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Yamuna Nagar News: टीबी की बीमारी के उपचार में लापरवाही ले सकती है जान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 24 Mar 2023 12:42 AM IST
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Negligence in the treatment of TB disease can kill
टीबी यानि क्षय रोग एक संक्रामक रोग है। वर्तमान समय में कार्यशैली में बदलाव होने के कारण लोगों की इम्युनिटी कमजोर हो रही है जिससे ये बीमारी लोगों को तेजी से जकड़ रही है। ये बीमारी नियमित दवाई से ठीक हो जाती है, लेकिन इसमें लापरवाही जान पर भारी पड़ जाती है। इस साल जनवरी से अब तक जिले में टीबी के 598 नए मरीज मिल चुके हैं। ज्यादा से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है। जिससे टीबी के मरीजों की संख्या बढ़ रही हैं। वहीं पिछले वर्ष पूरे साल में 1360 मरीज मिले थे। सरकार भी इस बीमारी को खत्म करने के प्रयास में जुटी है। डॉक्टरों के मुताबिक वर्ष 2025 तक टीबी को देश से पूरी तरह से खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है। इसलिए ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग कराई जा रही है। क्योंकि जितने ज्यादा मरीज मिलेंगे उनका जल्दी उपचार शुरू करके टीबी को खत्म किया जा सकता है।
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सरकार की ओर से टीबी के मरीजों के उपचार के लिए कुछ योजनाएं भी शुरू की गई हैं। योजना के तहत टीबी के मरीजों को सरकार की तरफ से दवाई मुफ्त दी जाती है। इसके अलावा हर माह 500 रुपये पोषण के लिए दिए जाते हैं। यमुनानगर के विधायक घनश्याम दास अरोड़ा, सिविल सर्जन, डॉक्टरों व अन्य संस्थाओं ने टीबी के करीब 300 मरीजों को गोद लिया हुआ है। ये लोग टीबी के मरीजों को छह माह तक 500 रुपये हर माह बतौर पोषण के लिए देते हैं। टीबी की दवाई छह से नौ माह तक खानी पड़ती है। वर्ष 2020 में 2481 टीबी के मरीज मिले थे और 153 मौत हुई थी। इसके अलावा 2021 में करीब 2867 मरीज मिले थे और 168 लोगों की मौत टीबी से हुई थी।
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कुछ दिन पहले जिला जेल जगाधरी में टीबी का एक मरीज मिला था। इसके बाद उसके साथ रहने वाले अन्य बंदियों का इगरा टेस्ट कराया गया। ये टीबी से पहले किए जाने वाला प्री-टेस्ट होता है। इसमें टीबी के लक्षण पकड़ में आते हैं। इगरा टेस्ट में 50 प्रतिशत बंदियों में टीबी के लक्षण मिले। वहीं बैरक में टीबी का एक पॉजिटिव मरीज मिला। स्वास्थ्य विभाग ने जांच का दायरा बढ़ाया और 200 बंदियों का इगरा टेस्ट कराया। जिसमें 97 बंदियों में बीमारी के लक्षण मिले। इगरा टेस्ट में पॉजिटिव मिले मरीजों का एक्सरे कराया जाता है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने मेदांता अस्पताल से मोबाइल एक्सरे बस मंगवा कर जेल में 400 बंदियों की जांच कराई गई। यह बस तीन दिन तक जेल में रही। एक्सरे जांच में 30 बंदी टीबी के संदिग्ध मरीज मिले हैं। अब इनका सीबीनेट टेस्ट कराया जाएगा। उनके पॉजिटिव आने पर उनकी दवाई शुरू की जाएगी।
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स्वास्थ्य विभाग के एएसएमओ व टीबी मुक्त भारत अभियान के नोडल ऑफिसर डॉ. अनूप गोयल ने बताया कि छह से नौ माह तक रोजाना दवाई खाने से टीबी पूरी तरह से ठीक हो जाती है। दवा के साथ पौष्टिक आहार भी लेना जरूरी है। 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने के लिए ज्यादा से ज्यादा लोगों के टेस्ट किए जा रहे हैं। टीबी की दवा बिल्कुल मुफ्त है। यदि कोई जांच कराना चाहता है तो अपने नजदीक पीएचसी, सीएचसी या स्वास्थ्य केंद्र में बलगम का सैंपल देकर जांच करवा सकता है। वहीं जिला जेल जगाधरी में टीबी के दो मरीज मिले हैं। जिनमें लक्षण दिखे हैं उनके टेस्ट कराए जा रहे हैं।
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