सूखे पेड़ों के पार्क में खड़े होने से लोगों को कभी भी हादसा होने का डर रहता है, वहीं नगर निगम अधिकारियों का अभी भी कहना है कि पत्र लिखा हुआ है।
वन विभाग भेजता है रेट लगाकर
नगर निगम की जमीन पर खड़ा कोई भी सूखा पेड़ अगर निगम को कटवाना है तो इससे पहले वन विभाग की ओर से उसका रेट लगावाने के लिए लेटर लिखा जाता है। लेटर के बाद वन विभाग के कर्मचारी मौके पर जाकर पेड़ की कीमत कितनी है इसका एस्टिमेट लगाते हैं। कीमत फाइनल करने के बाद निगम की ओर से पेड़ खुद कटवाकर ठेकेदार बेच दिया जाता है या फिर उसे बिना कटवाए ही ठेकेदार को बेच दिया जाता है। जिन तीन पेड़ों की कीमत लगाने के लिए वन विभाग को निगम ने पत्र लिखा था, वन विभाग की ओर से उनकी कीमत लगाकर निगम कार्यालय में पत्र भेज दिया गया है। लेकिन इसमें कैंप पार्क में खड़े पेड़ों का पत्र नहीं है।
हमें भी नहीं काटने देते
क्षेत्रवासी दयाल सिंह, मनीष कुमार, चमनलाल, कुंदन लाल, धीरज ग्रोवर और बिंद्र बन का कहना है कि पार्क में दो बड़े-बड़े सूखे पेड़ खडे़ हैं, जिन्हें कटवाने के लिए कई बार लोगों की ओर से आग्रह भी किया गया।
लेकिन कुछ नहीं हुआ। लोग खुद इन पेड़ों को कटवाने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसकी अनुमति भी नहीं दी जा रही है। ये सूखे पेड़ करीब पांच साल ऐसे ही खड़े हैं। अब तो इनकी जड़ें भी उखड़ चुके हैं, जिससे कभी भी ये पेड़ गिर सकते हैं। उनका कहना है कि इन पेड़ों के कारण लोग पार्क में घूमने से भी दरकिनार करने लगे हैं।
इससे सूखे पड़े अभी भी पार्क में खड़े हैं। इसके साथ ही निगम के अधिकारियों का कहना है कि सूखे पेड़ों को कटवाने से पहले इनका एस्टिमेट लगने के लिए वन विभाग को पत्र लिखा हुआ है जैसे ही उनकी ओर से जवाब आएगा पेड़ कटवा दिया जाएगा।
लेकिन वन विभाग के रिकार्ड में निगम की ओर से कैंप के पार्क में खड़े सूखे पेड़ों से संबंधित कोई पत्र ही नहीं भेजा गया है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार निगम की ओर से उनके पास सूखे पेड़ों से संबंधित पिछले दिनों दो लेटर आए हैं, एक लेटर 27 नवंबर को आया था।
इसमें आदर्श नगर कैंप में एक पीपल का सूखा पेड़ खड़ा है। इसका एस्टिमेट बनाकर भेज दिया गया है, वहीं एक पत्र चार दिसंबर को महाराणा प्रताप पार्क में खड़े दो पेड़ों को काटने का आया है। इसकी रिपोर्ट 12 दिसंबर को वन विभाग की ओर से निगम कार्यालय में भेज दी गई है, लेकिन कैंप पार्क में खड़े सूखे दोनों पेड़ों का एस्टिमेट के लिए कोई पत्र वन विभाग के कार्यालय में नहीं पहुंच पाया है।
इससे निगम अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खडे़ हो रहे हैं। इन सूखे पेड़ों को कटने के निर्देश डीसी ने अपने दौरे के दौरान निगम अधिकारियों को दिए थे, उसके बाद भी यह हाल है। इन सूखे पेड़ों के पार्क में खड़े होने से लोगों को कभी भी हादसा होने का डर रहता है, वहीं नगर निगम अधिकारियों का अभी भी कहना है कि पत्र लिखा हुआ है।
वन विभाग भेजता है रेट लगाकर
नगर निगम की जमीन पर खड़ा कोई भी सूखा पेड़ अगर निगम को कटवाना है तो इससे पहले वन विभाग की ओर से उसका रेट लगावाने के लिए लेटर लिखा जाता है। लेटर के बाद वन विभाग के कर्मचारी मौके पर जाकर पेड़ की कीमत कितनी है इसका एस्टिमेट लगाते हैं। कीमत फाइनल करने के बाद निगम की ओर से पेड़ खुद कटवाकर ठेकेदार बेच दिया जाता है या फिर उसे बिना कटवाए ही ठेकेदार को बेच दिया जाता है। जिन तीन पेड़ों की कीमत लगाने के लिए वन विभाग को निगम ने पत्र लिखा था, वन विभाग की ओर से उनकी कीमत लगाकर निगम कार्यालय में पत्र भेज दिया गया है। लेकिन इसमें कैंप पार्क में खड़े पेड़ों का पत्र नहीं है।
हमें भी नहीं काटने देते
क्षेत्रवासी दयाल सिंह, मनीष कुमार, चमनलाल, कुंदन लाल, धीरज ग्रोवर और बिंद्र बन का कहना है कि पार्क में दो बड़े-बड़े सूखे पेड़ खडे़ हैं, जिन्हें कटवाने के लिए कई बार लोगों की ओर से आग्रह भी किया गया।
लेकिन कुछ नहीं हुआ। लोग खुद इन पेड़ों को कटवाने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसकी अनुमति भी नहीं दी जा रही है। ये सूखे पेड़ करीब पांच साल ऐसे ही खड़े हैं। अब तो इनकी जड़ें भी उखड़ चुके हैं, जिससे कभी भी ये पेड़ गिर सकते हैं। उनका कहना है कि इन पेड़ों के कारण लोग पार्क में घूमने से भी दरकिनार करने लगे हैं।