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Yamuna Nagar News: यमुना से पहचान और स्वच्छता पर नहीं ध्यान
Sun, 19 May 2024 05:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 19 May 2024 05:10 AM IST
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राहुल शर्मा
यमुनानगर। यमुनानगर की पहचान होने के बावजूद यमुना नदीकी स्वच्छता पर काम नहीं दिख पाया है। हालांकि इसके लिए कई प्रयास हुए और योजनाएं बनी, पर धरातल पर हालात नहीं बदल पाए हैं। आलम ये है कि जहां यमुना में गिरते नाले डायवर्ट करने पर अफसरों ने लाखों रुपये खर्च किए, वहां भी यमुना का पानी साफ नहीं है।
अभी भी कई नालों का गंदा पानी यमुना को दूषित कर रहा है। ये हाल तब हैं, जब यमुना के घाटों पर सालभर पर्व व मेलों पर लोग स्नान व पूजा अर्चना करने पहुंचते हैं, जो दूषित जल से आचमन व पूजा अर्चना करने को मजबूर हैं। अब लोकसभा चुनाव के बीच भी यह मुद्दा भी लोगों की जुबान पर हैं।
लोगों आरोप है कि यमुना में गिरते कई नाले डायवर्ट नहीं किए और जो डायवर्ट किए उनकी सुध नहीं ली गई, जहां यमुना में गंदा पानी मिल रहा है। उधर, नगर निगमायुक्त आयुष सिन्हा का कहना है कि संबंधित अफसरों को इस संबंध में दिशा निर्देश दिए जाएंगे।
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पश्चिमी यमुना नहर में शांति कॉलोनी व आजादनगर समीप दो नालों को नगर निगम अफसरों ने पटरी के रास्ते पाइपलाइन डाल जिंदल पार्क से लगते पंपिंग स्टेशन से जोड़ दिया। ये काम जून-2019 में करीब 77 लाख में अलॉट हुआ था। दो नालों पर इतनी बड़ी रकम खर्च करने के बाद अफसरों ने दोबारा सुध नहीं ली।
शांति कॉलोनी समीप नाला डायवर्ट होने के बाद भी उसका गंदा पानी पश्चिमी यमुना नहर में मिल रहा है। ऐसे ही जमुना गली सहित कई जगह नालों का गंदा पानी नहर में जा रहा है। इसमें यमुना बचाओ सेवा समिति व पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संगठनों के पदाधिकारी संबंधित विभागों के अफसरों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। साथ ही लोकसभा चुनाव देख यमुना की स्वच्छता के मुद्दे पर काम किए जाने की मांग कर रहे हैं। संवाद
नहर के दोनों ओर लगें पौधे
हरियाणा एनवायरनमेंटल सोसायटी के प्रधान एवं ग्रीन मैन एसएल सैनी ने कहा कि यमुना नहर के किनारे पहले काफी संख्या में सफेदे व अन्य पेड़ थे, जो काट दिए गए। जबकि यह यमुना के तेज बहाव से कटाव रोकते व पर्यावरण संतुलन बनाए रखते थे। अभी भी नहर के दोनों ओर पौधे लगाकर उन्हें संरक्षण देना चाहिए।
अधिकारी मामले में नहीं गंभीर
पर्यावरण मित्र फाउंडेशन के प्रधान चिराग सिंघल ने कहा कि एनजीटी से आदेश के बाद भी यमुना नहर में नालों का गंदा पानी मिल रहा है। इसमें संबंधित विभागों के अफसर जिम्मेदार है, जो मामले को गंभीरता से लेकर काम नहीं कर रहे। जिन्होंने कई नाले डायवर्ट नहीं किए और जो डायवर्ट किए उनकी सुध नहीं ली गई।
यमुना की स्वच्छता पर ध्यान जरूरी
सोसायटी ऑफ एनवायरनमेंट मैनेजमेंट एंड बायोरिसर्च के पैटर्न डॉ. केआर भारद्वाज ने कहा कि यमुना से यमुनानगर की पहचान है, इसलिए इसकी स्वच्छता पर ध्यान दिया जाना जरूरी है। इसमें खासकर शहर में यमुना नहर के दोनों ओर अधिक से अधिक पौधे लगाकर उन्हें संरक्षण दिया जाना चाहिए।
लगातार उठाई मांग, नहीं हुई पूरी
यमुना बचाओ सेवा समिति के अध्यक्ष महेंद मित्तल ने कहा कि समिति की ओर से प्रशासन से यमुना के जल को स्वच्छ रखने की मांग लगातार की गई, पर इसे पूरा नहीं किया गया। समिति ने अपने स्तर पर यमुना के तट व घाटों की सफाई की। इसके बाद भी प्रशासनिक स्तर पर यमुना के जल को दूषित होने से बचाने के प्रयास नहीं हो रहे हैं।
