{"_id":"6a5d26f7919fe3df2909f128","slug":"neither-her-maternal-home-nor-her-in-laws-felt-right-counseling-changed-the-course-of-her-life-yamuna-nagar-news-c-246-1-sknl1023-159800-2026-07-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Yamuna Nagar News: मायका मंजूर था न ससुराल... काउंसलिंग ने बदला जीवन का रुख","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Yamuna Nagar News: मायका मंजूर था न ससुराल... काउंसलिंग ने बदला जीवन का रुख
Mon, 20 Jul 2026 01:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 20 Jul 2026 01:05 AM IST
विज्ञापन
वन स्टॉप सेंटर की इमारत। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। लगातार काउंसलिंग और पारिवारिक माहौल उपलब्ध कराने के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। पति की मौत के बाद चार वर्षों से मानसिक तनाव और पारिवारिक विवादों से जूझ रही 32 वर्षीय महिला आखिरकार अपने माता-पिता के साथ रहने के लिए तैयार हो गई।
महिला पहले अपने मायके और ससुराल दोनों जगह रहने से इन्कार कर रही थी। वन स्टॉप सेंटर में कई चरणों में हुई काउंसलिंग के बाद उसने अपना निर्णय बदल लिया। महिला एक पुलिसकर्मी की बेटी है। उसके पति का वर्ष 2022 में निधन हो गया था। पति की मौत के बाद वह अपने मायके में रहने लगी।
महिला का 10 वर्षीय बेटा पिछले चार वर्षों से अपने दादा-दादी के पास रह रहा है। इस दौरान महिला का अपने माता-पिता से विवाद बढ़ने लगा और स्थिति ऐसी हो गई कि उसने उनके साथ रहने से भी मना कर दिया। इतना ही नहीं, उसने अपने माता-पिता के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई। मामला पुलिस के संज्ञान में आने के बाद अधिकारियों के निर्देश पर महिला को वन स्टॉप सेंटर भेजा गया।
विज्ञापन
यहां विशेषज्ञों ने उसकी कई बार काउंसलिंग की और उसकी मानसिक व पारिवारिक स्थिति को समझते हुए उसे सामान्य जीवन की ओर लौटाने का प्रयास किया। वन स्टॉप सेंटर की कार्यकारी केंद्रीय प्रबंधक बिंदू शर्मा ने बताया कि महिला को सेंटर में पारिवारिक माहौल का अनुभव कराया गया।
इसके साथ ही उसे ऐसे कई मामलों की जानकारी दी गई, जिनमें पारिवारिक विवाद और मानसिक तनाव से गुजर रही महिलाओं ने काउंसलिंग के बाद अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया। लगातार संवाद और विश्वास कायम करने के प्रयासों के बाद महिला का नजरिया बदला और वह अपने माता-पिता के साथ जाने के लिए सहमत हो गई।
महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी मिक्षा रंगा ने बताया कि जब महिला सेंटर में आई थी, तब वह न तो मायके में रहना चाहती थी और न ही ससुराल जाने को तैयार थी। लगातार काउंसलिंग और भावनात्मक सहयोग के बाद उसका अपने परिवार के प्रति विश्वास फिर से बना।
उन्होंने कहा कि अब उसका अपने माता-पिता के साथ रहने के लिए तैयार होना विभाग और वन स्टॉप सेंटर की टीम के लिए बड़ी सफलता है। उन्होंने कहा कि वन स्टॉप सेंटर का उद्देश्य केवल संकटग्रस्त महिलाओं को अस्थायी आश्रय देना ही नहीं, बल्कि उन्हें भावनात्मक संबल देकर सामान्य और सम्मानजनक जीवन की ओर वापस लाना भी है।
विज्ञापन
यमुनानगर। लगातार काउंसलिंग और पारिवारिक माहौल उपलब्ध कराने के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। पति की मौत के बाद चार वर्षों से मानसिक तनाव और पारिवारिक विवादों से जूझ रही 32 वर्षीय महिला आखिरकार अपने माता-पिता के साथ रहने के लिए तैयार हो गई।
महिला पहले अपने मायके और ससुराल दोनों जगह रहने से इन्कार कर रही थी। वन स्टॉप सेंटर में कई चरणों में हुई काउंसलिंग के बाद उसने अपना निर्णय बदल लिया। महिला एक पुलिसकर्मी की बेटी है। उसके पति का वर्ष 2022 में निधन हो गया था। पति की मौत के बाद वह अपने मायके में रहने लगी।
विज्ञापन
महिला का 10 वर्षीय बेटा पिछले चार वर्षों से अपने दादा-दादी के पास रह रहा है। इस दौरान महिला का अपने माता-पिता से विवाद बढ़ने लगा और स्थिति ऐसी हो गई कि उसने उनके साथ रहने से भी मना कर दिया। इतना ही नहीं, उसने अपने माता-पिता के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई। मामला पुलिस के संज्ञान में आने के बाद अधिकारियों के निर्देश पर महिला को वन स्टॉप सेंटर भेजा गया।
विज्ञापन
यहां विशेषज्ञों ने उसकी कई बार काउंसलिंग की और उसकी मानसिक व पारिवारिक स्थिति को समझते हुए उसे सामान्य जीवन की ओर लौटाने का प्रयास किया। वन स्टॉप सेंटर की कार्यकारी केंद्रीय प्रबंधक बिंदू शर्मा ने बताया कि महिला को सेंटर में पारिवारिक माहौल का अनुभव कराया गया।
इसके साथ ही उसे ऐसे कई मामलों की जानकारी दी गई, जिनमें पारिवारिक विवाद और मानसिक तनाव से गुजर रही महिलाओं ने काउंसलिंग के बाद अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया। लगातार संवाद और विश्वास कायम करने के प्रयासों के बाद महिला का नजरिया बदला और वह अपने माता-पिता के साथ जाने के लिए सहमत हो गई।
महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी मिक्षा रंगा ने बताया कि जब महिला सेंटर में आई थी, तब वह न तो मायके में रहना चाहती थी और न ही ससुराल जाने को तैयार थी। लगातार काउंसलिंग और भावनात्मक सहयोग के बाद उसका अपने परिवार के प्रति विश्वास फिर से बना।
उन्होंने कहा कि अब उसका अपने माता-पिता के साथ रहने के लिए तैयार होना विभाग और वन स्टॉप सेंटर की टीम के लिए बड़ी सफलता है। उन्होंने कहा कि वन स्टॉप सेंटर का उद्देश्य केवल संकटग्रस्त महिलाओं को अस्थायी आश्रय देना ही नहीं, बल्कि उन्हें भावनात्मक संबल देकर सामान्य और सम्मानजनक जीवन की ओर वापस लाना भी है।