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नायब तहसीलदार और चपरासी को चार की सजा
यमुनानगर
Updated Thu, 31 Oct 2013 12:32 AM IST
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अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश राकेश सिंह की कोर्ट ने साढौरा की श्याम
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गोशाला की वसीयत रजिस्टर्ड करने के नाम पर रिश्वत लेने के दोषी नायब
तहसीलदार रमेश सैनी को चार साल की कैद और 10 हजार जुर्माना, चपरासी जागीर
को चार की साल कैद और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
जुर्माना न देने पर एक साल की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है। कोर्ट में करीब तीन साल चली सुनवाई के दौरान सोलह लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने नायब तहसीलदार व चपरासी को दोषी करार देते हुए फैसला सुनाया। सरकारी वकील सुरेंद्र कुमार ने बताया कि 16 सितंबर 2010 को साढौरा निवासी देवल राम, नायब तहसीलदार रमेश सैनी के पास श्याम गोशाला की वसीयत रजिस्टर्ड करवाने के लिए गया था। वसीयत रजिस्टर्ड करने की एवज में नायब तहसीलदार ने देवल राम से पांच हजार रुपये रिश्वत की मांग की। इसके बाद 2000 रुपये में सौदा तय हो गया। नायब तहसीलदार के कार्यालय से बाहर आने के बाद देवल राम ने इसकी शिकायत विजिलेंस से कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए उस समय के सीटीएम नवीन कुमार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट तैनात किया गया और डीएसपी विजिलेंस राधेश्याम के नेतृत्व में छापामारी की गई। विजिलेंस ने तय योजना के मुताबिक देवल राम को 2000 रुपये देकर भेज दिया। इस पर रंग लगा हुआ था। जब देवल राम ने रुपये नायब तहसीलदार को दिए, तो उसने रुपये लेने के बाद चपरासी जागीर को पकड़ा दिए। इस दौरान मौके पर पुलिस पहुंच गई। पुलिस को अपनी ओर आता देखकर चपरासी ने दो हजार रुपयों को वहां रखे रजिस्टर के नीचे रख दिया। इस मौके पर पहुंची पुलिस ने जब नायब तहसीलदार व चपरासी के हाथ धुलवाए तो वे लाल मिले। पुलिस ने मौके से दो हजार रुपये भी बरामद कर लिए। इसके बाद विजिलेंस ने नायब तहसीलदार व चपरासी के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि कोर्ट में करीब तीन साल तक चली सुनवाई के दौरान सोलह लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने नायब तहसीलदार रमेश सैनी व चपरासी को दोषी करार दिया।
कैथल में तैनात था नायब तहसीलदार
सरकारी वकील सुरेंद्र कुमार ने बताया कि इन दिनों नायब तहसीलदार रमेश सैनी कैथल में तैनात था। हालांकि रिश्वत लेने का मामला दर्ज होने के बाद नायब तहसीलदार को निलंबित कर दिया गया था, लेकिन बाद में उसे बहाल कर दिया। उन्होंने बताया कि मंगलवार को जब कोर्ट ने नायब तहसीलदार व चपरासी को दोषी करार दिया तो पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। गवाहों के बयान और विजिलेंस टीम द्वारा प्रस्तुत सबूतोें के मद्देनजर कोर्ट ने बुधवार को फैसला सुना दिया। इसके बाद दोनों को जेल भेज दिया ग
जुर्माना न देने पर एक साल की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है। कोर्ट में करीब तीन साल चली सुनवाई के दौरान सोलह लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने नायब तहसीलदार व चपरासी को दोषी करार देते हुए फैसला सुनाया। सरकारी वकील सुरेंद्र कुमार ने बताया कि 16 सितंबर 2010 को साढौरा निवासी देवल राम, नायब तहसीलदार रमेश सैनी के पास श्याम गोशाला की वसीयत रजिस्टर्ड करवाने के लिए गया था। वसीयत रजिस्टर्ड करने की एवज में नायब तहसीलदार ने देवल राम से पांच हजार रुपये रिश्वत की मांग की। इसके बाद 2000 रुपये में सौदा तय हो गया। नायब तहसीलदार के कार्यालय से बाहर आने के बाद देवल राम ने इसकी शिकायत विजिलेंस से कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए उस समय के सीटीएम नवीन कुमार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट तैनात किया गया और डीएसपी विजिलेंस राधेश्याम के नेतृत्व में छापामारी की गई। विजिलेंस ने तय योजना के मुताबिक देवल राम को 2000 रुपये देकर भेज दिया। इस पर रंग लगा हुआ था। जब देवल राम ने रुपये नायब तहसीलदार को दिए, तो उसने रुपये लेने के बाद चपरासी जागीर को पकड़ा दिए। इस दौरान मौके पर पुलिस पहुंच गई। पुलिस को अपनी ओर आता देखकर चपरासी ने दो हजार रुपयों को वहां रखे रजिस्टर के नीचे रख दिया। इस मौके पर पहुंची पुलिस ने जब नायब तहसीलदार व चपरासी के हाथ धुलवाए तो वे लाल मिले। पुलिस ने मौके से दो हजार रुपये भी बरामद कर लिए। इसके बाद विजिलेंस ने नायब तहसीलदार व चपरासी के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि कोर्ट में करीब तीन साल तक चली सुनवाई के दौरान सोलह लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने नायब तहसीलदार रमेश सैनी व चपरासी को दोषी करार दिया।
कैथल में तैनात था नायब तहसीलदार
सरकारी वकील सुरेंद्र कुमार ने बताया कि इन दिनों नायब तहसीलदार रमेश सैनी कैथल में तैनात था। हालांकि रिश्वत लेने का मामला दर्ज होने के बाद नायब तहसीलदार को निलंबित कर दिया गया था, लेकिन बाद में उसे बहाल कर दिया। उन्होंने बताया कि मंगलवार को जब कोर्ट ने नायब तहसीलदार व चपरासी को दोषी करार दिया तो पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। गवाहों के बयान और विजिलेंस टीम द्वारा प्रस्तुत सबूतोें के मद्देनजर कोर्ट ने बुधवार को फैसला सुना दिया। इसके बाद दोनों को जेल भेज दिया ग