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यमुनानगर। यमुनानगर की पहचान होने के बावजूद यमुना नदीकी स्वच्छता पर काम नहीं दिख पाया है। हालांकि इसके लिए कई प्रयास हुए और योजनाएं बनी, पर धरातल पर हालात नहीं बदल पाए हैं। आलम ये है कि जहां यमुना में गिरते नाले डायवर्ट करने पर अफसरों ने लाखों रुपये खर्च किए, वहां भी यमुना का पानी साफ नहीं है।
अभी भी कई नालों का गंदा पानी यमुना को दूषित कर रहा है। ये हाल तब हैं, जब यमुना के घाटों पर सालभर पर्व व मेलों पर लोग स्नान व पूजा अर्चना करने पहुंचते हैं, जो दूषित जल से आचमन व पूजा अर्चना करने को मजबूर हैं। अब लोकसभा चुनाव के बीच भी यह मुद्दा भी लोगों की जुबान पर हैं।
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लोगों आरोप है कि यमुना में गिरते कई नाले डायवर्ट नहीं किए और जो डायवर्ट किए उनकी सुध नहीं ली गई, जहां यमुना में गंदा पानी मिल रहा है। उधर, नगर निगमायुक्त आयुष सिन्हा का कहना है कि संबंधित अफसरों को इस संबंध में दिशा निर्देश दिए जाएंगे।
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पश्चिमी यमुना नहर में शांति कॉलोनी व आजादनगर समीप दो नालों को नगर निगम अफसरों ने पटरी के रास्ते पाइपलाइन डाल जिंदल पार्क से लगते पंपिंग स्टेशन से जोड़ दिया। ये काम जून-2019 में करीब 77 लाख में अलॉट हुआ था। दो नालों पर इतनी बड़ी रकम खर्च करने के बाद अफसरों ने दोबारा सुध नहीं ली।
शांति कॉलोनी समीप नाला डायवर्ट होने के बाद भी उसका गंदा पानी पश्चिमी यमुना नहर में मिल रहा है। ऐसे ही जमुना गली सहित कई जगह नालों का गंदा पानी नहर में जा रहा है। इसमें यमुना बचाओ सेवा समिति व पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संगठनों के पदाधिकारी संबंधित विभागों के अफसरों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। साथ ही लोकसभा चुनाव देख यमुना की स्वच्छता के मुद्दे पर काम किए जाने की मांग कर रहे हैं। संवाद
नहर के दोनों ओर लगें पौधे
हरियाणा एनवायरनमेंटल सोसायटी के प्रधान एवं ग्रीन मैन एसएल सैनी ने कहा कि यमुना नहर के किनारे पहले काफी संख्या में सफेदे व अन्य पेड़ थे, जो काट दिए गए। जबकि यह यमुना के तेज बहाव से कटाव रोकते व पर्यावरण संतुलन बनाए रखते थे। अभी भी नहर के दोनों ओर पौधे लगाकर उन्हें संरक्षण देना चाहिए।
अधिकारी मामले में नहीं गंभीर
पर्यावरण मित्र फाउंडेशन के प्रधान चिराग सिंघल ने कहा कि एनजीटी से आदेश के बाद भी यमुना नहर में नालों का गंदा पानी मिल रहा है। इसमें संबंधित विभागों के अफसर जिम्मेदार है, जो मामले को गंभीरता से लेकर काम नहीं कर रहे। जिन्होंने कई नाले डायवर्ट नहीं किए और जो डायवर्ट किए उनकी सुध नहीं ली गई।
यमुना की स्वच्छता पर ध्यान जरूरी
सोसायटी ऑफ एनवायरनमेंट मैनेजमेंट एंड बायोरिसर्च के पैटर्न डॉ. केआर भारद्वाज ने कहा कि यमुना से यमुनानगर की पहचान है, इसलिए इसकी स्वच्छता पर ध्यान दिया जाना जरूरी है। इसमें खासकर शहर में यमुना नहर के दोनों ओर अधिक से अधिक पौधे लगाकर उन्हें संरक्षण दिया जाना चाहिए।
लगातार उठाई मांग, नहीं हुई पूरी
यमुना बचाओ सेवा समिति के अध्यक्ष महेंद मित्तल ने कहा कि समिति की ओर से प्रशासन से यमुना के जल को स्वच्छ रखने की मांग लगातार की गई, पर इसे पूरा नहीं किया गया। समिति ने अपने स्तर पर यमुना के तट व घाटों की सफाई की। इसके बाद भी प्रशासनिक स्तर पर यमुना के जल को दूषित होने से बचाने के प्रयास नहीं हो रहे हैं।