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Yamuna Nagar News: नारद मोह का प्रसंग सुनाकर दी घमंड न करने की सीख

Wed, 18 Jun 2025 12:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Wed, 18 Jun 2025 12:18 AM IST
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Narada narrated the story of attachment and taught us not to be arrogant
संवाद न्यूज एजेंसी
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रादौर। श्री बालाजी मंदिर कॉलेज रोड में श्री राम कथा के चौथे दिन कथा व्यास राम सुमिरन दास महाराज ने नारद मोह का प्रसंग सुनाया। यह प्रसंग सुनाकर उन्होंने श्रद्धालुओं को घमंड न करने की सीख दी।
कथा व्यास ने बताया कि एक बार ऋषि नारद ने घोर तपस्या की। उन्हें घमंड हो गया कि उन्होंने विषय-विकारों पर विजय प्राप्त कर ली। तपस्या पूरी करने के बाद वह अपने पिता भगवान ब्रह्मा से मिलने गए और उन्हें अपने उसी विश्वास से अवगत कराया। भगवान ब्रह्मा ने नारद से भगवान विष्णु से इस बारे में चर्चा नहीं करने का आग्रह किया।
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चूंकि नारद मुनी अति आत्मविश्वास व उत्साह में थे इसलिए उन्होंने अपने पिता द्वारा दी गई चेतावनी के बावजूद विष्णु के साथ वह बात साझा करने की सोची। अर्थात पिता की बात नहीं मानी। नारद मुनि विष्णु से मिलने गए। नारद मुनि के अभिमान व गलतफहमी को दूर करने के लिए विष्णु ने मायावी दुनिया रची, जहां सुंदर राजकुमारी का स्वयंवर किया गया।
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प्रसिद्ध शासक राजकुमारी से विवाह करने आए। ऐसा भव्य उत्सव व तैयारियां देखकर नारद मुनि राजकुमारी से विवाह करने के लिए उत्साहित हो गए। भगवान विष्णु का रूप मनमोहक है। नारद ने विष्णु को याद किया और उनसे उनका हरि रूप प्रदान करने के लिए इच्छा जाहिर की। संस्कृत में हरि का अर्थ बंदर होता है। भगवान विष्णु ने चतुराई से तथास्तु कहकर सहमति दी और नारद जी का चेहरा वानर की तरह परिवर्तित हो गया।
इससे नारद अनजान थे। स्वयंवर का समय आ गया और राजकुमारी ने शाही दरबार में प्रवेश किया। नारद कतार में खड़े थे और राजकुमारी की प्रतीक्षा कर रहे थे कि वह उन्हें माला पहनाए। वह पास आई और ऋषि नारद को अनदेखा कर आगे की ओर चली गई। नारद मुनि चौंक गए कि राजकुमारी ने उनकी उपेक्षा क्यों की। दूसरा मौका देते हुए नारद मुनि एक बार फिर पंक्ति में खड़े हो गए।

दूसरी बार भी राजकुमारी ने नारद को नजरअंदाज कर दिया, तब उनके पास खड़े किसी व्यक्ति ने नारद के बंदर रूप का मजाक उड़ाया। इससे नारद नाराज हो गए। तब उग्र नारद मुनि ने भगवान विष्णु को श्राप दिया कि तुम पत्नी वियोग में पूरा मानव जीवन व्यतीत करोगे। मेरी ही भांति वियोग का दर्द झेलोगे और बंदर जैसे मुख वाले प्राणी तुम्हारी मदद करेंगे। कथा श्री बालाजी सेवा समिति की ओर से कराई जा रही है। मौके पर समिति के प्रधान विनोद राणा, बबलू, प्रवीण, अनिल, प्रियकांत जोगी, श्रीराम गर्ग मौजूद रहे।
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